Latest Updates
-
क्यों आती है हिचकी? जानें हिचकियां रोकने के आसान उपाय और कब हो सकती है गंभीर बीमारी का संकेत -
Weight Loss Summer Snack Masala Makhana Recipe: घर पर बनाएं कुरकुरा और हेल्दी स्नैक -
यहां जीवन में सिर्फ एक बार नहाती हैं महिलाएं, जानें पुरुष नहाते हैं या नहीं और कैसे रखते हैं शरीर को साफ? -
Shukra Gochar: 8 जून को शुक्र बदलेंगे अपनी चाल, इन 4 राशियों की बढ़ेगी मुश्किलें, देखें अपनी राशि -
Navratri Special Kala Chana Curry Recipe: बिना प्याज-लहसुन के बनाएं चटपटे काले चने -
Alum Benefits For Skin: चेहरे पर इस तरह लगाएं फिटकरी, झुर्रियां और मुंहासे जड़ से हो जाएंगे गायब -
क्या है CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके के भविष्य में, पंडित सुमित आचार्य ने खोली कुंडली -
अद्भुत थे नीम करौली महाराज के ये अनमोल विचार, जिनसे बदली स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग की जिंदगी -
Aaj Ka Rashifal 6 June 2026: शनिदेव की कृपा से इन राशियों का चमकेगा भाग्य, जानें किसे मिलेगा धन लाभ और कौन रहे सावधान -
Vastu Tips: घर की उत्तर दिशा में भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें, वरना घर में छा जाएगी कंगाली
मृत्यु पंचक में हो जाए किसी की मौत तो कैसे करें अंतिम संस्कार? दोष से बचने के लिए जरूर करें ये उपाय
Mrityu Panchak June 2026: हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में समय की शुद्धता को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यही वजह है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भद्रा और पंचक जैसे अशुभ कालों पर विशेष विचार किया जाता है। शनिवार यानी 6 जून 2026 से मृत्यु पंचक शुरू हो रहे हैं। इस पंचक को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे ज्यादा खतरनाक और कष्टकारी माना जाता है, जिसमें दुर्घटना, बीमारी और मानसिक परेशानियों के बढ़ने का भय रहता है। अगले 5 दिनों तक रहने वाले इस अशुभ काल के दौरान न सिर्फ कई महत्वपूर्ण कार्यों पर रोक लग जाती है, बल्कि इस दौरान होने वाली किसी मृत्यु पर अंतिम संस्कार करने के भी बेहद कड़े नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं मृत्यु पंचक की सटीक तारीख, समय, किसी की मौत हो जाए तो अंतिम संस्कार से जुड़े जरूरी नियम और इस दौरान किए जाने वाले खास उपायों के बारे में।

जून 2026 में मृत्यु पंचक कब से कब तक? नोट कर लें सही तारीख और समय
पंचांग की गणना के अनुसार, जून महीने में ग्रहों और नक्षत्रों के फेरबदल से पंचक की शुरुआत 6 जून 2026, शनिवार की शाम को लगभग 7:00 बजे से हो रही है। यह अशुभ अवधि 11 जून 2026, गुरुवार की सुबह करीब 8:00 बजे समाप्त होगी।
क्यों कहा जाता है इसे 'मृत्यु पंचक'?
ज्योतिष शास्त्र में पंचक पांच प्रकार के होते हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि वे किस दिन से शुरू हो रहे हैं। क्योंकि इस बार पंचक की शुरुआत शनिवार के दिन से हो रही है, इसलिए शास्त्रों में इसे 'मृत्यु पंचक' का नाम दिया गया है। मान्यता है कि इन 5 दिनों में मृत्यु के देवता यमराज की नकारात्मक ऊर्जा बेहद सक्रिय रहती है, जिसके कारण शुभ कार्यों के परिणाम उल्टे हो सकते हैं।
पंचक में मृत्यु हो जाए तो कैसे करें अंतिम संस्कार?
