Latest Updates
-
किन्नौर कैलाश के दर्शन के बाद बदल गई हिमांशी खुराना की जिंदगी, एक्ट्रेस ने बताया क्यों इतनी खास है यह जगह -
Raksha Bandhan 2026: कब है रक्षाबंधन? जानें तिथि, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और महत्व -
कभी 75 रुपये में साफ करते थे गाड़ियां, आज कहलाते हैं दिल्ली के खान सर; पढ़ें मनोज गर्ग की सक्सेस स्टोरी -
Sawan 2026: सावन में दाढ़ी और बाल कटवाना चाहिए या नहीं? जानें ज्योतिष और धार्मिक नियम -
कौन थीं अनन्या राज? 27 साल की उम्र में हुई मौत, एक महीने बाद सामने आई निधन की खबर -
Rudrabhishek Vidhi: घर पर शिव जी का रुद्राभिषेक कैसे करें? जानें सरल पूजा विधि, सामग्री, मंत्र और जरूरी नियम -
Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर करें ये 5 सरल उपाय, कालसर्प दोष से मिलेगी राहत -
Nag Panchami 2026 Wishes: नाग देवता की कृपा बरसे...नाग पंचमी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Independence Day 2026: भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुना गई? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान -
Hariyali Teej Vrat Katha: हरियाली तीज पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा शिव-पार्वती जी का आशीर्वाद
क्या Chandra Grahan के दौरान शारीरिक संबंध बनाना सही है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र और नियम
Physical Relation During Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने वाला है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि ऊर्जा के परिवर्तन का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, तो इसे 'सूतक काल' से जोड़ा जाता है, जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से 'अशुद्ध' समय माना गया है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या चंद्र ग्रहण के दौरान शारीरिक संबंध (Physical Relation) बनाना सही है?
धार्मिक मान्यताओं और आयुर्वेद के अनुसार, ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर हमारे मन और शरीर पर पड़ता है। शास्त्रों में इस दौरान संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करने की सलाह दी गई है। वहीं, विज्ञान इस विषय पर अपनी अलग राय रखता है। आज के इस विशेष लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि सूतक काल में फिजिकल रिलेशन बनाने की मनाही क्यों है, इसके पीछे के पौराणिक तर्क क्या हैं और विवाहित जोड़ों को किन गलतियों से बचना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार ग्रहण में 'संयम' का महत्व
प्राचीन ग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण का समय ईश्वर की भक्ति और ध्यान के लिए होता है। इस दौरान कामेच्छा या शारीरिक सुख में लिप्त होना अशुद्ध माना गया है, क्योंकि चंद्रमा मन का कारक है और ग्रहण के समय मन विचलित रहता है।
सूतक काल और फिजिकल रिलेशन पर क्या है धार्मिक तर्क?
चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले ही सूतक काल लग जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस काल में बनाए गए शारीरिक संबंधों से उत्पन्न संतान पर नकारात्मक ग्रहों का प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए इस अवधि में 'ब्रह्मचर्य' के पालन पर जोर दिया जाता है।
आयुर्वेद और स्वास्थ्य पर ग्रहण का प्रभाव
आयुर्वेद के नजरिए से देखें तो ग्रहण के दौरान हमारे शरीर की पाचन शक्ति और हार्मोन्स का संतुलन प्रभावित होता है। इस समय शारीरिक ऊर्जा का क्षय करना स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना गया है।
विज्ञान की राय: क्या वास्तव में कोई खतरा है?
आधुनिक विज्ञान ग्रहण को पूरी तरह से एक खगोलीय घटना (Astronomical Event) मानता है। विज्ञान के अनुसार, ग्रहण का मानव शरीर के प्रजनन तंत्र या फिजिकल रिलेशन पर कोई सीधा दुष्प्रभाव साबित नहीं हुआ है। यह पूरी तरह से व्यक्ति की अपनी आस्था का विषय है।
चंद्र ग्रहण के दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
सूतक काल में भोजन पकाने और खाने से बचना।
शुभ कार्यों या नई शुरुआत को टालना।
नुकीली चीजों (कैंची, सुई) का प्रयोग न करना।
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतना।
आपसी कलह या शारीरिक संबंधों से दूरी बनाना।



Click it and Unblock the Notifications