Latest Updates
-
Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा की रात शारीरिक संबंध बना सकते हैं या नहीं? जानें क्या है नियम -
शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में क्यों रखी जाती है खीर? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण -
Karwa Chauth 2026: करवा चौथ से पहले चेहरे पर चाहिए नेचुरल ग्लो? ट्राई करें शहनाज हुसैन के ये 5 होममेड फेस पैक -
Sharad Purnima 2026: 25 या 26 अक्टूबर, कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय -
Shamonda Virus: शमोंडा वायरस क्या है और कैसे फैलता है? फ्रांस में पहली बार इंसान संक्रमित, जांच शुरू -
बार-बार सिरदर्द होना हो सकता है इन 6 गंभीर बीमारियों का संकेत, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी -
सौंफ और धनिया का पानी पीने से सेहत को मिलते हैं कई फायदे, जानें सेवन का सही तरीका -
नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं ये 5 योगासन, नियमित अभ्यास से हार्ट डिजीज का खतरा होगा कम -
चेहरे पर नारियल तेल में मिलाकर लगाएं कॉफी पाउडर, स्किन की इन 5 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा -
Myth Vs Fact: टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही 10 मिथ और उनकी सच्चाई
Sarva Pitru Amavasya 2023 Upay: कब है सर्व पितृ अमावस्या? इन उपायों के साथ पितरों को खुशी से करें विदा
Sarva Pitru Amavasya Ke Din Kya Kare: हिन्दू धर्म में चंद्रमा का बहुत महत्व होता है और इससे जुड़ी अमावस्या और पूर्णिमा की गतिविधियां धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं।
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाती है। यह पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है और इस तिथि को सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों को पिंडदान किया जाता है।

इस वर्ष 14 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या मनाई जायेगी। इस दिन सभी पितृ आपके द्वार पर उपस्थित होते हैं, और यदि अनजाने में आप किसी पूर्वज का श्राद्ध भूल गए हों तो सर्व पितृ अमावस्या के दिन सभी पितरों का श्राद्ध करके पिंडदान किया जा सकता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय किये जा सकते हैं जिससे सभी पितृदोषों से मुक्ति मिल सकती है -
तर्पण और पिंडदान
सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाना चाहिए। सामान्य विधि के अनुसार चावल, गाय का दूध, घी, गुड़ और शहद मिलाकर छोटे छोटे पिंड बनाये जाते हैं और उन्हें पितरों को अर्पित किया जाता है। इन पिंडों के दान के साथ साथ जल में काला तिल, जौ, कुशा, और सफ़ेद फूल डालकर रखा जाता है।

पक्षियों को दाना खिलाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष की अवधि में पूर्वजों की आत्माएं अलग अलग रूपों में धरती लोक पर आती है। ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या के दिन पक्षियों के लिए दाना डालें। विशेषकर कौओं को खाना खिलाएं।
गीता या गरुड़ पुराण का पाठ
गरुड़ पुराण का पाठ व्यक्ति की मृत्यु से पहले या तुरंत बाद कराया जाता है। इसलिए सर्व पितृ अमावस्या के दिन गरुड़ पुराण का पाठ पितरों की आत्मा को शान्ति प्रदान करता है। इसके अलावा भगवद्गीता का भी पाठ इस दिन किया जा सकता है।
दान का पुण्य
पितृ पक्ष की अवधि में दान को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। किसी ज़रूरतमंद को दान देने से न केवल उसकी दुआएं लगती हैं बल्कि पितरों का भी विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए पितृ पक्ष के आखिरी दिन, सर्वपितृ अमावस्या के दिन अपनी क्षमतानुसार दान करना ना भूलें।

पंचबलि कर्म
मान्यता है कि पितृपक्ष में पंचबलि कर्म का भाग पितरों को सीधा प्राप्त होता है। पंचबली में गो बलि, श्वान बलि, काक बलि, पिपलादि बलि और देवबलि का विधान है। श्राद्ध के दिन या सर्वपितृ अमावस्या के दिन पंचबलि कर्म करना श्रेयस्कर माना जाता है। गौ बलि में गाय के लिए खाना निकालकर गौ माता को खिलाएं, श्वान बलि के अंतर्गत कुत्ते को खाने को दें, काक यानी कौवे को, पिपलिका के अंतर्गत चींटियों को और अंत में देवताओं के लिए घर के बाहर दक्षिण दिशा में पत्तों पर भोजन रखें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



Click it and Unblock the Notifications
