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Narad Jayanti: जब नारद मुनि बने एक खूबसूरत स्त्री और जन्म दिए 50 संतान!
इस वर्ष 2023 में नारद जयंती 6 मई को है। यह दिन देवर्षि नारद के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। विष्णु के परम भक्त और परम विद्वान नारद मुनी का चरित्र जितना रोचक है उतनी ही रोचक उनसे जुडी कथाएँ हैं।
हाथों में वीणा लिए नारायण नारायण जपते हुए किसी भी लोक में भ्रमण करना और सूचनाओं का प्रसार करना नारद मुनि की विशेषता है। ऐसी शक्ति इन्हें इसलिए प्राप्त है कि ये ब्रह्मा के मानस पुत्र हैं और विष्णु को सबसे ज्यादा प्रिय हैं

अब जो विष्णु को प्रिय होगा तो विष्णु उनके कल्याण की सोचेंगे ही। भगवान् विष्णु अपने भक्तों की प्रार्थना अनसुनी नहीं करते। नारद जयंती पर पेश है नारद मुनि से जुड़ी एक रोचक कथा जिसमें नारद मुनि स्त्री बन गए और पुत्रों को जन्म दिया।
नारद की स्त्री बनने की कथा
एक बार ऐसा हुआ कि नारद मुनि ने विष्णु से हाथ जोड़कर पूछा की प्रभु ये माया क्या है, ये मुझे समझाइये। भगवान् विष्णु ने कहा कि माया बहुत जटिल चीज है इसे तुम ना जानो तो ही बेहतर होगा। लेकिन नारद मुनि की उत्सुकता इतनी तेज थी कि वो मानने को तैयार ही नहीं थे। हाथ जोड़कर अनुनय विनय करने लगे। नारद के बार बार निवेदन करने पर भक्तवत्सल भगवान् विष्णु मान गए और उन्होंने कहा कि चलो तुमको बताता हूं कि माया क्या है।
फिर विष्णु नारद को लेकर कन्नौज के पास एक सरोवर के निकट पहुंचे और बोले कि हे नारद, इस सरोवर में स्नान करो। स्नान करने से तुमको पता चल जायेगा कि माया क्या है। नारद मुनि एक हठी बालक की भांति मन की मुराद पूरी होने पर प्रसन्न होते हुए सरोवर में उतर गए।
विष्णु की माया का खेल शुरू हुआ और हुआ चमत्कार! जैसे ही नारद मुनी पानी में डुबकी लगाकर बाहर निकले उनका शरीर बदल चुका था। वो एक बेहद खुबसूरत स्त्री के रूप में आ चुके थे। ऐसी स्त्री जिसका हर अंग यौवन और खूबसूरती की पराकाष्ठा लिए था। अब तक नारद की स्मरण शक्ति भी कम हो गयी। जैसे ही माया का खेल शुरू हुआ, विष्णु वहां से अंतर्ध्यान हो गए।
उसी समय वह से तालध्वज नाम का राजा वहां से गुजर रहा था। राजा ने देखा एक बहुत ही कामुक और सुन्दर स्त्री सरोवर के पास खडी है। राजा का मन उस सर्वांगसुंदरी स्त्री बने नारद पर मोहित हो गया। राजा ने गजगामिनी स्वरूपा स्त्री के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। नारद भी मोहित हो चुके थे, सो दोनों ने विवाह कर लिया। 12 वर्षो के पश्चात स्त्री रूपी नारद ने 50 बच्चो को भी जन्म दिया। ये बच्चे कौरवों की तरह उदंड और अभिमानी थे। कालांतर में इनका युद्ध पांडवों से हुआ जिसमे सारे पुत्र मारे गए।
इस बात की ख़बर मिलते ही नारद बहुत दुखी हुए। रो रोकर उनका बुरा हाल हो गया। कई दिनों तक खाना पीना सब छोड़ दिया। फिर एक दिन राजा की सभा में स्वयं विष्णु ब्राह्मण के वेश में आये और ज्ञान दिया कि तुम दोनों पति पत्नी जिस नुकसान को लेकर रो रहे हो वो वास्तव में हुआ ही नहीं। ये सब माया का खेल है। इतना कहकर विष्णु ने अपनी माया समेत ली।
नारद जी तुरंत अपने असली रूप में आ गए। उनको नया ज्ञान मिल चुका था। माया के जाल में फंसे नारद माता और पत्नी का किरदार निभा रहे थे किन्तु सत्य से परिचित होते ही देवर्षि के रूप में वापस आ गए। नारद भगवान् विष्णु के समक्ष हाथ जोड़ कर नतमस्तक हो गए और फिर नारायण नारायण जपते हुए अपने लोक में वापस आ गए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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