Latest Updates
-
Yoga For Arthritis: गठिया के दर्द से हैं परेशान तो रोज करें ये 5 योगासान, जल्द ही मिलेगी राहत -
फैटी लिवर होने पर भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना झेलने पड़ेंगे गंभीर नुकसान -
March Pradosh Vrat 2026: मार्च महीने का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
हाथ से इन 5 चीजों का गिरना है बड़े संकट का संकेत, कहीं आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज? -
School Holiday April 2026: छुट्टियों की भरमार! गुड फ्राइडे से आंबेडकर जयंती तक, देखें अवकाश लिस्ट -
इन 5 तरीकों से मिनटों में पहचानें असली और नकली सरसों का तेल, सेहत से न करें समझौता -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए अरबी की सब्जी, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
महिलाओं की कौन सी आंख फड़कने का क्या है मतलब? जानें बाईं और दाईं आंख के शुभ-अशुभ संकेत -
New Rules From 1 April 2026: दवाइयों से मोबाइल तक, जानें 1 अप्रैल से क्या होगा सस्ता, क्या महंगा? -
Kamada Ekadashi Upay: वैवाहिक कलह और कर्ज के बोझ से हैं परेशान? कामदा एकादशी पर करें ये 3 अचूक उपाय
जिसे आप सिर्फ खांसी समझ रहे हैं कहीं वो अस्थमा तो नहीं, पीडियाट्रिशियन ने बताए बच्चों में दमा के लक्षण
Asthma Symptoms In Children : खराब हवा, पैसिव स्मोकिंग और प्रदूषण के वजह से बच्चे भी छोटी उम्र में अस्थमा का शिकार बन रहे हैं। कई लोगों को लगता है कि अस्थमा सिर्फ वयस्कों की बीमारी है लेकिन आपको बता दें कि इम्यूनिटी पावर मजबूत नहीं होने की वजह से या जन्मजात भी बच्चे अस्थमा से पीड़ित हो सकते हैं।
बचपन से ही अगर बच्चे के लक्षणों पर ध्यान दिया जाए तो समय रहते बच्चे में अस्थमा का निदान किया जा सकता है।
जयपुर के इटर्नल अस्पताल के वरिष्ठ शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विवेक शर्मा ने बताया कि किन वजहों से बच्चों में अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है और किन लक्षणों में ध्यान रखकर आप बच्चों में अस्थमा की पहचान कर सकते हैं।

इन अस्थमा के लक्षण दिखने पर तुरंत हो जाएं अलर्ट
- सांस लेने में तकलीफ
- दिन की तुलना में रात में ज्यादा खांसी आना
- खेलने में सांस फूलने लगती है
- थकान और कमजोरी लगना
- नाक बहना
- ब्रॉनकाइटिस या निमोनिया के लक्षण
- छाती से सीटी जैसी आवाज आना
- छाती में जकड़न सा लगना
अस्थमा एक से दूसरे को फैलने वाली बीमारी है?
डॉक्टर विवेक शर्मा ने बताया कि यह लोगों के बीच सबसे बड़ी भ्रांति हैं कि अस्थमा संक्रामक या छूत की बीमारी है। कभी ये न सोचे कि आपके बच्चे को स्कूल या घर में किसी संक्रमित से अस्थमा हो जाएगा।
अस्थमा क्या जेनेटिक बीमारी है?
अस्थमा जेनेटिक तौर पर भी बच्चों को पेरेंट्स से मिल सकती हैं और यह अगली जनरेशन में भी आसानी से ट्रांसफर हो सकती है। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप बच्चों को इस समस्या से बचा सकते हैं।
- साफ सुथरे माहौल में बच्चे को रखें।
- कलर प्रिजरवेटिव फूड न खाने दें।
- बच्चे को हेल्दी फूड खिलाएं।
- बच्चे का प्रॉपर चेकअप करवाएं।
- बच्चे को फिजिकल एक्टिविटी कराएं।
- जितना हो सके बच्चे को फ्रेश हवा में ले जाएं।
- पैसिव स्मोकिंग से बच्चे को बचाएं।
- पॉल्यूटेड एरिया में न जाने दें।
अस्थमा के खतरे को कैसे कम करें?
- इनहेलर का इस्तेमाल करें।
- नम और उमस भरे एरिया को सूखा रखें।
- अगर पॉसिबल हो तो एसी यूज करें।
- बाथरूम में बैक्टीरिया पनपने न दें इसलिए रेगुलर सफाई करें।
- एक्जॉस्ट फैन लगाएं ताकि घर में नमी न पनपे।
- पौधों को बेडरूम में न रखें।
- बेडशीट कवर और पिलो को हफ्ते में एक बार गर्म पानी से धोएं।
- समय-समय पर एसी और हीटर्स के फिल्टर्स को बीच-बीच में बदलते रहें।
- घर में पालतू जानवर रखने से एलर्जी है तो, उसे दूर रखें।
बच्चे को अस्थमा अटैक आने पर क्या करें?
- बच्चे को सीधा बैठाएं (लेटने न दें)। कपड़े की जकड़ को ढ़ीला करें और बच्चे को शांत रखे।
- देर किए बिना अपने बच्चे को रिलीवर दवा डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा में दे।
- पांच मिनट के लिए रुकें। अगर बच्चे में कोई सुधार न हो तो बच्चे को दोबारा उतनी दवा दें, जितनी डॉक्टर ने बताई हो।
- सलाह लिए बगैर रिलीवर दवा की मात्रा और न बढ़ाएं।



Click it and Unblock the Notifications











