Latest Updates
-
UP Style Fish Machli Kadhi Recipe: घर पर बनाएं सरसों वाली चटपटी मछली कढ़ी -
Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी पर जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा सभी 24 एकादशियों का पूर्ण फल -
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर इस विधि से पिएं पानी, नहीं टूटेगा आपका व्रत, मिलेगा व्रत का पूर्ण फल -
Garhwali Sweet Rice Arsa Recipe: पारंपरिक तरीके से बनाएं उत्तराखंड की खास मिठाई -
Nirjala Ekadashi Vrat In Periods: क्या पीरियड्स में निर्जला एकादशी का व्रत रख सकते हैं? जानें क्या हैं नियम -
'तुम मुझे छोड़कर क्यों चले गए, वापस आ जाओ', केतन की हत्या के बाद सिया गोयल ने किया ये पोस्ट, अब हो रहा वायरल -
Grandma Comfort Food Vegetable Khichdi Recipe: घर पर बनाएं दादी के हाथों जैसा स्वाद -
Padma Awards 2026: अलका याग्निक-ममूटी को मिला पद्म भूषण, रोहित शर्मा और आर माधवन भी सम्मानित -
Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: निर्जला एकादशी व्रत में जरूर करें इन नियमों का पालन, तभी मिलेगा व्रत का पूरा फल -
Special Healthy Gajar Paratha Recipe: सर्दियों के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता
पीएनडीटी एक्ट क्या हैं? जिसमें अजन्में बच्चे का लिंग जांच करवाने पर जाना पड़ सकता है जेल
तमिल यूट्यूबर इरफान इन दिनों चर्चाओं में बने हुए हैं। दरअसल ब्लॉगर ने यूट्यूब चैनल पर अपने अजन्मे बच्चे का लिंग का खुलासा कर इसका वीडियो बनाकर यूट्यूब चैनल पर शेयर कर दिया था। जिसके बाद से तमिलनाडू के स्वास्थ्य विभाग ने एक्शन लेते हुए पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 का उल्लंघन करने पर नोटिस जारी किया है।
विभाग ने यूट्यूबर को जेंडर रिवील करने वाले वीडियो को भी हटाने का निर्देश दिया है। दरअसल इरफान ने अपने यूट्यूब चैनल पर दुबई के एक अस्पताल में अपनी गर्भवती पत्नी का प्रसव से पहले 'पूर्व लिंग निर्धारण परीक्षण' कराते हुए एक वीडियो पोस्ट किया है। हालांकि भारत में इस जांच पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

जानिए क्या होता है PC-PNDT एक्ट और इस एक्ट का उल्लंघन करने वालों को क्या सजा और जुर्माना मिलता है?
क्या कहता है कानून?
देश में कन्या भ्रूण हत्या के मामलों को रोकने और लिंगानुपात की दर सामान्य करने के लिए गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 (PC-PNDT ACT) को लागू किया था। इसी वजह से 'पूर्व लिंग निर्धारण परीक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
जन्म से पूर्व अल्ट्रासाउंड कराना क्यों जरूरी होता है?
प्रसव पूर्व अल्ट्रासाउंड कराना एक सुरक्षित जांच है जो 9 महीने तक पेट में पल रहे बच्चें की ग्रोथ को मॉनिटर करता है। अल्ट्रासाउंड में ध्वनि तरंगों का उपयोग करके बच्चों के आकार और स्थिति को देखने को मदद करता है।
अल्ट्रासाउंड के जरिए गर्भ में पल रहे बच्चे में जेनेटिक डिसऑर्डर, मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर, जन्मजात विकृतियों और लिंग से जुड़ी दिक्कतों का पता लगाने में मदद मिलती है। यह कानून भ्रूण के विकास से जुड़ी जानकारियों का पता लगाने की अनुमति तो देता है, लेकिन अल्ट्रासाउंड मशीन से बच्चे का जेंडर पता लगाने पर कानूनी तौर पर प्रतिबंध है।
लिंग पता करने वाले पेरेंट्स के लिए सजा का प्रावधान?
PC-PNDT एक्ट के सेक्शन-4 का सब-सेक्शन 2 कहता है, अगर कोई शख्स किसी अस्पताल या क्लिनिक में बच्चे का जेंडर जानने के लिए जांच कराता है तो उसे जेल भेजने का प्रावधान है। उसे तीन साल तक की जेल की और 50 हजार रुपए तक का जुर्माना भरने की सजा दी जा सकती है।
अगर वही शख्स यही काम दोबारा करता हुआ पकड़ा जाता है तो इस बार उसकी सजा और जुर्माना, दोनों ही बढ़ जाएगी। उसकी सजा 5 साल बढ़ाने के साथ जुर्माने की रकम भी दोगुना बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दी जाती है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है।
भ्रूण जांच कराने वाले डॉक्टर का जा सकता है लाइसेंस
किसी क्लिनिक या अस्पताल में ऐसा परीक्षण कराना या करना गैर-कानूनी है। इतना ही नहीं संकेतों के जरिए लिंग की जानकारी का खुलासा करना भी गैर-कानूनी है। ऐसे मामलों में जानकारी देने वाली क्लीनिक, डॉक्टर और इससे जुड़े लोगों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा जेंडर का खुलासा करने वाले कामों में लिप्त पाए जाने वाले डॉक्टर और क्लीनिक का लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है।



Click it and Unblock the Notifications