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हिंदू धर्म में यूं तो सभी एकादशी तिथि की विशेष महत्ता बताई गयी है लेकिन इन सभी में विशेष है देवशयनी एकादशी। इस दिन के साथ कई तरह की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
ऐसी आस्था है कि भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी के मौके पर क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीने तक इसी अवस्था में रहते हैं। इस चार महीने की अवधि को चातुर्मास कहा जाता है।

चातुर्मास के दौरान किसी भी तरह के मांगलिक कार्य को करने की मनाही होती है। धार्मिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से जातक के कष्ट दूर होते हैं। जीवन में सुख और सौभाग्य की बढ़ोतरी होती है। इस देवशयनी एकादशी पर आप भी भगवान विष्णु की कृपा पाना चाहते हैं तो राशि के अनुसार इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप करें।
देवशयनी एकादशी पर राशि के अनुसार मंत्र
| 1. मेष राशि: | 'ऊँ गोविंदाय नमः' |
| 2. वृषभ राशि: | 'ऊं पद्मानाभय नमः' |
| 3. मिथुन राशि: | 'ऊँ माधवाय नमः' |
| 4. कर्क राशि: | 'ऊँ केशवाय नमः' |
| 5. सिंह राशि: | 'ऊं हृषिकेषाय नमः' |
| 6. कन्या राशि: | 'ऊँ श्रीधराय नमः' |
| 7. तुला राशि: | 'ऊँ मधुसूदनाय नमः' |
| 8. वृश्चिक राशि: | 'ऊँ केशवाय नमः' |
| 9. धनु राशि: | 'ऊँ माधवाय नमः' |
| 10. मकर राशि: | "ऊँ त्रिविकरमाय नमः" |
| 11. कुंभ राशि: | 'ऊँ श्रीधराय नमः' |
| 12. मीन राशि: | 'ऊँ माधवाय नमः' |
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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