मृत्यु पंचक को लेकर शास्त्रों में एक बेहद कड़ा नियम बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि यदि पंचक काल में किसी व्यक्ति की स्वाभाविक या अस्वाभाविक मृत्यु होती है, तो उस परिवार या नक्षत्र से जुड़े अन्य लोगों पर भी संकट मंडराने लगता है। इस बड़े दोष या किसी अन्य अशुभ घटना को टालने के लिए अंतिम संस्कार के समय विशेष विधि अपनाई जाती है जिनके बारे में नीचे बताया गया है।
5 पुतलों का दाह संस्कार
मृत्यु पंचक के दौरान सामान्य तरीके से शवदाह नहीं किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब मृत शरीर को मुखाग्नि दी जाती है, तो उसके साथ आटे या कुश जो एक प्रकार की पवित्र घास होती से बने 5 पुतले भी चिता पर रखे जाते हैं।
नियम का महत्व
विधि-विधान से इन 5 पुतलों का भी शव के साथ ही दाह संस्कार किया जाता है। ज्योतिषीय मान्यता है कि ऐसा करने से पंचक का गंभीर दोष समाप्त हो जाता है और परिवार पर आने वाला कोई भी बड़ा संकट हमेशा के लिए टल जाता है।
मृत्यु पंचक के दौरान किन कामों को करने की होती है मनाही?
नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से बचने के लिए मृत्यु पंचक के इन 5 दिनों में निम्नलिखित कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है:
दक्षिण दिशा की यात्रा को टाल दें
क्योंकि यह यमराज का पंचक माना जाता है और दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है, इसलिए इन दिनों में दक्षिण की ओर यात्रा करना पूरी तरह वर्जित है।
घर की छत या लिंटर न डलवाएं
पंचक में घर का नया निर्माण कार्य या छत ढालने (लिंटर डालने) का काम नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से घर में आर्थिक हानि और मानसिक तनाव तेजी से बढ़ सकता है।
नया बेड या चारपाई न बनवाएं
इस दौरान नया पलंग, बेड या चारपाई बनवाना या घर लाना अशुभ होता है। माना जाता है कि इससे पारिवारिक अशांति और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां घेर लेती हैं।
ईंधन और सूखी लकड़ी इकट्ठा न करें
पंचक काल में घास, सूखी लकड़ी या कोई भी ज्वलनशील ईंधन इकट्ठा करने की मनाही होती है, क्योंकि इस समय अग्नि दुर्घटनाओं का भय सबसे अधिक रहता है।
मांगलिक कार्यों पर पूरी रोक
इन 5 दिनों के भीतर विवाह, मुंडन, जनेऊ या गृह प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्य भूलकर भी नहीं करने चाहिए।
मृत्यु पंचक के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए क्या करें?
यदि आप इस दौरान किसी परेशानी या मानसिक तनाव से बचना चाहते हैं, तो ज्योतिष शास्त्र में कुछ बेहद आसान और अचूक उपाय बताए गए हैं-
हनुमान जी की शरण: मृत्यु पंचक के दौरान रोज शाम को घर में हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।
मुख्य द्वार पर उपाय: अपने घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर से 'स्वस्तिक' का चिन्ह बनाएं और हनुमान जी की फोटो लगाएं। इससे नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पातीं।
शनिवार का विशेष दान: शनिवार के दिन काले तिल, सरसों का तेल और काले कपड़ों का दान किसी जरूरतमंद को करें। इससे शनि देव और यमराज दोनों शांत रहते हैं।
सफाई का रखें ध्यान: इन 5 दिनों में अपने घर और कार्यस्थल पर पूरी तरह से साफ-सफाई बनाए रखें, क्योंकि स्वच्छता से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
इन 5 दिनों में मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों की सख्त मनाही होती है:
दक्षिण दिशा की यात्रा करना।
घर की छत या लिंटर डालना।
नया बेड, पलंग या चारपाई बनवाना।
सूखी लकड़ी, घास या ईंधन इकट्ठा करना।
विवाह, मुंडन, जनेऊ या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य करना।
गरुड़ पुराण के अनुसार, पंचक में मृत्यु होने पर परिवार के अन्य सदस्यों पर भी मृत्यु तुल्य संकट मंडराने का खतरा रहता है। इस दोष (पंचक दोष) के निवारण के लिए शव के साथ आटे या कुश (एक पवित्र घास) से बने 5 पुतलों का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दाह संस्कार किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से संकट टल जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार, जो पंचक शनिवार के दिन से प्रारंभ होता है, उसे 'मृत्यु पंचक' कहा जाता है। यह पंचक सबसे घातक माना जाता है क्योंकि शनिवार के स्वामी शनि देव हैं और इस दौरान यमराज की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।



Click it and Unblock the Notifications