ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फि‍ल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य

Van Devi Temple: बिहार के बिहटा में स्थित वन देवी मंदिर स्थानीय लोगों के बीच आस्था और रहस्य से जुड़ी कई कहानियों के लिए जाना जाता है। इस मंदिर को लेकर क्षेत्र में पीढ़ियों से कई लोक मान्यताएं चली आ रही हैं। मंदिर की सबसे खास बात यह बताई जाती है कि यहां पूजा-पाठ की परंपरा दूसरे मंदिरों से अलग है और सूर्यास्त के बाद परिसर में जाने की अनुमति नहीं है। वन देवी से जुड़ी इन मान्यताओं और लोककथाओं ने लोगों की दिलचस्पी और बढ़ा दी है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म 'द वीवान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' को इसी मंदिर और इससे जुड़ी कहानी से प्रेरित बताया जा रहा है। आइए, जानते हैं वन देवी मंदिर की मान्यता क्या है और सूर्यास्त के बाद मंदिर में प्रवेश क्यों नहीं किया जाता -

Van Devi Temple

मां विंध्यवासिनी से जुड़ी है वन देवी की मान्यता

पटना से करीब 35 किलोमीटर दूर अमहारा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों के आसपास वन देवी का मंदिर स्थित है। वन देवी मंदिर से जुड़ी लोककथा का संबंध उत्तर प्रदेश के विंध्याचल की मां विंध्यवासिनी से बताया जाता है। मान्यता है कि राघोपुर गांव के रहने वाले विद्यानंद मिश्रा देवी के बड़े भक्त थे और नियमित रूप से विंध्याचल जाकर उनकी पूजा किया करते थे। उम्र बढ़ने के साथ उनके लिए बार-बार विंध्याचल जाना मुश्किल होने लगा। कहा जाता है कि एक दिन मां विंध्यवासिनी ने उन्हें सपने में दर्शन दिए। देवी ने उनसे कहा कि उनके पवित्र पिंड का एक हिस्सा अपने निवास स्थान पर ले जाकर स्थापित करें। लोककथा के अनुसार, विद्यानंद मिश्रा देवी के आदेश के बाद पवित्र पिंड को अपने गांव के पास स्थित जंगल में ले आए। उस समय वहां कोई बड़ा मंदिर नहीं था। पिंड को एक छोटी-सी झोपड़ी में स्थापित कर पूजा की जाने लगी। जंगल के बीच स्थापित होने के कारण देवी को आगे चलकर 'वन देवी' यानी जंगल की देवी के नाम से जाना जाने लगा।

मंदिर में नहीं है किसी देवी-देवता की मूर्ति

समय के साथ वन देवी के स्थान का स्वरूप भी बदलता गया। बताया जाता है कि करीब 1958 में संत भगवान दास त्यागी यज्ञ के लिए अमहारा पहुंचे थे। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर के विकास और पवित्र पिंड के आसपास बनी साधारण संरचना को धार्मिक स्थल का स्वरूप देने में उनकी अहम भूमिका रही। इसके बाद 12 फरवरी 1997 को स्थानीय श्रद्धालुओं ने मंदिर के आगे के निर्माण और विकास से जुड़े कामों में योगदान दिया। इस मंदिर की सबसे अलग बात यह है कि यहां किसी देवी-देवता की प्रतिमा स्थापित नहीं है। यहां मुख्य रूप से पिंड की पूजा की जाती है। यही परंपरा इस जगह को दूसरे मंदिरों से अलग पहचान देती है।

सूर्यास्त के बाद मंदिर में जाना वर्जित

वन देवी मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में से एक सूर्यास्त के बाद मंदिर में प्रवेश पर रोक है। शाम होते ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पुजारी भी परिसर से बाहर चले जाते हैं। इसके बाद किसी को भी मंदिर या आसपास के जंगल में रुकने की अनुमति नहीं दी जाती। स्थानीय लोककथाओं में कहा जाता है कि रात के समय मां वन देवी जंगल में विचरण करती हैं। हालांकि, रात में किसी अलौकिक घटना या शक्ति के प्रकट होने का कोई प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद सूर्यास्त के बाद मंदिर बंद करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और यही बात इस मंदिर को रहस्य से जोड़ती है।

अभी चर्चा में क्यों है बिहटा का वन देवी मंदिर?

बिहटा का वन देवी मंदिर इन दिनों फिल्म 'द वीवान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' को लेकर चर्चा में है। फिल्म 25 स‍ितंबर को रिलीज होगी। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसकी कहानी में मंदिर से जुड़ी लोककथाओं और रहस्यमयी मान्यताओं को अहम जगह दी गई है। फिल्म के टीजर में घने जंगल के बीच स्थित रहस्यमयी मंदिर की झलक दिखाई गई है।

Story first published: Thursday, September 10, 2026, 16:00 [IST]
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