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भाग्य का उदय चाहते हैं तो रोजाना करें इन पांच सूर्य मंत्र का जाप, पलट जाएगी किस्मत
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को नवग्रहों के कैबिनेट का राजा कहा जाता है। भगवान सूर्य ही ऐसे देव हैं जिन्हें साक्षात् रूप में देखा जा सकता है। सूर्य देव की उपासना करने से जातक को कई तरह के लाभ की प्राप्ति होती है। रोजाना सूर्य देव को जल चढ़ाने से समाज में मान-सम्मान में इजाफा होता है। प्रतिदिन सूर्य मंत्र के जाप से निरोगी रहने का वरदान मिलता है। जीवन में आने वाली अशुभता टल जाती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। जानते हैं सूर्य देव के उन पांच मंत्रों के बारे में जो व्यक्ति को सुख-समृद्धि और निरोगी काया देते हैं।
सूर्य मंत्र के जाप से मिलने वाले लाभ
सूर्य देव की निरंतर पूजा करने से कोई भी नया रोग शरीर को नहीं पकड़ता है। पिता के साथ रिश्ते मधुर होते हैं और उनका प्रेम बना रहता है। मानसिक शांति के साथ साथ ज्ञान की वृद्धि होती है। मनुष्य में बल और धैर्य दोनों बढ़ता है। शरीर का तेज और कान्ति बनी रहती है। सूर्य देव के आशीर्वाद से आर्थिक उन्नति भी होती है। जीवन से जुड़ी तमाम चिंताओं से मुक्ति मिलती है।

ॐ सूर्याय नमः
इस मंत्र का अर्थ है क्रियाओं के प्रेरक को प्रणाम।
सूर्य देव को भगवान के रूप में काफी सक्रिय माना जाता है। वैदिक ग्रंथों में, सूर्य देव को सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर आकाश की यात्रा करने की कल्पना की गयी है। ये साथ घोड़े सर्वोच्च चेतना से निकलने वाली सात किरणों के प्रतीक बताये गए हैं।

ॐ घृणि सूर्याय नमः
यह छोटा सा मंत्र बहुत शक्तिशाली माना गया है। सूर्य देव की आराधना करने और मनवांछित फल पाने के लिए ये मंत्र बहुत फलदायी है। इस मंत्र का जाप कभी भी किया जा सकता है। इसे सूर्य नाम मंत्र कहते हैं।

ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय
धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयत।
यह सूर्य गायत्री मंत्र है जो भगवान सूर्य का आशीर्वाद पाने के लिए किया जाता है। इस मंत्र का जाप प्रातः काल में ही करें। कुंडली में सूर्य की स्थिति अच्छी रहने से समाज में मान और प्रतिष्ठा मिलती है।
इस मंत्र का अर्थ है - ओम! हे सूर्य देव, मैं आपकी पूजा करता हूं, आप मुझे ज्ञान के प्रकाश से रोशन करते हैं, हे! दिन के निर्माता, मुझे ज्ञान दो और हे सूर्य देव! तुम मेरे दिमाग को हल्का करो।

एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घय दिवाकर।।
इस सूर्य मंत्र के जाप से व्यक्ति को ज्ञान, सुख, स्वास्थ्य, पद, सफलता, प्रसिद्धि का आशीर्वाद मिलता है। सूर्यदेव की कृपा से सभी आकांक्षाओं की पूर्ति होती है।

उदसौ सूर्यो अगादुदिदं मामकं वच:।
यथाहं शत्रुहोऽसान्यसपत्न: सपत्नहा।।
सपत्नक्षयणो वृषाभिराष्ट्रो विष सहि:।
यथाहभेषां वीराणां विराजानि जनस्यच।।
इस मंत्र का अर्थ है - यह सूर्य ऊपर चला गया है, मेरा यह मंत्र भी ऊपर गया है, ताकि मैं शत्रु को मारने वाला बन जाऊं। प्रतिद्वन्द्वी को नष्ट करने वाला, प्रजाओं की इच्छा को पूरा करने वाला, राष्ट्र को सामर्थ्य से प्राप्त करने वाला तथा जीतने वाला बन जाऊं, ताकि मैं शत्रु पक्ष के वीरों का तथा अपने एवं पराए लोगों का शासक बन सकूं।
जो जातक सूर्य देव के इस मंत्र का जाप करता है, वह अपने शत्रुओं पर हावी रहता है। समाज में उसकी स्थिति मजबूत बनती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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