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यहां जीवन में सिर्फ एक बार नहाती हैं महिलाएं, जानें पुरुष नहाते हैं या नहीं और कैसे रखते हैं शरीर को साफ?
Himba Tribe: भीषण गर्मी में जहां हम दिन में कई बार नहाते हैं, वहीं नामीबिया की 'हिम्बा जनजाति' (Himba Tribe) की महिलाएं पूरी जिंदगी पानी की एक बूंद छुए बिना बिता देती हैं। रेगिस्तान में पानी की भयंकर किल्लत के कारण यहां महिलाओं के लिए पानी से नहाना वर्जित है। उन्हें जीवन में सिर्फ एक बार नहाने की अनुमति है। वहीं, यहां के पुरुषों के लिए नियम थोड़े अलग हैं। आइए जानते हैं पुरुषों के नहाने का सच और बिना पानी इस जनजाति के शरीर को साफ रखने का अनोखा वैज्ञानिक रहस्य क्या है...

कहां रहती है यह अनोखी हिम्बा जनजाति?
हिम्बा जनजाति मुख्य रूप से नामीबिया के काओकोलैंड (Kaokoland) क्षेत्र में निवास करती है। करीब 25000 लोगों आबादी वाली ये जनजाति बहुत ही अद्भुत है। यह इलाका बेहद गर्म, शुष्क और पथरीला रेगिस्तानी क्षेत्र माना जाता है। यहां पानी की इतनी भयंकर कमी रहती है कि लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं। ऐसी स्थिति में यहां के लोग पानी को सोने से भी ज्यादा कीमती मानते हैं। पानी का उपयोग केवल पीने और अपने पशुओं को जीवित रखने के लिए किया जाता है। यही कारण है कि इस जनजाति ने जीवित रहने और खुद को साफ रखने के लिए पानी का विकल्प तलाश लिया।

महिलाएं जिंदगी में सिर्फ एक बार ही क्यों नहाती हैं?
ऐसा माना जाता है कि हिंबा जनजाति की महिलाएं जीवन में सिर्फ एक बार पानी से नहाती हैं और वो खास मौका होता है उनकी शादी का। शादी के पवित्र संस्कार के दौरान उन्हें पारंपरिक रूप से पानी से स्नान कराया जाता है। इसके अलावा आम दिनों में उनके लिए पानी का इस्तेमाल करना पूरी तरह वर्जित होता है। वो अपने आपको साफ रखने के लिए धूंए वाले स्नान का सहारा लेती हैं।

क्या हिंबा जनजाति के पुरुष नहाते हैं?
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर महिलाओं के नहाने पर पाबंदी है, तो पुरुषों का क्या नियम है? आपको बता दें कि हिंबा जनजाति के पुरुष पानी से नहा सकते हैं। उन पर महिलाओं की तरह पानी न छूने का कोई कड़ा नियम या धार्मिक प्रतिबंध नहीं होता है। भले ही पुरुषों को नहाने की अनुमति है, लेकिन नामीबिया के इस क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत के कारण, यहां के पुरुष भी अक्सर पानी से नहाने से बचते हैं। वे भी खुद को साफ, फ्रेश और बैक्टीरिया-मुक्त रखने के लिए अक्सर विशेष जड़ी-बूटियों के 'धुएं के स्नान' (Smoke Bath) का ही सहारा लेते हैं।
क्या है 'स्मोक बाथ'? यही है उनकी सफाई और खुशबू का असली रहस्य
जब महिला-पुरुष पानी का इस्तेमाल नहीं करते, तो वे साफ कैसे रहते हैं? इसका जवाब है स्मोक बाथ (Smoke Bath) यानी धुएं से स्नान करना। हर सुबह हिम्बा लोग पानी की जगह धुएं से नहाते हैं। वो लोग सबसे पहले एक छोटे बर्तन में कुछ खास सुगंधित लकड़ियां, दुर्लभ जड़ी-बूटियां और प्राकृतिक पौधों की पत्तियों को जलाते हैं। जब उससे गाढ़ा और सुगंधित धुआं निकलने लगता है, तो महिलाएं और पुरुष उस बर्तन के ऊपर झुककर या बैठकर पूरे शरीर को कपड़े से ढक लेते हैं और इस धुएं से उनके शरीर में जमा पसीना और गंदगी पूरी तरह साफ हो जाती है।

क्या है स्मोक बाथ का वैज्ञानिक फायदा
यह स्मोक बाथ केवल एक परंपरा नहीं है। इस धुएं में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियां प्राकृतिक कीटाणुनाशक होती हैं। यह शरीर के बैक्टीरिया को मारती हैं, पसीने को नियंत्रित करती हैं और त्वचा को संक्रमण से बचाती हैं। यही वजह है कि बिना पानी के भी उनका शरीर हमेशा फ्रेश रहता है।

ओटजाइज (Otjize) लेप को लगाती हैं हिम्बा महिलाएं
धुएं से स्नान करने के बाद हिम्बा महिलाएं अपने पूरे शरीर और बालों पर एक खास पारंपरिक लेप लगाती हैं, जिसे 'ओटजाइज' (Otjize) कहा जाता है। यह लेप मुख्य रूप से तीन चीजों को मिलाकर तैयार किया जाता है-
लाल मिट्टी (Red Ochre / हेमेटाइट)
धूप में सुखाकर दूध से बना खास मक्खन
जानवरों की चर्बी (फैट)
यह लेप केवल एक मेकअप नहीं है, बल्कि इस रेगिस्तानी इलाके में जीवित रहने का एक सुरक्षा कवच है। इसके कई बेहतरीन फायदे हैं जिनके बारे में आप भी जान लीजिए।
कड़कती धूप से बचाव: यह लेप त्वचा पर एक मोटी परत बना देता है, जो सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों से त्वचा की रक्षा करती है।
मच्छरों और कीड़ों से सुरक्षा: रेगिस्तान में जहरीले कीड़ों और मच्छरों के काटने से बचने में यह लेप मदद करता है।
त्वचा की नमी: मक्खन और फैट की वजह से भीषण गर्मी में भी उनकी त्वचा में नमी बनी रहती है और वह कभी रूखी नहीं होती।
हिम्बा महिलाएं क्यों दिखती हैं लाल रंग की?
ओटजाइज लेप में इस्तेमाल होने वाली लाल मिट्टी के कारण हिम्बा महिलाओं की पूरी त्वचा और उनके बाल गहरे लाल या तांबे जैसे रंग के दिखाई देते हैं। यह लाल रंग हिम्बा संस्कृति में 'धरती के रंग' और 'रक्त (जीवन)' का प्रतीक माना जाता है। उनकी यह अनोखी बनावट और लाल रंग का रूप दुनियाभर के वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स और पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।
हेयरस्टाइल से पता चलती है महिलाओं की सामाजिक स्थिति
हिम्बा जनजाति की पहचान सिर्फ उनकी लाल त्वचा से नहीं, बल्कि उनकी बेहद जटिल और सुंदर हेयरस्टाइल से भी होती है। बालों को गूंथकर उन पर भी ओटजाइज लेप लगाया जाता है। खास बात यह है कि इनकी चोटी देखकर आप इनकी सामाजिक स्थिति का पता लगा सकते हैं।
छोटी लड़कियां: अपने बालों की दो चोटियां बनाकर आगे चेहरे की तरफ लटकाती हैं।
अविवाहित युवतियां: उनकी चोटी का स्टाइल अलग और खुला होता है।
शादीशुदा महिलाएं: वे सिर के पीछे कई लंबी लाल चोटियां रखती हैं और सिर पर चमड़े का एक खास मुकुट पहनती हैं।



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