Latest Updates
-
कौन थे पद्मश्री डी.वाई. पाटिल? बिहार के पूर्व राज्यपाल और प्रसिद्ध शिक्षाविद का 90 वर्ष की उम्र में निधन -
डायबिटीज होने से पहले शरीर में दिखने लगते हैं Pre-diabetes के ये लक्षण, अधिकतर लोग करते हैं इग्नोर -
Viral Video: ऑटो में बैठी महिला के सामने अश्लील वीडियो देखता रहा Rapido ड्राइवर, वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल -
डेंगू और वायरल फीवर में क्या है अंतर? डॉक्टर से जानें कैसे करें पहचान और बचाव के उपाय -
Sawan Mehendi Designs 2026: सावन में हाथों पर खूब जचेंगे ये 7 लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन, हर कोई करेगा तारीफ -
Mangla Gauri Vrat 2026: आज है सावन का पहला मंगला गौरी व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व -
बारिश के मौसम में सर्दी-खांसी और गले की खराश से हैं परेशान तो आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी तुरंत राहत -
Sawan 2026 Shivling Puja Vidhi: शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए? जानिए सावन में जलाभिषेक का सही तरीका -
Radhika Ambani Look: लंदन में Dior की सिंपल सी ड्रेस पहन छाईं राधिका अंबानी, लेकिन कीमत सुन उड़ जाएंगे आपके होश -
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत के जरूरी नियम
Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरूर नियम
Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है, जो हर वर्ष सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। हर सुहागिन महिला को इस त्योहार का बेसब्री से रहता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करती हैं। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम तथा अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं. वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए माता पार्वती की पूजा करती हैं। वर्ष 2026 में तृतीया तिथि दो दिनों तक रहने के कारण कई लोगों के मन में यह सवाल है कि हरियाली तीज 14 अगस्त को मनाई जाएगी या 15 अगस्त को। ऐसे में, आइए जानते हैं हरियाली तीज की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा से जुड़े जरूरी नियम -

हरियाली तीज 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त को शाम 6 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026, शनिवार को रखा जाएगा।
हरियाली तीज 2026 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 बजे से 5:35 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से 1:08 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:51 बजे से 3:42 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:06 बजे से 7:29 बजे तक
अमृत काल: रात 8:18 बजे से 9:53 बजे तक
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
हरियाली तीज उत्तर भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में इसे विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से शिव-पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे वैवाहिक जीवन में प्रेम और खुशहाली बनी रहती है। साथ ही, पति की आयु में वृद्धि और अविवाहित महिलाओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। इस खास अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं, झूला झूलती हैं और सावन के मधुर गीत गाकर उत्सव का आनंद लेती हैं। इस दिन विवाहित महिलाओं के मायके से सिंदारा भेजने की परंपरा है, जिसमें कपड़े, श्रृंगार का सामान, मिठाइयां, घेवर, फल और अन्य उपहार शामिल होते हैं। यह परंपरा बेटी के प्रति स्नेह, सम्मान और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत और पूजा से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है तथा दांपत्य जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि बनी रहती है।
हरियाली तीज व्रत के नियम
इस दिन हरे, लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं.
पूजा में श्रृंगार का सामान, सुहाग की वस्तुएं और माता पार्वती को प्रिय सामग्री अर्पित करनी चाहिए।
व्रत का पारण निर्धारित समय और पूजा पूरी होने के बाद ही करें।
पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान कर मंत्रों का जाप करें।
पूरे दिन क्रोध, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
रात में भजन-कीर्तन या शिव-पार्वती की कथा सुनना और स्मरण करना शुभ माना जाता है।
हरियाली तीज पूजा विधि
हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र पहनें। इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा की तैयारी करें।
पूजा स्थान को साफ करके एक चौकी पर लाल या हरा कपड़ा बिछाएं।
चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें, फिर शिव-पार्वती का गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें।
माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चुनरी और श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, चंदन और फल अर्पित करें।
इसके बाद धूप और दीप जलाकर विधि-विधान से पूजा करें।
'ॐ नमः शिवाय' तथा 'ॐ पार्वत्यै नमः' मंत्र का जाप करें।
हरियाली तीज व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
अंत में शिव-पार्वती की आरती करें और परिवार के सुख, अखंड सौभाग्य तथा दांपत्य जीवन की खुशहाली की प्रार्थना करें।
यदि निर्जला व्रत रखा है, तो अगले दिन या निर्धारित समय पर विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।



Click it and Unblock the Notifications