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शादी में कम होते ‘स्पार्क’ का हल है बेबीमून!
हाल ही में कॉमेडी स्टार कपिल शर्मा अपनी प्रेगनेंट वाइफ गिन्नी संग कनाडा में बेबीमून इंजॉय करके वापस काम पर लौटे हैं। बेबीमून की इस लिस्ट में कपिल अकेले नहीं, बल्कि शाहिद कपूर और ईशा देओल जैसे स्टार्स भी शामिल हैं। असल में शादीशुदा कपल्स के बीच जिस तरह हनीमून को लेकर बहुत उत्सुकता बनी रहती है, ठीक इसी तरह इन दिनों बेबीमून का ट्रेंड भी खूब जोरों पर है।

'बेबीमून’ यानी कि बच्चे के जन्म से पहले, किसी खास डेस्टिनेशन पर एक दूसरे संग क्वालिटी टाइम बितना। कपल्स जानते हैं कि बच्चे के आने के बाद दोनों के लिए एक दूसरे को समय देना थोड़ा मुश्किल होने वाला है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ सेलेब्रिटीज के बीच ही बेबीमून का ट्रेंड बढ़ा हों, बल्कि इसका ट्रेंड इन दिनों आम लोगों के बीच भी खूब पॉपुलर हो चुका है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है बेबीमून का कॉनसेप्ट और इसे प्लान करते समय किन-किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

हनीमून का ही दूसरा नाम
शादीशुदा लोगों के बीच हनीमून के बाद इन दिनों बेबीमून बहुत ज्यादा चर्चा में है। इन दिनों प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से कपल्स एक दूसरे के संग वक्त बिताने के लिए घूमने निकल रहे हैं। हालांकि प्रेगनेंसी के दौरान का यह ट्रिप एक तरह का हनीमून ही है, लेकिन थोड़ा सा अलग। इस दौरान कपल्स डिलीवरी से पहले कुछ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए ही बेबीमून प्लान करते हैं, ताकि दोनों के बीच का मिस होता स्पार्क वापस आ सके। वैसे इस तरह का ट्रिप प्लान करना थोड़ा सा मुश्किल है, क्योंकि इस दौरान थोड़ी ज्यादा केयर करनी पड़ती है। जैसे उदाहरण के तौर पर
ट्रिप के दौरान डॉक्टर का होना।
प्रेगनेंट वाइफ की हेल्थ।
बेबीमून की डेस्टिनेशन पर प्रेगनेंसी से जुड़ी सभी तरह की मेडिकल सुविधाओं का होना।
इस ट्रिप के लिए जगह का तापमान भी देखना पड़ता है।

क्यों जरूरी है बेबीमून
बच्चे की प्लानिंग और फिर प्रेगनेंसी के दौरान कपल्स में बहुत से इमोशन उभरते हैं। ऐसे में बेबीमून ही सही समय होता है कि जब कपल्स एकदूसरे के साथ वक्त बिता पाते हैं, क्योंकि एक बार बच्चे के आने बाद उनकी दिनचर्या पहले जैसी नहीं रह जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नवजात बच्चे को मां से खास लगाव होता है, उसे अपनी मां से पूरा वक्त और पूरी केयर चाहिए होती है। ऐसे में पति-पत्नि के बीच बहुत सी गलतफहमियां हो सकती हैं। ऐसे में बेबीमून, इस रिश्ते के खोए हुए प्यार और समझ को एक बार फिर से जगाता है।

कब जाए बेबीमून पर?
प्रेगनेंसी के दौरान बेबीमून पर जाने का सही समय 10-24 हफ्तों के बीच का माना जाता है। वैसे आप चाहें तो मिड प्रेगनेंसी में भी जा सकते हैं, लेकिन बस ध्यान रहे कि डिलीवरी की डेट थोड़ी दूर ही हो। साथ ही ऐसी बहुत सी एयरलाइंस है, जिनमें प्रेगनेंसी के दौरान सफर करना मना है, आप चाहें तो पहले से ही एयरलाइंस से इस बारे में बात कर सकते हैं। ताकि वह आपकी जरूरत के मुताबिक सभी इंतेजाम कर सके, जैसे कि व्हीलचेयर की उपलब्धता, जल्दी क्लीयरेंस और आसानी से चेक इन इत्यिादी।

सोच समझकर चुनें डेस्टिनेशन
जिस तहर हनीमून के लिए, बहुत सी रिसर्च कर आप डेस्टिनेशन चुनते हैं, ठीक उसी तरह बेबीमून के समय सोच समझकर जगह का चुनाव करें। जैसे कि, जगह ऐसी हो जहां आपकी प्रेग्नेंट वाइफ को ज्यादा ना चलना पड़े, कहीं चढ़ाई ना हो और दवा व डॉक्टर का इंतेजाम पूरा हो। साथ ही, अगर आप खुद ड्राइव कर, बेबीमून पर जाने का प्लान बना रहे हैं तो, बहुत सर्तकता से गाड़ी चलाएं। याद रखें कि यह यात्रा 9-10 घंटे से ज्यादा की ना हो। गर्भवती महिला का एक जगह बहुत देर तक बैठे रहने से बच्चे तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन का बहाव गड़बड़ा जाता है।

लें डॉक्टरी सलाह
बेबीमून के दौरान आप अपने शहर और डॉक्टर से कुछ दिनों के लिए दूर जा रहे हैं, ऐसे में डॉक्टर की सलाह बहुत जरूरी है। दवा का किट न भूलें और जहां आप जा रहे हैं वहां, आस पास डॉक्टर की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए। साथ ही घूमने फिरने के चक्कर में थकने से बचें क्योंकि इससे ना सिर्फ आपकी बॉडी पर असर होगा, बल्कि अदंर पल रही नन्ही सी जान की सेहत पर भी जोर पड़ेगा।



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