Latest Updates
-
बारिश के मौसम में नहीं खानी चाहिए ये दालें, वरना बढ़ सकती है पेट में गैस और अपच की परेशानी -
Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
शाम होते-होते फूल जाता है आपका पेट? ये बैली फैट नहीं ब्लोटिंग है, जानें 5 बड़े कारण और सही डाइट -
Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी की रथ यात्रा में जा रहे हैं? इन 7 मशहूर लोकल फूड्स का स्वाद लेना न भूलें -
PM मोदी ने दिखाई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी, जानें स्पीड, रूट और कितना होगा किराया -
Relationship Tips: लाइफ पार्टनर से कभी न बोलें ये 5 बातें, वरना टूट सकता है आपका रिश्ता -
कितने पढ़े-लिखे हैं सोनम वांगचुक और कितनी है उनकी नेट वर्थ? जानें कहां-कहां से होती है कमाई -
Sonam Wangchuk की 20वें दिन भी भूख हड़ताल जारी, बिना खाना खाए कितने दिन जीवित रह सकता है इंसान? -
Jagannath Rath Yatra 2026: कौन हैं भगवान जगन्नाथ की मौसी? जिनसे मिलने के लिए हर साल रथ से निकलते हैं महाप्रभु -
World Emoji Day 2026: क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड इमोजी डे, कैसे पड़ा 'Emoji' नाम? जानिए इसका दिलचस्प इतिहास
जून के पूर्णिमा के चांद को 'स्ट्रॉबेरी मून' क्यों कहा जाता है? जानें इसके पीछे का अनोखा कारण
Why is June Full Moon called Strawberry Moon: हर साल जून महीने की पूर्णिमा का चांद लोगों का खास आकर्षण बनता है, जिसे दुनिया भर में 'स्ट्रॉबेरी मून' (Strawberry Moon) के नाम से जाना जाता है। नाम सुनकर ऐसा लगता है कि चांद गुलाबी या स्ट्रॉबेरी जैसा दिखाई देता होगा, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दरअसल, इस नाम का संबंध चांद के रंग से नहीं बल्कि सदियों पुरानी परंपरा, मौसम और स्ट्रॉबेरी की फसल से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं कि जून की पूर्णिमा को स्ट्रॉबेरी मून क्यों कहा जाता है और इसके पीछे का इतिहास, वैज्ञानिक कारण तथा सांस्कृतिक महत्व क्या है।

स्ट्रॉबेरी मून क्या होता है?
स्ट्रॉबेरी मून जून महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा (Full Moon) को कहा जाता है। यह एक खगोलीय घटना है, जिसमें पृथ्वी से चंद्रमा पूरी तरह प्रकाशित दिखाई देता है। यह नाम विशेष रूप से उत्तरी अमेरिका की प्राचीन जनजातियों द्वारा दिया गया था, जिन्होंने मौसम और कृषि के आधार पर हर पूर्णिमा को अलग-अलग नाम दिए थे।
जून की पूर्णिमा को 'स्ट्रॉबेरी मून' क्यों कहा जाता है?
'स्ट्रॉबेरी मून' नाम का संबंध चंद्रमा के रंग से नहीं बल्कि स्ट्रॉबेरी की फसल से है। उत्तरी अमेरिका की एल्गोंक्विन (Algonquin) और अन्य मूल अमेरिकी जनजातियां जून के महीने में जंगली स्ट्रॉबेरी की कटाई शुरू करती थीं। इसलिए उन्होंने इस पूर्णिमा का नाम "Strawberry Moon" रखा। यह नाम समय के साथ दुनिया भर में लोकप्रिय हो गया और आज भी जून की पूर्णिमा को इसी नाम से जाना जाता है।

क्या स्ट्रॉबेरी मून सच में गुलाबी या लाल दिखाई देता है?
अक्सर लोग मानते हैं कि स्ट्रॉबेरी मून गुलाबी रंग का होता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। सामान्य परिस्थितियों में इसका रंग अन्य पूर्णिमा की तरह सफेद या हल्का सुनहरा दिखाई देता है। हालांकि जब चंद्रमा क्षितिज के पास होता है, तब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering) के कारण यह हल्का नारंगी, सुनहरा या लालिमा लिए हुए दिखाई दे सकता है।
स्ट्रॉबेरी मून का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
दुनिया की कई संस्कृतियों में जून की पूर्णिमा को नई शुरुआत, समृद्धि और प्रकृति के उत्सव का प्रतीक माना जाता है। कई देशों में इस समय कृषि कार्यों, फसल कटाई और पारंपरिक उत्सवों का आयोजन किया जाता है। भारत में भी पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है और इस दिन लोग स्नान, दान, पूजा-पाठ और व्रत जैसे धार्मिक कार्य करते हैं।
क्या स्ट्रॉबेरी मून हर साल एक जैसा दिखाई देता है?
नहीं। हर साल स्ट्रॉबेरी मून का आकार, चमक और आकाश में उसकी स्थिति थोड़ी अलग हो सकती है। यह चंद्रमा की कक्षा, पृथ्वी की स्थिति और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कुछ वर्षों में यह सामान्य से अधिक बड़ा या अधिक चमकीला भी दिखाई दे सकता है।
स्ट्रॉबेरी मून को देखने का सबसे अच्छा समय
स्ट्रॉबेरी मून का सबसे खूबसूरत दृश्य सूर्यास्त के तुरंत बाद या चंद्रमा के उदय (Moonrise) के समय दिखाई देता है। खुले मैदान, पहाड़ी क्षेत्रों या कम प्रकाश प्रदूषण वाली जगहों से इसे आसानी से देखा जा सकता है। साफ मौसम होने पर इसका नजारा और भी शानदार होता है।
क्या स्ट्रॉबेरी मून का कोई वैज्ञानिक प्रभाव भी होता है?
वैज्ञानिक दृष्टि से स्ट्रॉबेरी मून केवल जून महीने की सामान्य पूर्णिमा है। इसका मानव स्वास्थ्य या पृथ्वी पर किसी विशेष प्रकार का प्रभाव साबित नहीं हुआ है। हालांकि पूर्णिमा के दौरान समुद्र में ज्वार-भाटा (High Tide) अपेक्षाकृत अधिक होता है, क्योंकि उस समय सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में होते हैं, जिससे गुरुत्वाकर्षण प्रभाव बढ़ जाता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



Click it and Unblock the Notifications