Latest Updates
-
लंच में बनाएं उत्तर प्रदेश की चना दाल कढ़ी, उंगलिया चाटते रह जाएंगे घरवाले -
Gangaur Ke Geet: 'आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै'...इन मधुर गीतों के बिना अधूरी है गौरा पूजा, यहां पढ़ें पूरे लिरिक्स -
प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीनों में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, वरना बच्चे की सेहत पर पड़ेगा बुरा असर -
Viral Video: टीम इंडिया की T20 वर्ल्ड कप जीत पर पाकिस्तान में जश्न, काटा केक और गाया 'जन-गण-मन' -
कौन हैं Mahieka Sharma? जिसके प्यार में 'क्लीन बोल्ड' हुए Hardik Pandya, देखें वायरल वीडियो -
कौन हैं Aditi Hundia? T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद Ishan Kishan के साथ डांस Video Viral -
काले और फटे होंठों से हैं परेशान? तो पिंक लिप्स पाने के लिए आजमाएं ये घरेलू नुस्खे -
Chaitra Navratri 2026: 8 या 9 दिन जानें इस बार कितने दिन के होंगे नवरात्र? क्या है माता की सवारी और इसका फल -
Gangaur Vrat 2026: 20 या 21 मार्च, किस दिन रखा जाएगा गणगौर व्रत? नोट करें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त -
घर में लाल चीटियों का दिखना शुभ है या अशुभ? जानें शकुन शास्त्र के ये 5 बड़े संकेत
साउथ इंडियन वेडिंग की अनोखी रस्में और आकर्षक परंपराओं को क्या अलग बनाता है, जानिए
निश्चितार्थम, लग्नम, काशी यात्रा या कन्यादान, भारत में बारह से अधिक दक्षिण भारतीय विवाह की परंपराएं होती हैं,जिसे अलग-अलग तरह से सेलिब्रेट किया जाता है। कुछ रस्में आम होती हैं, लेकिन कुछ परंपराएं बिल्कुल अनोखी होती हैं। भारत के हर राज्य का अपना सांस्कृतिक टेस्ट है। शादी समारोहों के अलावा, इन सभी राज्यों में शादी के कई स्टेप्स होते हैं, अलग अलग तरह के दुल्हन और दूल्हे के कपड़े, खाने, संगीत और पहचान होती हैं।

आंध्र प्रदेश
निश्चितार्थम, पेल्लीकुथुरु और स्नाथकम का मतलब है सगाई, हल्दी-तेल समारोह और दूल्हे का पवित्र स्नान। करीबी दोस्त और परिवार के सदस्य इसमें भाग लेते हैं। गिफ्ट्स, कपड़े और मिठाइयों का आदान-प्रदान किया जाता है।
काशी यात्रा काफी मजेदार समारोह है। इसमें दुल्हन के पिता और भाई उसे रोकते हैं और उसे शादी के लिए मना लेते हैं। वहीं जब दूल्हा शादी छोड़ने और शादी को स्वीकार नहीं करने का नाटक करता है।
मंगल स्नान में जोड़े शादी की सुबह पवित्र स्नान करते हैं। बुरी आत्माओं को दूर रखने के लिए आरती और गौरी-गणेश पूजा होती है।
जीरकल्ला-बेलामु का मतलब है कि जीरा और गुड़ का पेस्ट, जो जोड़े के हाथों पर रगड़ा जाता है।
कन्यादान, मंगलसूत्र, सप्तपदी ये हर हिंदू विवाह में अनिवार्य है।कन्यादान में दुल्हन के माता-पिता अपनी बेटी को दूल्हे को देते हैं। दूल्हा पवित्र मंगलसूत्र को दुल्हन के गले में बांधता है। अंत में, युगल अग्नि के चारों ओर सात बार परिक्रमा करते हुए विवाह की प्रतिज्ञा लेते हैं।

