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दिवाली 2018: इस दिवाली तुला राशि वालों की चमक उठेगी किस्मत, आप भी करें इस शुभ मुहूर्त पर लक्ष्मी पूजन
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। चूंकि यह पर्व धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है इसलिए लोग कई दिन पहले से ही इस पर्व को मनाने की अपनी तैयारियां शुरू कर देते हैं।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन स्वयं देवी लक्ष्मी सबके घरों में पधारती है। मां लक्ष्मी के साथ साथ दिवाली पर गणेश जी की भी पूजा की जाती है। आपको बता दें इस बार दीपावली 7 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा।

यदि आप इस बार पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर असमंजस में हैं तो हम आपको बताएंगे कि इस वर्ष दिवाली पर मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा के लिए कौन सा समय सबसे शुभ है ताकि आपको आपकी पूजा का इच्छित फल प्राप्त हो।
साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि इस बार दिवाली पर कौन सा विशेष संयोग बन रहा है। तो आइए जानते हैं कैसे बनेगी आपकी यह दिवाली ख़ास।

मां काली और कुबेर की भी करें पूजा
जानकारों के अनुसार दिवाली पर देवी सरस्वती, देवी काली और धन के देवता कुबेर की भी पूजा करनी चाहिए। इससे आपके घर में धन की कमी कभी नहीं होगी। कहते हैं अमावस्या की रात्रि होने के कारण इस दिन कई जगहों पर तांत्रिक अनुष्ठान किये जाते हैं।
दिवाली पर मां काली की पूजा भी मध्य रात्रि में ही की जाती है।

दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त
लक्ष्मी गणेश पूजन का शुभ समय: शाम 5 बजकर 20 मिनट से रात्रि 8 बजकर 20 मिनट तक।
व्यापारियों के लिए बहीखाता पूजन का शुभ समय: शाम 5 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक।
जानकारों की मानें तो इस बार अमावस्या तिथि रात 9 बजकर 32 मिनट पर ही समाप्त हो रही है इसलिए आप सही समय पर ही पूजन कर लें।

पूजा की सामग्री
1. रोली
2. चावल
3. घी
4. चन्दन
5. मेवे
6. घी
7. बताशे
8. धूप
9. कपूर
10. तेल
11. पान
12. सुपारी
13. लौंग
14. इलायची
15. कलावा
16. नारियल
17. गंगाजल
18. फल
19. पुष्प, पुष्पों की माला
20. दूध, दही, मिठाई
21. लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा या फिर चित्र
22. मिट्टी का बड़ा दीपक
23. दूर्वा

पूजन विधि
सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश और लक्ष्मी जी की नयी प्रतिमा को स्थापित कर लें। फिर गंगाजल जल छिड़कें। चौकी पर एक स्वस्तिक बनाएं। गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित करें। उन्हें फूलों की माला पहनाएं टीका लगाएं। अब जल से भरा एक कलश रखें। कलश पर भी स्वस्तिक बनाएं। फिर कलश को भी टीका लगाएं फूल और अक्षत चढ़ाएं। फिर दूर्वा, खील आदि समाग्री भगवान को अर्पित करें। प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं। धूप जलाएं मिट्टी के बड़े दिए में शुद्ध देसी घी का दीपक जलाकर रखें। अब आप लक्ष्मी स्त्रोत का पाठ करें। अंत में मां लक्ष्मी की आरती करें।
पूजन के समय आप चांदी का सिक्का गणेश और लक्ष्मी जी के पास रखकर उसकी भी पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा इस दिन लक्ष्मी यंत्र की पूजा करना भी बेहद शुभ माना जाता है।
पूजा समाप्त होने के बाद आप सभी दीयों को एक जगह रख कर पहले उनकी पूजा करें फिर उसमें तेल डालकर उन्हें जलाएं।

तुला राशि वालों के लिए शुभ संयोग
इस दिवाली तुला राशि वालों के लिए एक विशेष संयोग बन रहा है। चूंकि दिवाली पर चंद्रमा तुला राशि में ही रहेंगे जहां पहले से ही इस राशि के स्वामी शुक्र देव मौजूद हैं और उनके साथ सूर्यदेव भी इसी राशि में उपस्थित हैं इसलिए इन तीनों का एक साथ होना इस राशि के जातकों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।



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