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Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि व्रत के बाद कैसे करते हैं कलश और खेत्री विसर्जन? जानें सही विधि
Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि 2025 का समापन नवरात्रि व्रत, हवन और कन्या पूजन के साथ होता है। नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश स्थापना होती है और जौ बोई जाती है जिसे खेत्री कहा जाता है। लोगों का सवाल होता है कि व्रत के पूरे होने के बाद कलश और खेत्री (जौ की खेती) का विसर्जन करना चाहिए या नहीं? इसका सही तरीका क्या है? बता दें कि नवरात्रि व्रत के बाद कलश और खेत्री का विसर्जन करना बहुत जरूरी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश में मां दुर्गा का वास होता है और खेत्री मां अन्नपूर्णा और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यही वजह है कि पूजा संपन्न होने के बाद इनका विसर्जन करना न केवल परंपरा है बल्कि देवी के आशीर्वाद को प्राप्त करने का भी माध्यम है।
शास्त्रों में कहा गया है कि यदि कलश और खेत्री का सही विधि से विसर्जन न किया जाए तो पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं नवरात्रि व्रत के बाद कलश और खेत्री विसर्जन की सही विधि और इसका महत्व।

क्या कलश का विसर्जन करना चाहिए?
नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश स्थापना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि कलश में माता रानी का वास होता है। पूरे नौ दिन उसकी पूजा की जाती है। व्रत पूर्ण होने पर उस कलश का क्या करें ये सवाल हर किसी का होता है। एस्ट्रोलोजर वाई राखी ने बताया कि जिस तरह से आप कलश की स्थापना करते हैं उसी तरह श्रद्धा और प्यार के साथ उसे प्रणाम कर उठाना चाहिए। कलश का विसर्जन नहीं करना चाहिए। उसके अंदर जो पैसे और चांदी का सिक्का है उन्हें अपनी तिजोरी में रखना चाहिए। उसमें रखे हुए पीली सरसों और चावल, लौंग, सुपारी आदि को किसी पेड़ के नीचे रखें। उसमें भरे हुए पानी से स्नान करें और घर में छिड़कें।
घर की नकारात्मकता को कैसे करें दूर?
एस्ट्रोलोजर ने बताया कि कलश का विसर्जन नहीं करें बल्कि उसमें हर दिन जल भरकर मंदिर में रखें और अगले दिन उसे पूरे घर में छिड़कना चाहिए। ऐसा करने से जिस घर में नेगेटिव एनर्जी होती है, कलह-क्लेश रहता है वो दूर हो जाता है। जो पानी बचे उसे घर के अंदर लगे किसी पेड़ में डालें।
खेत्री का क्या करें?
वाई राखी ने खेत्री के बारे में भी बताया कि कुछ घरों में नवरात्रि को दौरान जो खेत्री बोई जाती है दशहरे के दिन उसे कान पर रखा जाता है और फिर उसका विसर्जन किया जाता है। लेकिन इस बार ऐसा न करें बल्कि खेत्री में उगी जौ को अपने भाई के घर में दें और जो बची हुई जौ है उसमें से थोड़ी गाय को खिला दें और थोड़ी अपने घर की तिजोरी में रखें। उसकी जो मिट्टी है उसे घर में लगे गमलों में डालें। जो मिट्टी का पात्र है उसमें पानी भरकर रखें ताकि पक्षी पी सकें और आपको पुण्य मिले।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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