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Ram Navami 2023: वो खासियतें जो राम और सीता को आदर्श युगल बनाती हैं, इनसे सीखें रिश्तों को निभाना
रामायण 5वीं या चौथी शताब्दी ईसा पूर्व लिखी गई हैं, जिसमें भगवान राम और मां सीता के बारें में बताया है, इसके साथ ही और भी बहुत कुछ है रामाराण में, लेकिन जो केंद्र है वो लॉर्ड रामा और मां सीता है। अगर आप भगवान के तौर पर ना देखकर केवल के पति के तौर पर देखते हैं और मां सीता को एक पत्नी, तो दोनों एक ऐसा रिलेशनशिप कायम करते हैं, जो सदियों से कपल्स के लिए आदर्श बनता आ रहा है। राम और सीता एक आदर्श पति-पत्नी हैं, जिनसे आज के कपल्स को भी सीखना चाहिए कि रिश्ते कैसे निभाए जाते हैं। लॉर्ड राम एक बेटे, भाई, दोस्त की भूमिका में वो सोने की तरह खरे उतरे लेकिन इस सब में उन्होंने अपनी पत्नी को जो स्थान दिया वो पूरी दुनिया को पता है, सीता के बिना राम अधूरे थे, ये तब पता चलता है कि जब रावण मां सीता का हरण कर लेता है। राम अपनी पत्नी के बिना किस तरह से परेशान रहे और अंत में रावण का अंत किया, ये एक बेहद प्यार करने वाला पति ही अपनी पत्नी के लिए सारे जोखिम उठाकर करता है। यहां पर राम और सीता की कुछ विशेषताओं के बारें में हम बताने जा रहे हैं जिसे हर किसी को आत्मसात करने की जरूरत और इसके लिए प्रयास करना चाहिए-

नैतिकता
लॉर्ड राम और सीता दोनों ही उच्च मूल्यों और नैतिकता वाले लोग थे। एक शादीशुदा जिंदगी में नैतिकता काफी महत्वपूर्ण है। रिलेशनशिप में सभी का लक्ष्य होना चाहिए अपनी नैतिकता को बनाकर रखना। आप राम और सीता से एक दंपत्ति के तौर पर नैतिकता का पाठ सीख सकते हैं और उस पर अमल कर सकते हैं।
वफादारी
रिलेशनशिप में वफादारी का सबसे अहम रोल हैं, जिसकी श्री राम और मां सीता दोनों ही सबसे बड़े उदाहरण हैं। दोनों ने ही अपने अपने स्थान पर अपने रिलेशन के लिए पूरी वफादारी दिखाई। भगवान राम अपनी पत्नी सीता के लिए पूरी जिंदगी ईमानदार रहे। वहीं उनकी धर्म पत्नी सीता जब रावण के कब्जे में थीं वहां पर उन्होंने अपनी पति की भक्ति दिखाई। लेकिन आज के वक्त में कपल्स इस बारें में सोंचना भूल चुके हैं। जो कपल के रूप में सबसे बड़े उदाहरण भगवान राम और सीता जिनकी रोज पूजा करते हैं, उनकी एक दूसरे के प्रति वफादारी को भूल चुके हैं।

कर्तव्य
लॉर्ड राम के लिए सबसे अहम था, अपने कर्तव्य को पूरा करने के उद्देश्य से वो 14 साल वनवास पर रहें, ये एक बेटे का कर्तव्य था, वहीं मां सीता ने एक पत्नी के तौर पर अपना कर्तव्य दिखाया और अपने पति के साथ वनवास गईं। जिसके बारें में सदियों से प्रशंसा की जाती रही है, लेकिन लोग राम और सीता के इस कर्तव्य से कुछ सीखते नहीं हैं। एक कपल के तौर पर सीता का ये कार्य बहुत ही उच्च कोटि का है। कर्तव्य की एक मजबूत भावना के रूप में - आपके काम, परिवार, रिलेशनशिप के लिए - कई निर्णयों का मार्गदर्शन करने में मदद कर सकती है।

एक दूसरे की इज्जत करना
शादीशुदा जिंदगी में कपल को एक दूसरे की इज्जत करनी चाहिए, उसकी बातों को अहमियत देनी चाहिए। आप इसे भी राम और सीता के कैरेक्टर से सीख सकते हैं। दोनों ही एक दूसरे को बहुत ज्यादा इज्जत देते थे। दोनों ही एक दूसरे की कही बातों की रिस्पेक्ट करते थे। आप लॉर्ड राम और सीता के बारें में जब पढ़ते जाएंगे तब आपको खुद इस बात का अहसास होगा कि दोनों एक दूसरे की कितनी ज्यादा रिस्पेक्ट करते थे। जो इनके कैरेक्टर को एक सितारे की तरह चमकाता आ रहा है।

एक दूसरे से प्यार
लॉर्ड राम और सीता का प्यार के बारें में आप इस तरह से भी जान सकते हैं कि सीता के जाने के बाद राम फूट-फूट कर रोए। जब वनवास के दौरान मां सीता को तकलीफ होती थी, तब भगवान राम से उनकी तकलीफ देखी नहीं जाती थी। वो मां सीता को हमेशा बहुत प्यार से पुकारते थे।
आज के वक्त में अगर हर शादीशुदा कपल लॉर्ड राम और मां सीता के रिलेशनशिप से कुछ भी सीख जाएं तो उनका रिश्ता आदर्श हो जाएगा, रिश्ते में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आएगी।



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