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Navratri 2025: कन्या पूजन में किस उम्र की बच्चियों को मानते हैं देवी का स्वरूप? अष्टमी-नवमी से पहले जानें
Shardiya Navratri 2025 Kanya Pujan: 22 सितंबर 2025, से शारदीय नवरात्रि शुरू हुए हैं और 2 अक्टूबर को विजय दशमी का त्यौहार मनाया जाएगा। पूरे 9 दिनों में माता के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है और अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। दरसल, नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि कन्याएं स्वयं मां दुर्गा का ही स्वरूप मानी जाती हैं। इसलिए उन्हें भोजन कराना और उनका पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कन्या पूजन में किस उम्र की बच्चियों को भोजन कराना चाहिए? कई लोगों का कहना है कि जब तक लड़की की शादी न हुई हो वो कन्या ही मानी जाती है और उसे कन्या पूजन में बुलाया जा सकता है। लेकिन शास्त्रों में इसके विपरीत बताया गया है।
30 सितंबर 2025 को अष्टमी का कन्या पूजन किया जाएगा और 1 अक्टूबर को नवमी का कन्या पूजन होगा। इससे पहले जान लेते हैं कि किस उम्र की बालिकाओं को कन्या पूजन में भोजन कराना चाहिए और इसकी सही विधि-विधान किया है? साथ ही ये भी जान लेते हैं कि किस उम्र की कन्या को कौन सी देवी का स्वरुप माना जाता है।

किस उम्र की लड़कियों का किया जाता है कन्या पूजन?
आमतौर पर लोग कन्या पूजन के नाम पर 15-16 साल तक की लड़कियों को कन्या पूजन में बुलाते हैं। मगर ऐसा सही नहीं है, शास्त्रों में कहा गया है कि कन्या पूजन के लिए बालिकाओं की सही उम्र 2 साल से 10 साल तक उचित है। कन्या पूजन करने से मां का आशीर्वाद मिलता है और घर में खुशियां आती हैं। दुख, कलेश, रोग, दोष दूर होते हैं।
उम्र के अनुसार देवी के रूप
2 वर्ष की कन्या को कुमारी स्वरूप
3 वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति स्वरूप
4 वर्ष की कन्या को कुमारिका स्वरूप
5 वर्ष की कन्या को रूपसुंदरी स्वरूप
6 वर्ष की कन्या को काली स्वरूप
7 वर्ष की कन्या को चंडिका स्वरूप
8 वर्ष की कन्या को शांभवी स्वरूप
9 वर्ष की कन्या को दुर्गा स्वरूप
10 वर्ष की कन्या को सुबद्रा का स्वरूप माना जाता है।
इसीलिए कन्या पूजन के समय इसी उम्र की बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन, आरती और भोजन कराया जाता है।
कैसे करें कन्याओं का स्वागत
सबसे पहले कन्याओं को आमंत्रित करें और उनके चरण हल्दी के पानी से धोएं और उन्हें आसन पर बिठाएं।
अब उन्हें तिलक करें और कलावा बाधें। इस बात का ध्यान रखें कि कन्याओं के उल्टे हाथ पर कलावा बांधें।
अब कन्याओं के पैर छुएं और उन्हें आपने जो प्रसाद के रूप में हलवा-पूरी और चना को भोग बनाया है वो उन्हें खिलाएं।
कन्याओं को पेट भरकर भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा दें और उपहार के रूप में चुड़ी, पढ़ाई-लिखाई का सामान दें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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