Latest Updates
-
DHT: क्या है डायरेक्ट हेयर ट्रांसप्लांटेशन? जानें बालों की रिग्रोथ के लिए कितनी कारगर है यह तकनीक -
Captain Smit Machchhar: कैप्टन 'स्मित मच्छर' के सरनेम का क्या है मतलब? जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी -
नुसरत भरूचा की रीढ़ की हड्डी में हुआ फ्रैक्चर, एयरलिफ्ट कर बाली से लाई गईं मुंबई, वीडियो देख फैंस हुए परेशान -
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय -
Jitiya Vrat Katha: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत में जरूर करें इस कथा का पाठ, पूरे साल सुरक्षित रहेगी संतान -
Jitiya Vrat 2026 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि -
Gandhi Jayanti Wishes 2026: हाथ में लाठी थी...गांधी जयंती पर अपनों को ये खास मैसेज भेजकर दें शुभकामनाएं -
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम
Namaz Time Today 9 Dec: जानें आज फ़ज्र, ज़ुहर, असर, मगरिब और ईशा की नमाज कितने बजे होगी
Namaz Time Today 9 Dec: इस्लाम में नमाज़ को सबसे अहम इबादत माना गया है। यह अल्लाह से जुड़ने का जरिया है और इसे दिन में पाँच बार पढ़ना फर्ज है। नमाज़ व्यक्ति को अनुशासन, आत्मसंयम और मानसिक शांति सिखाती है।
नमाज़ के दौरान अल्लाह की इबादत से मन का अहंकार खत्म होता है और आत्मा शुद्ध होती है। यह इंसान को उसकी सामाजिक और जीवन की जिम्मेदारियों का एहसास कराती है।

सजदा और अन्य क्रियाएं शरीर को लचीला और मन को सुकून देती हैं। कुरआन और हदीस के अनुसार, नमाज़ गुनाहों से बचाने और अल्लाह की रहमत पाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
9 दिसंबर को नमाज का समय
9 दिसंबर 2024 को फ़ज्र की नमाज का समय: 05:22 AM
9 दिसंबर 2024 को ज़ुहर की नमाज का समय: 11:59 AM
9 दिसंबर 2024 को असर की नमाज का समय: 02:55 PM
9 दिसंबर 2024 को मगरिब की नमाज का समय: 05:14 PM
9 दिसंबर 2024 को ईशा की नमाज का समय: 06:37 PM
पांच वक्त की नमाज़ का महत्व
इस्लाम में पाँच वक्त की नमाज़ अल्लाह के प्रति समर्पण और आस्था का मुख्य माध्यम है। यह आत्मा को शुद्ध करती है और मन को सुकून देती है।
फ़ज्र, ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और ईशा की नमाज़ें अल्लाह को याद रखने और उसके आदेशों का पालन करने की प्रेरणा देती हैं। यह अनुशासन और समय की पाबंदी सिखाती है।
नमाज़ गुनाहों से बचने और तनाव कम करने का जरिया है। सामूहिक रूप से नमाज़ पढ़ने से भाईचारा और एकता भी बढ़ती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
