Ahoi Ashtami 2024: अहोई अष्टमी का करने जा रही है व्रत तो इन 5 बातों का जरूर रखें ध्यान

Ahoi Ashtami 2024: अहोई अष्टमी व्रत का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत बड़ा है, खासकर संतान की दीर्घायु, सुरक्षा और समृद्धि के लिए। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस साल, यह व्रत 24 अक्टूबर को रखा जाएगा।

इस दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं और संतान की भलाई के लिए अहोई माता की पूजा करती हैं। माना जाता है कि अहोई माता की पूजा और तारों को अर्घ्य देने से संतान के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

Ahoi Ashtami 2024 Kab Hai remember these five things if you are observing ahoi ashtami fast

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अहोई माता संतान के कष्टों को हरने वाली देवी मानी जाती हैं। इस व्रत में माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य, और समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन विशेष रूप से अहोई माता की कथा सुनने और उन्हें प्रसाद चढ़ाने का भी विशेष महत्व है, जिससे माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अगर आप भी अहोई अष्टमी का व्रत रख रहे हैं, तो इन पांच बातों का ध्यान रखें:

1. दोपहर में न सोएं: व्रत के दौरान दोपहर में सोना वर्जित माना जाता है। दिनभर माता के भजन-कीर्तन में समय बिताना शुभ माना जाता है।

2. नुकीली वस्तुओं से बचें: व्रत रखने वाली महिलाएं सुई, कैंची, चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करें। शास्त्रों के अनुसार, ये चीजें इस दिन अशुभ मानी जाती हैं।

3. कथा सुनें: व्रत के दिन अहोई माता की कथा सुनना अनिवार्य है। इससे माता का आशीर्वाद मिलता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

4. प्रसाद दें: पूजा के बाद प्रसाद बच्चों को दें। यह माता के आशीर्वाद का प्रतीक है और इससे बच्चों की सुरक्षा और समृद्धि होती है।

5. तारों को अर्घ्य दें: चांदी के लोटे से तारों को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। यदि चांदी का लोटा उपलब्ध नहीं है, तो तांबे के लोटे का भी उपयोग किया जा सकता है।

इन नियमों का पालन कर आप अहोई अष्टमी का व्रत विधिपूर्वक कर सकते हैं और अपनी संतान की सुरक्षा और लंबी आयु की कामना कर सकते हैं।

अहोई माता की आरती

।।अहोई माता की आरती।। (Ahoi Mata Ki Arti)

जय अहोई माता,

जय अहोई माता ।

तुमको निसदिन ध्यावत,
हर विष्णु विधाता ॥

ॐ जय अहोई माता ॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला,
तू ही है जगमाता ।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥

ॐ जय अहोई माता ॥

माता रूप निरंजन,
सुख-सम्पत्ति दाता ।

जो कोई तुमको ध्यावत,
नित मंगल पाता ॥

ॐ जय अहोई माता ॥

तू ही पाताल बसंती,
तू ही है शुभदाता ।

कर्म-प्रभाव प्रकाशक,
जगनिधि से त्राता ॥

ॐ जय अहोई माता ॥

जिस घर थारो वासा,
वाहि में गुण आता ।

कर न सके सोई कर ले,
मन नहीं घबराता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

तुम बिन सुख न होवे,
न कोई पुत्र पाता ।

खान-पान का वैभव,
तुम बिन नहीं आता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

शुभ गुण सुंदर युक्ता,
क्षीर निधि जाता ।

रतन चतुर्दश तोकू,
कोई नहीं पाता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

श्री अहोई माँ की आरती,
जो कोई गाता ।

उर उमंग अति उपजे,
पाप उतर जाता ॥

ॐ जय अहोई माता,
मैया जय अहोई माता ।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Sunday, October 20, 2024, 23:26 [IST]
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