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हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आना और छोटी-मोटी तकरार होना आम बात है। मगर रिश्तो में तकरार और टोका-टाकी के बीच फर्क होता है। जब आपके पार्टनर आपको अपनी मर्जी से जीवन जीने की बजाय, हमेशा अपने हिसाब से करने के लिए दबाव डालते हैं, तो हो सकता है कि आप इमोशनल अब्यूज का शिकार हो सकती हैं।
भावनात्मक शोषण (Emotional Abuse) एक ऐसा व्यवहार है जिसमें आपका पार्टनर आपकी पसंद-नापसंद और व्यक्तिगत पहचान को नकारते हुए अपने हिसाब से जीने पर मजबूर करता है। यह शोषण धीरे-धीरे आपके आत्मविश्वास और स्वतंत्रता को खत्म कर देता है। केयर के नाम पर वह आपको नियंत्रित करता है, आपकी आजादी छीनता है और आपके जीवन के हर पहलू पर अपना हक जमाने की कोशिश करता है।

इसमें छल और कपट के जरिए आपके विचारों को दबाना, दोषी ठहराना, और मानसिक रूप से कमजोर करना शामिल है। इसके लक्षणों को पहचानना और समझना जरूरी है ताकि आप इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए सही कदम उठा सकें।
आपको लगता है कि आप हमेशा गलत हैं
भावनात्मक शोषण का पहला संकेत यह है कि आपको हमेशा गलत महसूस कराया जाता है। दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति हर स्थिति में आपको दोषी ठहराता है, जिससे आप सोचने लगते हैं कि आपकी हर बात या काम गलत है। यह व्यवहार न केवल आपके आत्मविश्वास को कमजोर करता है, बल्कि आपको उनके नियंत्रण में रहने के लिए मजबूर करता है। वे आपकी गलतियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं ताकि आप अपनी क्षमताओं पर संदेह करें और उनकी बातों को बिना सवाल माने।
आपको अकेला फील होगा
भावनात्मक दुर्व्यवहार करने वाले व्यक्ति अपने पीड़ित को दोस्तों और परिवार से अलग करने की कोशिश करते हैं। वे ऐसा माहौल बनाते हैं कि आप खुद को अकेला और असुरक्षित महसूस करें। इसका उद्देश्य आपको कमजोर बनाना और भावनात्मक रूप से उन पर निर्भर करना है, ताकि आप उनकी बातों और नियंत्रण को बिना सवाल माने स्वीकार कर लें।
आपको डराकर धमकाकर रखेगा
भावनात्मक दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति अक्सर अपने पीड़ित को डराने के लिए धमकी, चिल्लाने या अपमान का सहारा लेता है। इससे पीड़ित हमेशा डर और असुरक्षा में जीने को मजबूर हो जाता है। इस डर के कारण वह किसी भी निर्णय लेने से घबराता है और अपनी स्वतंत्रता खोने लगता है, जिससे दुर्व्यवहार और बढ़ता है।
आपा खोने लगते हैं आप
भावनात्मक दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति आपको ऐसा महसूस कराता है जैसे आप पागल हो रहे हैं। वे कहते हैं कि आप बहुत संवेदनशील, भावुक या चीजों को गहराई से सोचते हैं। यह आपको अपने अनुभवों पर सवाल उठाने और खुद को दोष देने पर मजबूर करता है। इस मानसिक भ्रम का उद्देश्य है आपको कमजोर बनाना और मदद मांगने से रोकना।
बार-बार देनी पडती है सफाई
अगर हर मामूली बहस में आपको खुद को बार-बार डिफेंड करना पड़ता है और आपका पार्टनर सकारात्मक बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो यह मानसिक शोषण का संकेत है। यह व्यवहार आपके आत्मविश्वास को कमजोर करता है और आपको हमेशा दोषी महसूस कराता है। ऐसे रिश्ते में कम्यूनिकेशन की कमी और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत आपके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है।
इमोशनल अब्यूज यानी घरेलू हिंसा
अगर हर बार आपको अपने साथी को यह समझाना पड़ता है कि आप गलत नहीं हैं, और आप लगातार इमोशनल अब्यूज का शिकार हो रही हैं, तो यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। वैसे आपको बता दें कि इमोशनल अब्यूज घरेलू हिंसा के अंतर्गत आता है। अगर आपके रिश्तों में आपकी आजादी और जीने के अधिकारों का हनन हो रहा है, तो आप कानूनी सहायता भी ले सकती हैं।
ये है कानून
महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए, भारत में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (PWDVA) 2005 लागू है। यह कानून महिलाओं को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है और उन्हें राहत देने के उपाय उपलब्ध कराता है। महिला अपने शोषण की शिकायत पुलिस या मजिस्ट्रेट से कर सकती है, और कानूनी मदद के लिए सरकार और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।



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