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Tulsi Vivah कराने की सरल और संपूर्ण विधि, जानें किससे हुआ था तुलसी माता का विवाह
Tulsi Vivah Kaise Kare: तुलसी विवाह एक प्रमुख हिंदू पर्व है, जो विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष 12 नवंबर को तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक माह की शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है और इसे तुलसी (वृंदा) और भगवान श्री विष्णु (शालिग्राम) के विवाह के रूप में पूजा जाता है।
इस दिन घरों में तुलसी के पौधे की विशेष पूजा की जाती है, उसे सजाया जाता है और फिर भगवान विष्णु के साथ उसका विवाह किया जाता है। तुलसी का पौधा धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है, और उसकी पूजा से घर में समृद्धि और सुख-शांति का आगमन होता है।

यह पर्व पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी फैलाता है, क्योंकि तुलसी का पौधा पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और तुलसी की पूजा करके समाज में प्रेम, एकता और शांति का संदेश फैलाने का प्रयास करते हैं। जानते हैं तुलसी जी ने किसके साथ विवाह किया था और इस पर्व के अवसर पर किस तरह से तुलसी विवाह को संपन्न किया जाता है -
तुलसी जी का विवाह किसके साथ हुआ था? (Tulsi Ji Ka Vivah Kis Se Hua Tha?)
कहा जाता है कि तुलसी पहले राक्षसों के परिवार में उत्पन्न हुईं और उनका नाम वृंदा था। वे भगवान विष्णु की अडिग भक्त थीं। वृंदा का विवाह दानव राजा जलंधर से हुआ था। जब जलंधर देवताओं से युद्ध कर रहा था, तो वृंदा अपने पति की जीत के लिए पूजा में बैठी थीं और अनुष्ठान कर रही थीं। उनके व्रत के प्रभाव से जलंधर हमेशा विजय प्राप्त करता था। इस पर सभी देवता भगवान विष्णु से मदद की प्रार्थना करने पहुंचे।
भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण किया और वृंदा के महल में गए। वृंदा ने उन्हें अपने पति के रूप में देखा और तुरंत पूजा से उठ गईं। जैसे ही उनका संकल्प टूट, देवताओं ने जलंधर को मार डाला। इस पर वृंदा ने क्रोधित होकर भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि वे पत्थर के हो जाएं। देवताओं में हाहाकार मच गया, लेकिन बाद में प्रार्थना करने पर वृंदा ने अपना श्राप वापस ले लिया और सती हो गईं। इसके बाद उनकी राख से एक पौधा उगा, जिसे तुलसी नाम दिया गया, और भगवान विष्णु ने कहा कि मेरा शालिग्राम रूप सदैव इस पत्थर में रहेगा जो तुलसी जी के साथ रहेगा। तभी से तुलसी और शालिग्राम का वैवाहिक बंधन पूजा जाने लगा।
कैसे करें तुलसी विवाह संपन्न (Tulsi Vivah Kaise Kare?)
तुलसी विवाह के आयोजन के लिए सबसे पहले पूजन स्थल को अच्छे से साफ करके फूलों से सजाएं। तुलसी के गमले के चारों ओर गन्ने का मंडप बनाना न भूलें। तुलसी माता का सोलह श्रृंगार करें और उन्हें चुनरी अर्पित करें।
तुलसी विवाह के लिए पहले एक चौकी बिछाकर उस पर तुलसी का पौधा और शालिग्राम स्थापित करें। इसके बाद पास में एक कलश में पानी भरकर रखें। फिर तुलसी और शालिग्राम पर गंगाजल छिड़कें और घी का दीपक जलाएं। अब दोनों को रोली और चंदन से तिलक करें। इसके बाद शालिग्राम को हाथ में लेकर तुलसी की सात परिक्रमा करें। अंत में, तुलसी को शालिग्राम की बाईं ओर रखकर उनकी आरती करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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