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Shikhar Dhawan Divorce: शिखर धवन को मानसिक क्रूरता के आधार पर मिला तलाक, कैसे बनती है ये तलाक की वजह
Shikhar Dhawan Divorce : दिल्ली की पटियाला हाउस फैमिली कोर्ट ने शिखर धवन और उनकी पत्नी आयशा मुखर्जी के तलाक को मंजूरी दे दी है। कोर्ट का कहना है कि शिखर धवन की वाइफ ने क्रिकेटर को अपने बेटे से सालों तक अलग रहने के लिए मजबूर किया और मानसिक पीड़ा पहुंचाई।
कोर्ट का कहना है कि आरोपों से खुद का बचाव करने में आयशा मुखर्जी सफल नहीं हो पाई।

शिखर धवन और आयशा मुखर्जी के तलाक का कारण
शिखर धवन को लंबे समय तक अपने बेटे से दूर रहना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने तलाक लेने का फैसला लिया। भारत और ऑस्ट्रेलिया में बेटे के साथ शिखर धवन समय बिता सकते हैं और वीडियो कॉल पर भी बात कर सकते हैं।
तलाक का आधार कैसे बन सकता है क्रूरता?
हिंदू विवाह अधिनियम,1955 में विवाह विच्छेद का एक आधार क्रूरता भी है। पति या पत्नी को उसके साथी द्वारा शारीरिक, यौनिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है तो क्रूरता के तहत इसे विवाह विच्छेद का आधार माना जा सकता है।
क्रूरता को कानूनी संदर्भ में परिभाषित करना कठिन होता है। कई बार शारीरिक क्रूरता तो दिख जाती है, लेकिन मानसिक क्रूरता को बयां नहीं किया जा सकता। शारीरिक क्रूरता शरीर पर निशान छोड़ती है, लेकिन मानसिक क्रूरता के साक्ष्य कैसे बताए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें बताया है विवाह में क्रूरता-
1. अंतरंगता न रखने का एकतरफा फैसला लेना, भले ही शारीरिक रूप से सक्षम है फिर भी बिना कारण बताए ऐसा करना क्रूरता है।
2. पति या पत्नी कोई भी अकेले ही यह फैसला ले कि विवाह के बाद बच्चा न करना।
3. इतना तनाव कि साथ न रह सके।
4. संबंधों में रूखापन या लगाव न होने को क्रूरता नहीं माना जा सकता। फिर भी बोलचाल में अक्खड़पन, चिड़चिड़ापन, भेदभाव या उपेक्षा से विवाहित जीवन में एक दूसरे को सहन करना मुश्किल हो जाता है।
5. लंबे समय तक नाराजी, निराशा और कुंठा होने को मानसिक क्रूरता मान सकते हैं।
6. लगातार आरोप लगाना,अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना, प्रताड़ना और मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।
8. बिना एक-दूसरे की अनुमति या जानकारी दिए पति या पत्नी कोई भी स्टरलाइजेशन करा ले, वह क्रूरता की श्रेणी में आता है।
9. सहृदयता को खत्म करते हुए अपनी खुशी के लिए प्रताड़ित करना क्रूरता है।
इसमें खास बात यह है कि शादी के बाद यह सब होता रहता है, इसे उस तरह से नहीं लिया जा सकता। शादी के बाद आपसी समझ विकसित होने में जो समय लगता है, तब तक ऐसा हो तो इसे क्रूरता की संज्ञा नहीं दे सकते।



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