Sawan Putrada Ekadashi: सावन पुत्रदा एकादशी पर बन रहे 3 शुभ योग, जानें शुभ मुहूर्त -पूजा विधि

Sawan Putrada Ekadashi2025: श्रावण मास का पावन महीना शिवभक्ति, व्रत और पुण्य कमाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी माह में आने वाली सावन पुत्रदा एकादशी को विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना से किया जाता है। यह व्रत विष्णु भगवान को समर्पित होता है और ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा से उपवास और पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

माना जाता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन सच्चे मन से और विधि-विधान से व्रत रखने से और पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है। इस बार पुत्रदा एकादशी पर तीन शुभ योग भी बन रहे हैं। आइए जानते हैं सावन पुत्रदा एकादशी की सही तारीख, शुभ योग, व्रत विधि और इसका धार्मिक महत्व।

सावन पुत्रदा एकादशी 2025 तिथि व मुहूर्त:

पुत्रदा एकादशी को लेकर भक्तों के मन में शंका है कि इस साल पुत्रदा एकादशी कब है। पंचांग के मुताबिक, इस साल सावन में पुत्रदा एकादशी तिथि 4 अगस्त दिन रविवार को सुबह 11 बजकर 41 मिनट से शुरू होगी जो 5 अगस्त दिन सोमवार को दोपबर 1 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत उसी दिन रखा जाता है जब सूर्योदय के समय एकादशी तिथि हो। ऐसे में इस साल पुत्रदा एकादशी का व्रत 5 अगस्त 2025 को रखा जाएगा।

Sawan Putrada Ekadashi

पुत्रदा एकादशी पर बन रहा शुभ योग

पुत्रदा एकादशी के दिन इस साल शुभ योग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, एकादशी वाले दिन यानी 5 अगस्त को रवि योग बन रहा है। रवि योग 5 अगस्त को 5 बजकर 45 पर शुरू होगा और 11 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, रवि योग पर व्रत रखने से सारे रोग और कष्ट दूर होते हैं और दोष मिट जाते हैं क्योंकि इस योग में सूर्य का प्रभाव ज्यादा होता है। इसके अलावा इंद्र और वैधृति योग भी बन रहे हैं जो इस दिन को और भी खास बनाते हैं।

पुत्रदा एकदशी पूजा विधि (Puja Vidhi)

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को पीले वस्त्र पहनाकर स्थापित करें।
चंदन, पीले फूल, धूप, दीप और तुलसीदल से पूजा करें।
व्रत कथा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
रात को जागरण और भजन-कीर्तन करना पुण्यकारी माना गया है।

सावन पुत्रदा एकादशी का महत्व (Significance)

यह व्रत संतान सुख की प्राप्ति और उसकी दीर्घायु के लिए किया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से विष्णु भगवान विशेष कृपा करते हैं।
पापों से मुक्ति, पुण्य फल और परिवार में सुख-शांति का व्रत माने जाने वाला दिन है।
जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी होता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।

Story first published: Sunday, July 27, 2025, 18:45 [IST]
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