Latest Updates
-
Kumaoni Kheera Raita: गर्मी के मौसम में वरदान है उत्तराखंड का ये खीरे का रायता, 10 मिनट में ऐसे करें तैयार -
Surya Grahan 2026: किस अमावस्या को लगेगा दूसरा सूर्य ग्रहण? क्या भारत में दिन में छा जाएगा अंधेरा? -
Jamun Side Effects: इन 5 लोगों को नहीं खाने चाहिए जामुन, फायदे की जगह पहुंचा सकता है भारी नुकसान -
Amarnath Yatra 2026: सावधान! ये 5 लोग नहीं कर सकते अमरनाथ यात्रा, कहीं आप भी तो शामिल नहीं? -
26 या 27 अप्रैल, कब है मोहिनी एकादशी? जानें व्रत की सही तारीख और पारण का शुभ समय -
बेसन या सूजी का चीला, जानें वजन घटाने के लिए कौन सा नाश्ता है सबसे बेस्ट? नोट करें रेसिपी -
तपती धूप में निकलने से पहले खा लें प्याज-हरी मिर्च का ये खास सलाद, लू के थपेड़े भी रहेंगे बेअसर -
Somvar Vrat Katha: सोमवार व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान शिव पूरी करेंगे हर मनोकामना -
Aaj Ka Rashifal, 20 April 2026: मालव्य योग से चमकेंगे इन राशियों के सितारे, जानें आज का भाग्यफल -
Birthday Wishes for Boss: बॉस के बर्थडे पर भेजें ये खास और सम्मानजनक शुभकामनाएं, बोलें 'हैप्पी बर्थडे'
Mahakumbh 2025: कठोर तप करने वाले नागा साधु इस एक मौके पर नहीं रोक पाते हैं अपने आंसू
Mahakumbh 2025: हिंदू धर्म में सनातन का अर्थ है शाश्वत, यानी जो न कभी शुरू हुआ और न कभी खत्म होगा। नागा साधु इस शाश्वत परंपरा और धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं।
सांसारिक सुखों और अपने व्यक्तिगत जीवन का त्याग कर, वे ईश्वर की भक्ति और सनातन धर्म की सेवा में लीन हो जाते हैं।

नागा साधुओं का मां से जुड़ाव
नागा साधु अपनी जीवन यात्रा में भले ही हर सांसारिक बंधन तोड़ देते हों, लेकिन उनकी भावनाएं मां गंगा से अलग नहीं हो पातीं। गंगा को वे अपनी मां मानते हैं। गंगा से उनका यह आध्यात्मिक संबंध केवल पवित्रता और शुद्धि तक सीमित नहीं, बल्कि एक गहरी ममता और आत्मीयता का प्रतीक है।
शाही स्नान: भावनाओं का चरम
जब नागा साधु शाही स्नान के लिए गंगा के पास पहुंचते हैं, तो उनकी भावनाओं में गहराई आ जाती है। मां गंगा को देख वे बच्चों की तरह ममता और निर्भीकता से भर जाते हैं। उनका कठोर तपस्वी स्वरूप इस क्षण में कोमलता और स्नेह से भरा नजर आता है। गंगा के पास पहुंचकर उनकी आंखों से आंसू छलक जाते हैं, मानो मां से मिलन की प्रतीक्षा अब पूरी हो गई हो।
मां गंगा के प्रति अगाध श्रद्धा
शाही स्नान से पहले नागा साधु गंगा से मिलने की बेताबी और अठखेलियां करते हैं। उनका यह व्यवहार अध्यात्म की चरम सीमा को दर्शाता है। मां गंगा के पास पहुंचना उनके लिए किसी ईश्वर से मिलन जैसा अनुभव होता है। यह क्षण उनकी कठोर तपस्या और भक्ति का फल प्रतीत होता है।
नागा साधु भले ही हर सांसारिक बंधन को त्याग देते हैं, लेकिन गंगा से उनका रिश्ता हमेशा जीवित रहता है। शाही स्नान के दौरान गंगा मां से मिलन उनके लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक पुनर्जन्म होता है। यह क्षण उन्हें न केवल शांति और ममता का अनुभव कराता है, बल्कि सनातन धर्म की गहराई को भी उजागर करता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











