Latest Updates
-
कौन हैं हरीश राणा, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की अनुमति? जानिए 13 साल से कोमा में क्यों थे -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर चाय पी सकते हैं या नहीं? जानें व्रत से जुड़े सभी जरूरी नियम -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना शुभ या अशुभ? बसौड़ा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां -
Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है शीतला अष्टमी? जानिए सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Sheetala Ashtami Vrat Katha: शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, घर में आएगी सुख-समृद्धि -
Sheetala Ashtami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद बना रहे...इन संदेशों के साथ अपनों को दें बसौड़ा की बधाई -
कौन हैं संजू सैमसन की पत्नी चारुलता रमेश? टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद क्रिकेटर ने लिखा भावुक पोस्ट -
रणदीप हुड्डा बने पापा, लिन लैशराम ने बेटी को दिया जन्म, इंस्टाग्राम पर शेयर की क्यूट फोटो -
Kalashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है कालाष्टमी का व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
गर्मियों में वजन घटाने के लिए पिएं ये 5 ड्रिंक्स, कुछ ही दिनों में लटकती तोंद हो जाएगी अंदर
Namaz Time Today 9 Dec: जानें आज फ़ज्र, ज़ुहर, असर, मगरिब और ईशा की नमाज कितने बजे होगी
Namaz Time Today 9 Dec: इस्लाम में नमाज़ को सबसे अहम इबादत माना गया है। यह अल्लाह से जुड़ने का जरिया है और इसे दिन में पाँच बार पढ़ना फर्ज है। नमाज़ व्यक्ति को अनुशासन, आत्मसंयम और मानसिक शांति सिखाती है।
नमाज़ के दौरान अल्लाह की इबादत से मन का अहंकार खत्म होता है और आत्मा शुद्ध होती है। यह इंसान को उसकी सामाजिक और जीवन की जिम्मेदारियों का एहसास कराती है।

सजदा और अन्य क्रियाएं शरीर को लचीला और मन को सुकून देती हैं। कुरआन और हदीस के अनुसार, नमाज़ गुनाहों से बचाने और अल्लाह की रहमत पाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
9 दिसंबर को नमाज का समय
9 दिसंबर 2024 को फ़ज्र की नमाज का समय: 05:22 AM
9 दिसंबर 2024 को ज़ुहर की नमाज का समय: 11:59 AM
9 दिसंबर 2024 को असर की नमाज का समय: 02:55 PM
9 दिसंबर 2024 को मगरिब की नमाज का समय: 05:14 PM
9 दिसंबर 2024 को ईशा की नमाज का समय: 06:37 PM
पांच वक्त की नमाज़ का महत्व
इस्लाम में पाँच वक्त की नमाज़ अल्लाह के प्रति समर्पण और आस्था का मुख्य माध्यम है। यह आत्मा को शुद्ध करती है और मन को सुकून देती है।
फ़ज्र, ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और ईशा की नमाज़ें अल्लाह को याद रखने और उसके आदेशों का पालन करने की प्रेरणा देती हैं। यह अनुशासन और समय की पाबंदी सिखाती है।
नमाज़ गुनाहों से बचने और तनाव कम करने का जरिया है। सामूहिक रूप से नमाज़ पढ़ने से भाईचारा और एकता भी बढ़ती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











