Irrfan Khan Birthday: यहां देखें इरफ़ान खान के फेमस डायलाग और उनकी उम्दा फिल्मों की लिस्ट

Irrfan Khan Birthday: फ़िल्में केवल हमारा एंटरटेनमेंट ही नहीं करती बल्कि वे समाज का आईना होती है और हमारी जिंदगियों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फिल्म जगत में बेहद कम ही ऐसे अदाकार होते हैं जिनकी अदाकारी दर्शकों के दिलोदिमाग पर अमिट छाप छोड़ देती है। इरफ़ान खान, एक ऐसे फ़नकार का नाम है जिन्होंने अपनी हर फिल्म के ज़रिए दर्शकों को मोहित किया।

महज़ 53 वर्ष की उम्र में वर्ष 2020 में उन्होंने कैंसर से लड़ते हुए इस दुनिया को अलविदा कहा, और फिल्म जगत ने अपना सबसे चमकता सितारा खो दिया। अपने 30 वर्ष के लम्बे फ़िल्मी करियर में उन्होंने कई उम्दा फ़िल्में दी। 7 जनवरी को उनकी जन्म जयंती होती है।

इरफ़ान खान का जन्म 7 जनवरी, 1967 को राजस्थान के टोंक में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीवी दुनिया से की और कई वर्षों तक फिल्मों में छोटे से छोटे रोल करके वे कई बड़ी फिल्मों के मुख्य किरदारों तक पहुंचें। उन्हें नेशनल फिल्म अवार्ड, फिल्मफेयर अवार्ड के साथ साथ वर्ष 2011 में पदमश्री से भी नवाज़ा गया।

Irrfan Khan Birthday Special: List of his Famous Dialogues and Iconic Films

इरफ़ान खान की कुछ उम्दा फ़िल्में जिन्हें आप नहीं कर सकते मिस

कद्दावर अभिनेता इरफ़ान ने हमें कुछ ऐसी बेहतरीन फ़िल्में दी, जिन्हें अदाकारी का स्कूल भी कहा जा सकता है। कुछ उम्दा फ़िल्में हैं - मकबूल, हासिल, सलाम बोम्बे, लाइफ इन अ मेट्रो, पान सिंह तोमर, द लंचबॉक्स, पिकू, साहेब बीबी और गैंगस्टर, द नेमसेक, कारवां, हैदर, करीब करीब सिंगल, हिंदी मीडियम।

पेश हैं इरफ़ान खान के अभिनीत किरदारों द्वारा कहे गये कुछ जानदार डायलाग जो आज भी लोगों की यादों में ताज़ा हैं-

Irrfan Khan Birthday Special: List of his Famous Dialogues and Iconic Films

ये शहर जितना हमें देता है, बदले में उससे कहीं ज्यादा हमसे ले लेता है। - फिल्म लाइफ इन अ मेट्रो

'मोहब्बत है इसलिए जाने दिया... जिद होती तो बांहों में होती' - फिल्म जज़्बा

'बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में।' - फिल्म पान सिंह तोमर

बड़े शहरों की हवा और छोटे शहरों का पानी बहुत खतरनाक होता है। - द किलर

'हमारी तो गाली पर भी ताली बजती है' - फिल्म साहेब, बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स

दरिया भी मैं, दरख़्त भी मैं, झेलम भी मैं, चिनार भी मैं। दैर भी हूं, हरम भी हूं। शिया भी हूं, सुन्नी भी हूं, मैं हूं पंडित। मैं था, मैं हूं और मैं ही रहूंगा। - फिल्म हैदर

इक बार यूं होगा, थोड़ा सा सुकूं होगा, ना दिल में कसक होगी, ना सिर में जुनूं होगा। - 7 खून माफ़

लकीरें बहुत अजीब होती हैं। खाल पे खिंच जाएं तो खून निकाल देती हैं और जमीन पर खिंच जाएं तो सरहदें बना देती हैं। - फिल्म गुंडे

तुमको हम याद रखेंगे गुरु...- फिल्म गुरु

''एक तकिया और कंबल पैक करें और जितना संभव हो उतना दुनिया देखें। आपको इसका पछतावा नहीं होगा। एक दिन, बहुत देर हो जाएगी,''- फिल्म द नेमसेक

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Sunday, January 7, 2024, 9:00 [IST]
Desktop Bottom Promotion