Latest Updates
-
फैटी लिवर होने पर भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना झेलने पड़ेंगे गंभीर नुकसान -
March Pradosh Vrat 2026: मार्च महीने का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
हाथ से इन 5 चीजों का गिरना है बड़े संकट का संकेत, कहीं आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज? -
School Holiday April 2026: छुट्टियों की भरमार! गुड फ्राइडे से आंबेडकर जयंती तक, देखें अवकाश लिस्ट -
इन 5 तरीकों से मिनटों में पहचानें असली और नकली सरसों का तेल, सेहत से न करें समझौता -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए अरबी की सब्जी, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
महिलाओं की कौन सी आंख फड़कने का क्या है मतलब? जानें बाईं और दाईं आंख के शुभ-अशुभ संकेत -
New Rules From 1 April 2026: दवाइयों से मोबाइल तक, जानें 1 अप्रैल से क्या होगा सस्ता, क्या महंगा? -
Kamada Ekadashi Upay: वैवाहिक कलह और कर्ज के बोझ से हैं परेशान? कामदा एकादशी पर करें ये 3 अचूक उपाय -
Kamada Ekadashi Vrat Katha: कामदा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान विष्णु की कृपा से पूरी होगी हर इच्छा
क्या Chandra Grahan के दौरान शारीरिक संबंध बनाना सही है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र और नियम
Physical Relation During Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने वाला है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि ऊर्जा के परिवर्तन का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, तो इसे 'सूतक काल' से जोड़ा जाता है, जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से 'अशुद्ध' समय माना गया है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या चंद्र ग्रहण के दौरान शारीरिक संबंध (Physical Relation) बनाना सही है?
धार्मिक मान्यताओं और आयुर्वेद के अनुसार, ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर हमारे मन और शरीर पर पड़ता है। शास्त्रों में इस दौरान संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करने की सलाह दी गई है। वहीं, विज्ञान इस विषय पर अपनी अलग राय रखता है। आज के इस विशेष लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि सूतक काल में फिजिकल रिलेशन बनाने की मनाही क्यों है, इसके पीछे के पौराणिक तर्क क्या हैं और विवाहित जोड़ों को किन गलतियों से बचना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार ग्रहण में 'संयम' का महत्व
प्राचीन ग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण का समय ईश्वर की भक्ति और ध्यान के लिए होता है। इस दौरान कामेच्छा या शारीरिक सुख में लिप्त होना अशुद्ध माना गया है, क्योंकि चंद्रमा मन का कारक है और ग्रहण के समय मन विचलित रहता है।
सूतक काल और फिजिकल रिलेशन पर क्या है धार्मिक तर्क?
चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले ही सूतक काल लग जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस काल में बनाए गए शारीरिक संबंधों से उत्पन्न संतान पर नकारात्मक ग्रहों का प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए इस अवधि में 'ब्रह्मचर्य' के पालन पर जोर दिया जाता है।
आयुर्वेद और स्वास्थ्य पर ग्रहण का प्रभाव
आयुर्वेद के नजरिए से देखें तो ग्रहण के दौरान हमारे शरीर की पाचन शक्ति और हार्मोन्स का संतुलन प्रभावित होता है। इस समय शारीरिक ऊर्जा का क्षय करना स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना गया है।
विज्ञान की राय: क्या वास्तव में कोई खतरा है?
आधुनिक विज्ञान ग्रहण को पूरी तरह से एक खगोलीय घटना (Astronomical Event) मानता है। विज्ञान के अनुसार, ग्रहण का मानव शरीर के प्रजनन तंत्र या फिजिकल रिलेशन पर कोई सीधा दुष्प्रभाव साबित नहीं हुआ है। यह पूरी तरह से व्यक्ति की अपनी आस्था का विषय है।
चंद्र ग्रहण के दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
सूतक काल में भोजन पकाने और खाने से बचना।
शुभ कार्यों या नई शुरुआत को टालना।
नुकीली चीजों (कैंची, सुई) का प्रयोग न करना।
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतना।
आपसी कलह या शारीरिक संबंधों से दूरी बनाना।



Click it and Unblock the Notifications











