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भूलकर भी अपनी लाडली से ना कहें ये बातें, वरना रिश्ते में आ सकती है दूरियां ..
हर घर में बेटियां अपने पिता की जान, उनकी लाडली होती हैं। वैसे भी अक्सर यही कहा जाता है कि बेटे मां के करीब होते हैं तो बेटियां अपने पापा के ज्यादा करीब होती हैं। पापा की परी और घर की रौनक, बेटी के उम्र के हर पड़ाव पर पापा उनके लिए खास भूमिका निभा रहे होते हैं।
उन्हें कभी बचपन में हर खेल में जीत दिलाने वाले सुपरमैन का रोल निभाते देखा जाता हैं तो कभी बिटिया की विदाई के समय बच्चों की तरह फूट-फूटकर रोते हुए। पढ़ाई या नौकरी के लिए घर से दूर जा रही बेटी अपने लिए सबसे ज्यादा भरोसा और उम्मीद पिता की आंखों में ही देखती है।

लेकिन इन सबके बावजूद कुछ बातें ऐसी होती है जिन्हें एक पिता को अपने बेटी से नहीं करनी चाहिए। क्यूंकि आपके कुछ शब्द बेटी के दिल को ठेस पहुंचा सकते है। यहां हम आपको वो प्रमुख बातें बताने जा रहे है, जिन्हें एक पिता को अपनी बेटी से नहीं कहनी चाहिए।
बेटा-बेटी में फर्क ना करें
इस दुनिया में ऐसे कई लोग है जो कहने को तो अपने बेटी को दिल का टुकड़ा कहते है, लेकिन जाने-अनजाने वो बेटा-बेटी में फर्क कर ही देते है। जिसकी वजह से बेटी के दिल को बड़ी ठेस पहुंचती है। कई पिता अपनी बेटियों से बेटों का फर्ज निभाने की उम्मीद करते है। जो एक बेटी के मन में हीन भावना का बीज बो देती है। इसलिए ये जरूरी है कि बेटा-बेटी को एक समान समझा जाए। और उन पर जिम्मेदारियां निभाने का दबाव ना ड़ाला जाए।
घर के काम करने के लिए ना करें मजबूर
हर पिता ये बात अच्छे से जानते है कि बेटी शादी करके दूसरे घर में जाएगी। ऐसे में समाज और परिवार के लोगों के दबाव में पिता बेटी को समय-समय पर घर के कामकाज पर ध्यान देने या उसमें निपुणता लाने के लिए सलाह देने लगता है। ताकि पराए घर जाकर उसकी बेटी को दूसरों के सामने शर्मिंदा ना होना पड़ें। लेकिन एक पिता के इस तरह के व्यवहार को एक बेटी दिल से लगा लेती है। जो उसके मानसिक विकास पर बुरा असर ड़ाल सकती है। इसलिए घर के कामकाज करने जैसी बातें करके अपने बेटी के दिल को ठेस ना पहुंचाए।
खाने के लिए टोकना
कई बार पिता बेटी के बढ़ते वजन को देखते हुए उसे मजाक-मजाक में कम खाने की सलाह दे बैठते है। और अपने पिता के इस मजाक को बेटी गंभीरता से ले लेती है। इसलिए खाने-पीने को लेकर बेटी के साथ कोई रोकटोक ना करें। बल्कि उसे उसकी पसंद की चीजें खाने दें।
बात-बात पर एडवाइज ना दें
हर इंसान का स्वभाव अलग-अलग होता है। किसी को कम बोलना पसंद होता है तो कोई ज्यादा देर तक चुप नहीं रह सकता। किसी को हमेशा मुस्कुराने की आदत होती है तो किसी को गंभीर रहने की। लेकिन अगर एक पिता अपनी बेटी को अपना व्यवहार बदलने की हिदायत देता रहेगा, तो ये एक बेटी को कभी अच्छा नहीं लगेगा। इसलिए जो जैसा है उसे वैसा ही रहने दें। अन्यथा आपके और आपके बेटी के रिश्ते में दूरियां बढ़ सकती है।
कायदे-कानून ना सिखाए
आजकज की युवा पीढ़ी खुले आसमान में उड़ना चाहती है, लेकिन वो ये कतई नहीं चाहती है कि उसकी उड़ान के आड़े कोई आए या उसे हर एक काम करने के कायदे-कानून सिखाए। वैसे भी अब जमाना वो आ गया है जिसमें महिलाएं पुरूषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। जबकि पिता आमतौर पर बेटी को लड़कियों के तौर-तरीकों पर चलने की सलाह देते हैं। लेकिन आपके इस व्यवहार की वजह से आपकी बेटी नकारात्मकता का शिकार हो सकती है। इसलिए ये जरूरी है कि बेटियों को बेटों के समान ही आजादी दी जाए और उसे वो करने दिया जाए जो उसे पसंद है।



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