Latest Updates
-
Shamonda Virus:शमोंडा वायरस क्या है और कैसे फैलता है? फ्रांस में पहली बार इंसान संक्रमित, जांच शुरू -
बार-बार सिरदर्द होना हो सकता है इन 6 गंभीर बीमारियों का संकेत, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी -
सौंफ और धनिया का पानी पीने से सेहत को मिलते हैं कई फायदे, जानें सेवन का सही तरीका -
नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं ये 5 योगासन, नियमित अभ्यास से हार्ट डिजीज का खतरा होगा कम -
चेहरे पर नारियल तेल में मिलाकर लगाएं कॉफी पाउडर, स्किन की इन 5 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा -
Myth Vs Fact: टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही 10 मिथ और उनकी सच्चाई -
Karwa Chauth Kab Hai 2026: करवा चौथ कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चांद दिखने का सटीक समय -
डायबिटीज में नारियल पानी पिएं या नींबू पानी? जानें शुगर कंट्रोल के लिए क्या है बेहतर -
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश
झारखंड की 12 गांवों की महिलाएं नहीं बन पा रही मां, विधायक ने उठाया विधानसभा में मुद्दा, जानें वजह
झारखंड के सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा इलाके से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हाल ही में डुमरी से विधायक जयराम कुमार महतो ने विधानसभा में दावा किया कि जिले के आस-पास के 12 गांवों की महिलाएं मां नहीं बन पा रही हैं। विधायक ने कहा कि इन महिलाओं में बढ़ती बांझपन की समस्या के पीछे यूरेनियम माइंस से निकलने वाला रेडिएशन एक मुख्य कारण हो सकता है।

विधायक का गंभीर दावा
विधानसभा में विधायक महतो ने बताया कि जादूगोड़ा इलाके की लगभग 47% महिलाएं मां बनने की इच्छा तक नहीं जगा पा रही हैं। यह दावा उन्होंने हेल्थ रिसर्च के हवाले से किया। उनके अनुसार, इन महिलाओं का यूरेनियम की खदानों में काम करना और रेडिएशन के सीधे संपर्क में आना उनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहा है। यह विषय न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से भी चिंता का कारण बन गया है।
कहां का है मामला?
जादूगोड़ा सिंहभूम जिले में स्थित है, जो देश के प्रमुख यूरेनियम उत्पादन क्षेत्रों में से एक है। विधायक ने आरोप लगाया कि माइंस के आस-पास रेडिएशन का स्तर सामान्य से काफी अधिक है, जो वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। इन 12 गांवों में रहने वाली महिलाएं या तो खदानों में काम करती हैं या उनके नजदीक रहती हैं, जिससे वे लगातार रेडिएशन के संपर्क में आ रही हैं।
रेडिएशन और बांझपन का कनेक्शन
दिवा आईवीएफ सेंटर के स्त्री रोग विशेषज्ञ शिखा गुप्ता के मुताबिक, लंबे समय तक आयनाइज़िंग रेडिएशन के संपर्क में रहने से डीएनए को नुकसान हो सकता है। इसका सीधा प्रभाव महिलाओं के प्रजनन अंगों पर पड़ सकता है, जिससे ओवुलेशन की प्रक्रिया बाधित हो सकती है और फर्टिलिटी में गिरावट आ सकती है। इसीलिए, रेडिएशन को बांझपन के एक गंभीर कारण के रूप में देखा जा सकता है।
अब आगे क्या कदम जरूरी हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए तुरंत व्यापक मेडिकल सर्वे और रेडिएशन स्तर की जांच की जानी चाहिए। प्रभावित महिलाओं के लिए फ्री इनफर्टिलिटी टेस्टिंग और काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही सरकार को खनन क्षेत्रों में रेडिएशन की निगरानी के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। यह मामला केवल मेडिकल नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा है, जिस पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।



Click it and Unblock the Notifications