कर्नाटक
निश्चय तामुलम, कुंडली का मिलान किया जाता है, और शादी की तारीख तय की जाती है। कपड़े, मिठाई, नारियल और पान के पत्तों का आदान-प्रदान किया जाता है।
नंदी - शांतिपूर्ण विवाह सुनिश्चित करने के लिए परिवार के पुजारी द्वारा की जाने वाली पूजा है। शादी का पहला निमंत्रण सर्वशक्तिमान ईश्वर से उनका आशीर्वाद लेने के लिए दिया जाता है।
देव कार्य - शादी में जाने से पहले दूल्हा आस-पड़ोस के सभी मंदिरों से आशीर्वाद लेता है।
काशी यात्रा, मंडप पूजा, वर पूजा, जयमाला, सप्तपदी, दहरहेर्दू (कन्यादान), विदाई और गृह प्रवेश कुछ दक्षिण भारतीय शादियों में प्रचलित कुछ सामान्य परंपराएं हैं।
ओखली दूल्हा और दुल्हन के परिवारों के बीच खेले जाने वाले खेल और चंचल रीति-रिवाजों का एक समारोह है।
दूल्हा एक सफेद सूती या रेशमी धोती पहनता है जिसकी कमर पर पतली किनारी बंधी होती है। इसे सिल्क के दुपट्टे और पगड़ी के साथ पेयर किया जाता है। दुल्हन कांच की चूड़ियों, सोने के हार और मांग टिक्का लगाती है साथ ही रंगीन नौवारी साड़ी पहनती है।

केरल
यहां पर तीन अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि वाले तीन समुदाय केरल में शादी की परंपराओं का पालन होता हैं। राज्य से कुछ अनोखी दक्षिण भारतीय विवाह परंपराएं निभाई जाती हैं।
ईसाई विवाह:
दुल्हन सुनहरी सीमा वाली सफेद साड़ी पहनती है और सिर पर मुकुट के साथ सोने के आभूषण और सफेद घूंघट पहनती है। केरल में ईसाई विवाह परंपराएं सटीक हैं:
नायर शादी
एक नायर शादी में शादी के कल्याण मंडप को एक खास अंदाज में मंचित करना महत्वपूर्ण है। दक्षिण भारतीय विवाह परंपराएं नायर शादियों में विशिष्ट हैं।

मुस्लिम शादी:
नाल निश्चयम् यानि कि शादी की डेट फिक्स की जाती है। जिसके बाद से शादी की तैयारियां शुरू हो जाती है। मेलांची रावू या मेहंदी, फिर मप्पिला पाट्टू (संगीत गीत) के बाद निकाह होता है, जो मस्जिद में या किसी भी किसी हॉल , लॉन में आयोजित होता है। दावत के लिए विदेशी मालाबार व्यंजन परोसे जाते हैं। बिरयानी और सुलेमानी चाय अवश्य होती है। अरायिल कुडल , जिसमें मालाबार मुसलमान मातृसत्तात्मक परंपरा का पालन करते हैं और दुल्हन के घर में प्रवेश करते हैं। नवविवाहितों को आशीर्वाद दिया जाता है। वीट्टिल कुडल तब होता है जब युगल दूल्हे के घर जाते हैं, गिफ्ट्स मिलते हैं और एक भव्य पार्टी मनाते हैं सलकारम या रिसेप्शन पार्टी इसके बाद आयोजित होती है।

तमिलनाडु
सबसे पहले सगाई होती है। इसके बाद पदाइपु यानि की पके भोजन द्वारा पितरों का सम्मान किया जाता है।
अरसानिक्कल और मटरू कट्टुथल का मतलब है कि शादी के मंच को बांस की छड़ियों और ढकने के लिए पीले कपड़े से सजाया जाता है।
इसके बाद पूरम कजिथा, दुल्हन का पवित्र स्नान और उसे सोने की जंजीरों और नीम के पत्तों से सजाया जाता है। अज़हग आरती और गणेश पूजा की जाती है, जिसमें दूल्हे की दादी उसे आशीर्वाद देती हैं और शादी के लिए जाने से पहले पूजा करती हैं।
मंगलसूत्र / थाली और फिर युगल पवित्र अग्नि के चारों ओर सात फेरे लेते हैं। इसैवु पिदिमानम या विवाह समझौता पुजारी द्वारा किया जाता है।
पदपूजा, कुलम वझुम पिल्लई और थुम्बु कट्टुडल का मतलब है कि नए परिवार में दुल्हन का स्वागत होता है, बहन और मां दुल्हन के सिर को पवित्र राख और हल्दी से इक्कीस बार स्पर्श करती हैं। फिर दुल्हन पान के पत्तों से अपनी सास के पैर धोती है। दुल्हन को घर की जिम्मेदारी दी जाती है और उसके गले में एक वैवाहिक धागा बांध दिया जाता है



Click it and Unblock the Notifications











