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पीलिया के इन लक्षणों को न करें मामूली समझने की भूल, लिवर फेलियर तक की आ सकती है नौबत
Jaundice Symptoms and Remedies in Summer: गर्मी के मौसम पीलिया एक ऐसी बीमारी है जो तेजी से पैर पसार रहा है। इस बीमारी में शरीर पीला पड़ जाता है और इतनी कमजोरी आ जाती है कि उठना मुश्किल हो जाता है। उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्से इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और भीषण हीटवेव (लू) की चपेट में हैं। पारा लगातार 45 डिग्री के पार जा रहा है, जिससे न सिर्फ लोग डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं, बल्कि अस्पतालों में एक बेहद गंभीर बीमारी के मरीजों की संख्या में अचानक बाढ़ आ गई है। वह बीमारी है पीलिया (Jaundice)। डॉक्टरों के मुताबिक, इस चिलचिलाती गर्मी में पीलिया का प्रकोप खतरनाक दर से बढ़ रहा है। अक्सर लोग पीलिया को एक सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन गर्मियों में होने वाला यह संक्रमण सीधे आपके लिवर (Liver) पर हमला करता है। यदि समय रहते इसके लक्षणों को पहचानकर सही कदम न उठाए जाएं, तो यह स्थिति लिवर फेलियर जैसी जानलेवा स्थिति में भी बदल सकती है। आइए जानते हैं कि इस भीषण गर्मी में पीलिया क्यों फैल रहा है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं और आप खुद को तथा अपने परिवार को इससे कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

क्या होता है पीलिया (Jaundice)?
चिकित्सकीय भाषा में पीलिया लिवर में आई खराबी का एक प्रमुख लक्षण है। जब हमारे शरीर के रक्त में बिलीरुबिन (Bilirubin) नामक पीले पिगमेंट (रंग तत्व) की मात्रा सामान्य से अधिक बढ़ जाती है, तो त्वचा, आंखें और नाखून पीले दिखाई देने लगते हैं। सामान्य स्थिति में लिवर इस बिलीरुबिन को फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देता है, लेकिन जब लिवर संक्रमित या कमजोर होता है, तो वह ऐसा नहीं कर पाता और पीलिया का रूप ले लेता है।
भीषण गर्मी में पीलिया बढ़ने के 5 मुख्य कारण
1. दूषित पानी और बर्फ का इस्तेमाल
गर्मियों में पानी की खपत बढ़ जाती है। कई बार स्थानीय स्तर पर या बाहर जूस और मैंगो या बनाना या फिर अन्य शेक्स में इस्तेमाल होने वाली बर्फ दूषित पानी से बनी होती है। यह दूषित पानी हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A) और हेपेटाइटिस ई (Hepatitis E) वायरस का मुख्य जरिया है, जो पीलिया का कारण बनते हैं।
2. बाहर का खुला और बासी भोजन
तेज गर्मी के कारण खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है। रेहड़ी-पटरी या खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों पर मक्खियां बैठती हैं, जो संक्रमण को एक जगह से दूसरी जगह फैलाती हैं। ऐसा भोजन करने से लिवर पर सीधा असर पड़ता है।
3. शरीर में पानी की भारी कमी
हीटवेव के कारण शरीर से पसीने के रूप में पानी तेजी से बाहर निकलता है। यदि पर्याप्त मात्रा में पानी न पिया जाए, तो डिहाइड्रेशन के कारण शरीर के टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थ) बाहर नहीं निकल पाते और लिवर पर दबाव बढ़ जाता है।
4. गन्ने का रस और कटे हुए फल
गर्मियों में गन्ने का रस बेहद लोकप्रिय है, लेकिन यदि गन्ने को साफ जगह पर न रखा गया हो या रस निकालने वाली मशीन गंदी हो, तो यह पीलिया का सबसे बड़ा घर बन जाता है। इसी तरह दुकानों पर घंटों से कटे रखे तरबूज या खरबूजे भी बैक्टीरिया को दावत देते हैं।
समय रहते पहचानें पीलिया के ये शुरुआती लक्षण
आंखों और त्वचा का पीलापन: सबसे पहला और स्पष्ट लक्षण आंखों के सफेद भाग (Sclera) और नाखूनों का पीला होना है।
गहरे पीले रंग का यूरिन: पीलिया से पीड़ित मरीज का पेशाब गहरे पीले या सरसों के तेल जैसे रंग का आने लगता है।
अत्यधिक थकान और कमजोरी: थोड़ा सा काम करने पर भी मरीज का शरीर टूटने लगता है और गंभीर सुस्ती छाई रहती है।
भूख न लगना और उल्टी का मन: भोजन को देखकर जी मिचलाना, उल्टी होना और भूख पूरी तरह से मर जाना।
पेट के दाहिने हिस्से में दर्द: पसलियों के ठीक नीचे जहां लिवर होता है भारीपन या हल्का-हल्का दर्द महसूस होना।
पीलिया के प्रकोप से बचने के अचूक उपाय (Prevention Tips)
उबला या फिल्टर पानी ही पीएं: बाहर जाते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें। स्थानीय स्तर पर बिकने वाले खुले पानी या अनधिकृत बर्फ वाले ड्रिंक्स से पूरी तरह दूरी बनाएं।
ताजा भोजन करें: घर पर बना शुद्ध और ताजा भोजन ही खाएं। फ्रिज में रखे कई दिन पुराने बासी खाने से परहेज करें।
सफाई का रखें विशेष ध्यान: कुछ भी खाने से पहले और टॉयलेट जाने के बाद हाथों को साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं।
डाइट में शामिल करें ये चीजें: अपने लिवर को मजबूत रखने के लिए नारियल पानी, घर की बनी फ्रेश छाछ, नींबू पानी और पुदीने का शरबत पीएं। ये चीजें शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ लिवर को डिटॉक्स करती हैं।
डॉक्टर के पास कब जाएं?
यदि मरीज को तेज बुखार हो, पेट में असहनीय दर्द हो, लगातार उल्टियां हो रही हों या मरीज बेहोशी की हालत में जाने लगे, तो बिना एक मिनट गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं। पीलिया के बिगड़ने पर 'hepatic encephalopathy' दिमाग पर असर होने का खतरा रहता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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