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गोलियों से छलनी सीना, फिर भी भारत को दिलाई जीत, खून से भरी डिंपल की मांग! रुला देगी विक्रम की प्रेम कहानी
Vikram Batra- Dimple Cheema Emotional Love Story: कारगिल युद्ध का नाम आते ही सबसे पहले जिस हीरो का चेहरा आंखों के सामने उभरता है, वो हैं कैप्टन विक्रम बत्रा। उनकी बहादुरी, देशप्रेम और बलिदान की कहानियां आज भी हर भारतीय के दिल में जिंदा हैं। दुश्मनों की गोलियों से छलनी सीना होने के बावजूद उन्होंने भारत को जीत दिलाई। लेकिन उनके जीवन का एक ऐसा पहलू भी है जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं। उनकी अधूरी प्रेम कहानी जो परवान न चढ़ सकी लेकिन अमर जरूर हो गई। डिंपल चीमा से उनका रिश्ता सिर्फ मोहब्बत ही नहीं, बल्कि अमर त्याग और इंतजार की मिसाल है।
शादी से पहले ही देश के लिए प्राणों की आहुति देने वाले विक्रम ने तिरंगा फहराया, मगर पीछे छोड़ गए एक अधूरी मोहब्बत, जो आज भी हर भारतीय के दिल को रुला देती है। आज विक्रम बत्रा की बर्थ एनिवर्सरी है तो इस खास मौके पर देश के लाल को नम आंखों से याद करते हुए जानते हैं उनकी अधूरी मोहब्बत की रुला देने वाली कहानी।

सिर्फ 24 साल में हो गए शहीद
कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में एक पंजाबी हिंदू खत्री परिवार में हुआ था। विक्रम के एक जुड़वा भाई भी हैं जिनकी शक्ल एक जैसी है। विक्रम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंजाब के सरकारी स्कूल से की। इसके बाद चंडीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई की। विक्रम ने सिर्फ 24 साल की उम्र में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मगर अपने पीछे छोड़ गए बहुत सारी यादें जिनके सहारे उनका पहला और आखिरी प्यार यानी डिंपल चीमा जीवन काट रही हैं।
पहली नजर में ही हार बैठे थे दिल
विक्रम बत्रा ने चंडीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी में एम.ए. इंग्लिश की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में ही उनकी मुलाकात डिंपल चीमा से हुई। उन्हें देखते ही पहली ही नजर में वो अपना दिल हार गए। पहले दोनों की दोस्ती हुई और फिर प्यार का दीपक जला। डिंपल चीमा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि घरवाले उन पर शादी का दबाव बना रहे थे और उन्होंने इस बारे में विक्रम को बताया तो उन्होंने ब्लेड से उंगली काट अपने खून से उनकी मांग भर दी और बोला कि अब हमेशा के लिए तुम मेरी हो।
आज भी अधूरे हैं विक्रम और डिंपल के फेरे
डिंपल ने बताया कि एक बार वो मंदिर गए थे तो वहां पर परिक्रमा करते हुए विक्रम ने मेरी चुन्नी पकड़ ली और 4 फेरे ले लिए। जब मैंने ये देखा और पूछा कि तुम ये क्या कर रहे हो तो वो बोले कि 4 फेरे ले लिए हैं 3 वापस आकर लुंगा। लेकिन फिर वो तिरंगे में लिपटकर आए और हमारे फेरे अधूरे ही रह गए। उन्होंने भारत माता से किया वादा तो निभाया लेकिन शादी का वादा अधूरा ही रह गया।
विक्रम की यादों के सहारे जीवन जी रही हैं डिंपल
विक्रम बत्रा कारगिल युद्ध के हीरो माने जाते हैं जिन्होंने गोलियों से सीना छलनी होने के बाद भी पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए और उसे नाको चने चबवा दिए। सिर्फ 24 साल की उम्र में वो शहीद हो गए। 7 जुलाई 1999 को विक्रम ने वीरगति प्राप्त की थी। इस वीर योद्धा को 15 अगस्त 1999 को 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया था। डिंपल ने विक्रम बत्रा की शहादत के बाद डिंपल ने शादी न करने का निर्णय लिया। वे आज भी खुद को कैप्टन बत्रा की विधवा मानती हैं और एक स्कूल मे बतौर शिक्षिका बच्चों को पढ़ाती हैं।



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