Latest Updates
-
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख -
कौन हैं 'हनुमान अंश' की 21 साल की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर? विदेश की नौकरी छोड़ बनाई ब्लॉकबस्टर फिल्म
Devuthani Ekadashi Niyam: देवउठनी एकादशी के दिन भूल से भी न करें ये 5 काम, वरना भुगतना पड़ेगा बुरा परिणाम
Dev Uthani Ekadashi Niyam: देवउठनी एकादशी का पावन पर्व इस वर्ष 12 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। इसे प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
यह दिन सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु, जो चार महीनों से योग निद्रा में थे, जागृत होते हैं। इस दिन से शुभ और मांगलिक कार्य फिर से प्रारंभ हो जाते हैं।

देवउठनी एकादशी का महत्व
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली इस एकादशी का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। इसे भगवान विष्णु के प्रति समर्पण का प्रतीक माना गया है और इसी कारण इस दिन का व्रत और पूजा फलदाई माने जाते हैं। माना जाता है कि देवउठनी एकादशी के व्रत और पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और यह व्रत विशेष रूप से पुण्यदायक होता है।
देवउठनी एकादशी के नियम
देवउठनी एकादशी पर कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है। इस दिन व्रत और पूजा में लापरवाही या गलतियाँ करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिलता है। इसलिए इस दिन के नियमों का पालन सही विधि से करना चाहिए ताकि पूजा फलित हो सके।
दोपहर में न सोएं: देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु का जागरण होता है, जिसके बाद से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इसलिए इस दिन दोपहर में सोने से बचना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पूजा, भजन-कीर्तन में समय बिताने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
मांसाहार और नशे से दूर रहें: देवउठनी एकादशी के पवित्र दिन पर मांसाहार, लहसुन, प्याज और शराब का सेवन वर्जित माना गया है। इस दिन इनका सेवन करने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और इससे दरिद्रता का सामना करना पड़ सकता है। व्रत रखने वालों को नियमों का पालन करके मोक्ष की प्राप्ति होती है, अन्यथा उन्हें कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।
चावल का सेवन न करें: शास्त्रों के अनुसार, देवउठनी एकादशी पर चावल और इससे बनी चीजों का सेवन वर्जित है। मान्यता है कि इस दिन चावल खाने वाले का अगला जन्म रेंगने वाले जीव के रूप में हो सकता है।
विवाद और अपमान से बचें: इस दिन का व्रत श्रद्धा और समर्पण के साथ ही फलदायी होता है। इसलिए देवउठनी एकादशी पर विवाद, अपमान और अपशब्दों से बचना चाहिए, ताकि व्रत का संपूर्ण फल मिल सके और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हो।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
