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Bulky Uterus की वजह से भी होती है कंसीव करने में देरी, इन उपायों से दूर करें बच्चेदानी का भारीपन
महिलाओं में बच्चेदानी में सूजन (Swelling In Uterus:) की समस्या कॉमन हो गई हैं। इसे बल्की यूट्रस (bulky uterus) भी कहा जाता है। इसके अलावा भारी गर्भाशय" या "गर्भाशय में सूजन" भी कहा जाता है। इस कंडीशन में महिलाओं की बच्चेदानी में सूजन की वजह से महिलाओं के पेट में तेज दर्द होता है जो अक्सर और बार-बार होता है। वहीं, बार-बार होने वाला बुखार, कमर दर्द या सिरदर्द भी बच्चे दानी में सूजन के लक्षण होते हैं।

बच्चेदानी में होनेवाली यह सूजन गर्भधारण से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकती है। आइये जानते हैं बच्चेदानी में सूजन क्या है और बल्कि यूटरस के क्या और कैसे इसे ठीक करने के नेचुरल उपाय।
अब जानते हैं बल्की यूटरस के कारणों के बारे में-
एडेनोमायोसिस
यह स्थिति तब बनती है जब एंडोमेट्रियम यानी कि गर्भाशय की अंदरूनी सतह के टिशू उसकी दीवाल के अंदर बढ़ने लगते हैं। इस कारण गर्भाशय मोटा हो जाता है।
गर्भाशय के फाइब्रॉइड
फाइब्रॉइड गर्भाशय में होने वाली गांठें हैं। इनके ज़्यादा संख्या और बड़े आकार का होने पर गर्भाशय मोटा हो जाता है।
यूट्रीन पोलिप्स
ये गर्भाशय की अंदरूनी सतह पर बनने वाली छोटे आकार की गाँठें होती हैं। आमतौर पर छोटी होती हैं, लेकिन संख्या में अधिक होने पर इनसे भी गर्भाशय की मोटाई बढ़ सकती है।
स्कारिंग
किसी पिछली सर्जरी या इन्फेक्शन के कारण गर्भाशय में स्कार टिशू बन सकते हैं जिनसे गर्भाशय मोटा हो जाता है।
हार्मोनल असंतुलन
अगर प्रोजेस्टेरोन के मुकाबले एस्ट्रोजन की मात्रा अधिक बनने लगे तो इससे गर्भाशय के टिशूज़ की ग्रोथ बढ़ जाती है और गर्भाशय में सूजन होना संभव है।
बच्चेदानी में सूजन की वजह से हो सकती हैं ये समस्याएं
- पेल्विक में संक्रमण
- बच्चेदानी में फोड़ा होना या उनमें पस भर जाना
- यूट्रस का कैंसर
- इनफर्टिलिटी या प्रेग्नेंसी में दिक्कत आना
- डाइजेशन की समस्याएं
-गर्भाशय की मोटाई बढ़ने के कारण अक्सर पीरियड्स और सेक्स के दौरान असहनीय दर्द होता है।
- यूट्रस में गांठ होना आदि।
गर्भाशय में भारीपन के लिए घरेलू उपाय
गर्भाशय में भारीपन के तौर पर आप कुछ घरेलू उपाय भी आजमा सकते हैं जैसे कि-
- हीट थेरेपी यानी कि पेट के निचले हिस्से की हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल से सिकाई। इससे पेल्विक पेन में आराम मिलता है।
- कीगल व्यायाम जिसे रोजाना करने से पेल्विक मसल्स को मजबूती मिलती है और यूटरस में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है।
ओमेगा-3 युक्त संतुलित और पौष्टिक भोजन के साथ साथ अदरक और हल्दी का सेवन।
- ध्यान, योग और प्राणायाम से वज़न और स्ट्रेस को कंट्रोल में रखना ताकि हार्मोनल असंतुलन से बचा जाए।



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