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अरदास के साथ हुई परिणीति-राघव की शादी की रस्में शुरु, पंजाबी रीति रिवाज में जानें इसका महत्व
Parineeti Chopra-Raghav Chadha wedding : 24 सितंबर को शादी के बंधन में बंधने वाले बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा और आप पार्टी के नेता राघव चड्ढा की वेडिंग सेरेमनी बीते बुधवार को अरदास के साथ शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शादी की सारी रस्में उदयपुर के 5 स्टार होटल ताज लेक पैलेस और लीला पैलेस में पूरी होनी है। पंजाबी रीति-रिवाज में अरदास का बहुत महत्व है। हर शुभ कार्य में अरदास जरुर की जाती है।
जिस तरह से हिंदू शादी में गणेश स्थापना के साथ ही विवाह की रस्में शुरू हो जाती है, ठीक उसी तरह से सिखों में अरदास के साथ शादी की शुरुआत की जाती है। आइए जानते हैं पंजाबी वेडिंग में अरदास का महत्व।

अरदास का मतलब
सिख धर्म की प्रार्थना को अरदास कहा जाता है।अरदास कोई कार्य आरंभ या समापत करने के पश्चात गुरु ग्रन्थ की हजूरी में समूहक तौर पर हाथ जोड़कर सिर झुकाकर ख़ड़े होकर की जाती है। अरदास शब्द अर्ज+दास शब्द से मिलकर बना है, जिसका मतलब है- विनम्र सेवक द्वारा परमशक्ति या भगवान से की गई प्रार्थना है।
कुछ लोगों का मानना है कि ये फारसी शब्द अर्जदाशत , (अर्ज़ +दाशत ) से मिलकर बना है। इसमें अर्ज़ अरबी का शब्द है जिस का अर्थ विनती और प्रार्थना से होता है। वहीं ना और दाश्त का अर्थ है रखना, जो कि फारसी शब्द ख्वास्तान ,(खाहश ) से निकला है। सिख धर्म का अनुसरण करने वालों के लिए इसका हिस्सा बनना अथवा इसका पाठ करना जरूरी माना जाता है।

पंजाबी शादी में अरदास का महत्व
अरदास एक प्रार्थना है, इसलिए इसे शादी जैसे शुभ काम को शुरू करने से पहले गुरुजी का आर्शीवाद पाने के लिए किया जाता है। इसके बाद ही शादी की रस्में शुरू हो जाती है। इस तरह प्रार्थना करके इस खुशी और शुभ मौके के लिए वाहे गुरु का धन्यवाद किया जाता है और प्रार्थना की जाती है शादी की सारी रस्में खुशी के साथ पूरी हो जाएं।
कब जरुरी है अरदास
सिख धर्म पर इन 3 समय अरदास कराने का नियम है।
1. नितनेम के बाद
2. कोई काम शुरू करने से पहले वाहे गुरु का आर्शीवाद पाने के लिए
3. कोई कार्य सफल होने या खुश खुबरी के लिए धन्यवाद अदा करने के लिए।

फिर शुरु होती है ये रस्में
अरदास के बाद से ही पंजाबी शादियों की रस्मों की अदायगी शुरु हो जाती है। जिसमें मेहंदी और कलीरे बांधने की रस्म, सेहराबंदी, आनंद कराज, और बारात, मिलनी, लावन और सिख्या शामिल होता है।



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