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Kanwar Yatra Niyam: साल 2024 में कब शुरू होगा सावन, पहली बार कांवड़ यात्रा पर जाने वाले जान लें नियम
Kanwar Yatra 2024: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है। भक्तों का मानना है कि भगवान शिव एक साधारण जलाभिषेक से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
90कांवड़ यात्रा के अंत में कई भक्त भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हालांकि, कांवड़ यात्रा के दौरान की गई कुछ गलतियां महादेव को नाराज कर सकती हैं। आइए जानें इस पवित्र यात्रा के नियम।

सावन 2024 की शुरुआत और समाप्ति तिथियां (Sawan 2024 Kab Se Shuru Hai)
पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा 21 जुलाई 2024 को पड़ रही है। सावन का महीना 22 जुलाई से शुरू होकर 19 अगस्त 2024 को समाप्त होगा। यह अवधि उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो भगवान शिव को समर्पित विभिन्न अनुष्ठान करते हैं।
कांवड़ यात्रा 2024 कार्यक्रम (Kanwar Yatra 2024)
इस साल कांवड़ यात्रा 22 जुलाई 2024 को शुरू होगी और 2 अगस्त 2024 को सावन शिवरात्रि के साथ समाप्त होगी। इस दौरान भक्त हरिद्वार से गंगा जल लाकर अपने स्थानीय मंदिरों में शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।
इस दौरान शिव भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिलता है। वे हरिद्वार से गंगाजल लाते हैं और सावन शिवरात्रि पर स्थानीय शिव मंदिरों में स्थापित शिवलिंगों पर जल चढ़ाकर पूजा करते हैं।
कांवड़ यात्रा के नियम (Kanwar Yatra Rules in Hindi)
कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी तरह के नशीले पदार्थ जैसे भांग, गांजा या शराब का सेवन करना सख्त मना है। इसी तरह, पूरी यात्रा के दौरान मांसाहारी भोजन खाना भी वर्जित है।
एक और महत्वपूर्ण नियम यह है कि कावड़ को कभी भी ज़मीन या किसी मंच पर न रखें। इसके बजाय, इसे किसी स्टैंड या पेड़ की टहनी पर लटका देना चाहिए या लकड़ी के तख्ते पर रखना चाहिए। अगर यह गलती से ज़मीन को छू जाए, तो इसे नदी के पानी से फिर से भर देना चाहिए।
अगर उन्हें आराम करना है या निजी काम निपटाने हैं, तो उन्हें इसे किसी ऊंचे स्थान पर रखना चाहिए। इसके अलावा, बिना नहाए कांवड़ को छूना भी वर्जित है।
कावड़ में सिर्फ़ बहती हुई पवित्र नदी का पानी होना चाहिए, कुएँ या तालाब का नहीं। इसके अलावा, पूरी यात्रा शुरू से लेकर अंत तक पैदल ही पूरी करनी चाहिए। तीर्थयात्रा शुरू करने से पहले और यात्रा पूरी होने के बाद ही वाहनों का इस्तेमाल करने की अनुमति है।
पहली बार भाग लेने वालों के लिए, यह सलाह दी जाती है कि वे शुरू में कम दूरी तय करें तथा बाद के वर्षों में अपनी क्षमता के आधार पर धीरे-धीरे दूरी बढ़ा लें।
तीर्थयात्रियों को हमेशा अपने समूह के साथ रहना चाहिए और सुरक्षा कारणों से एक पंक्ति में चलना चाहिए। यात्रा आमतौर पर पास की नदी से पानी इकट्ठा करके और शहर में या उसके आस-पास के किसी प्रमुख शिव मंदिर की ओर बढ़ने से शुरू होती है।
भक्तों को भक्ति भाव से यात्रा करनी चाहिए और दूसरों के प्रति नकारात्मक विचार मन में नहीं लाने चाहिए। यात्रा की पवित्रता बनाए रखने और महादेव को प्रसन्न रखने के लिए ये नियम आवश्यक हैं।
यात्रा के दौरान स्वस्थ रहना बहुत ज़रूरी है। यात्रा में शामिल होने वाले लोगों को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही शामिल होना चाहिए और अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा केवल शुद्ध पेयजल का ही सेवन करना चाहिए। बीच-बीच में आराम करना भी ज़रूरी है।
कावड़ यात्रा एक गहन आध्यात्मिक यात्रा है जिसके लिए समर्पण और नियमों का पालन करना ज़रूरी है। इन दिशा-निर्देशों का पालन करके, भक्त एक सार्थक और सम्मानजनक तीर्थयात्रा अनुभव सुनिश्चित कर सकते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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