80 की उम्र में अकेले जिंदगी जी रही हैं उषा नाडकर्णी, बेटा नहीं मानता मां, एक्ट्रेस ने बयां किया अपना दर्द

Usha Nadkarni Life Story: टीवी की जानी-मानी अभिनेत्री उषा नाडकर्णी ने अपने दमदार अभिनय से कई दशकों तक दर्शकों का दिल जीता है। 'पवित्र रिश्ता' में निभाया गया उनका किरदार आज भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। हालांकि, पर्दे पर मजबूत नजर आने वाली उषा नाडकर्णी की निजी जिंदगी संघर्षों से भरी रही। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने बचपन, शादीशुदा जीवन और परिवार से जुड़े ऐसे अनुभव साझा किए, जिन्होंने सभी को भावुक कर दिया। 80 साल की उम्र में भी वह मुंबई में अकेले रहकर अपनी जिंदगी अपने दम पर जी रही हैं।

Usha Nadkarni

बचपन में झेली पिता की प्रताड़ना

उषा नाडकर्णी का बचपन बेहद मुश्किलों में गुजरा। उनके पिता भारतीय वायुसेना में अधिकारी थे, लेकिन घर में उनका व्यवहार बेहद सख्त था। उषा ने बताया कि वे छोटी-छोटी बातों पर वे गुस्सा हो जाते थे और उषा, उनके भाई-बहनों तथा मां के साथ मारपीट करते थे। उषा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि अगर अखबार थोड़ा भी मुड़ा हुआ मिल जाता या बच्चों की किताबें सही जगह पर नहीं रखी होतीं, तो उनके पिता गुस्से में किताबें तक फाड़ देते थे। घर का माहौल इतना डरावना था कि जब किसी एक भाई-बहन की पिटाई होती, तो बाकी बच्चे डरकर इधर-उधर छिप जाते थे। एक बार उनके पिता उनके भाई को बेरहमी से पीट रहे थे। जब उषा ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उन्होंने नारियल काटने वाले कोइते से उन पर हमला कर दिया, जिससे उनके हाथ में गहरा घाव हो गया।

एक्टिंग का सपना पूरा करने के लिए छोड़ना पड़ा घर

पिता के गुस्सैल स्वभाव के कारण उषा कभी उनसे अपने अभिनय के सपने की बात नहीं कर सकीं। बाद में जब उन्होंने अपनी मां, जो पेशे से शिक्षिका थीं, को बताया कि वह अभिनेत्री बनना चाहती हैं, तो मां ने भी इसका विरोध किया। परिवार एक मध्यवर्गीय माहौल से था और पड़ोसियों की बातों को लेकर काफी चिंता रहती थी। मां को डर था कि अभिनय की दुनिया में जाने पर लोग तरह-तरह की बातें करेंगे। लेकिन उषा अपने फैसले पर अड़ी रहीं। आखिरकार उनकी मां ने उनका सामान घर से बाहर फेंक दिया और उन्हें घर छोड़ने के लिए कह दिया। इसके बाद उन्हें करीब एक सप्ताह तक अपनी एक सहेली के घर रहना पड़ा। बाद में उनके पिता उन्हें वापस घर ले आए, लेकिन उन्होंने अभिनय का सपना नहीं छोड़ा। कई वर्षों बाद सोनी टीवी के शो 'तुम हो ना: घर की सुपरस्टार' में उन्होंने कहा था कि लोग हमेशा कुछ न कुछ कहते ही हैं, इसलिए जिंदगी में वही करना चाहिए जो दिल कहे। उन्होंने बताया कि उन्होंने चौथी कक्षा में पहली बार मंच पर अभिनय किया था और आज 80 वर्ष की उम्र में भी कैमरे के सामने उसी जुनून के साथ काम कर रही हैं।

पति से अलगाव हुए बेटे से दूरी का दर्द

उषा नाडकर्णी ने अपने निजी जीवन के बारे में हमेशा कम ही बात की, लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने पहली बार स्वीकार किया कि उनका अपने पति से बहुत पहले ही अलगाव हो गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनके मन में पति या उनके परिवार के प्रति कोई नाराजगी नहीं है। आज भी वे उनके परिवार के लोगों को अपने घर बुलाकर साथ बैठकर खाना खिलाती हैं। शादी से उनका एक बेटा है, जो अब विदेश में रहता है। अभिनय और मराठी रंगमंच की व्यस्तता के कारण वे बेटे को उतना समय नहीं दे सकीं, जितना एक मां देना चाहती है। दिन में कई-कई नाटक करने पड़ते थे, इसलिए बेटे की परवरिश की जिम्मेदारी उनकी मां और भाई ने संभाली। भाई का घर बड़ा था, इसलिए बेटा वहीं अपनी नानी और मामा के साथ बड़ा हुआ। यही वजह है कि आज उनका बेटा उनसे कहता है, "आपने मुझे सिर्फ जन्म दिया है, मेरी असली मां तो मेरी नानी थीं।" उषा मानती हैं कि उनका बेटा अपनी नानी से ज्यादा जुड़ा रहा और यह बात उन्हें आज भी भीतर से दुख देती है। फिर भी वे मानती हैं कि उस समय परिस्थितियां ऐसी थीं कि उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था।

चार दशक से अकेले रह रही हैं

पति से अलग होने के बाद उषा नाडकर्णी वर्ष 1987 से मुंबई में अकेले रह रही हैं। उनके बेटे का विदेश में बस जाना और समय के साथ सभी भाई-बहनों का निधन हो जाना, उन्हें पूरी तरह अकेला छोड़ गया। शुरुआती दिनों में अकेले रहने का डर उन्हें भी सताता था। जब वे पहली बार अपने नए फ्लैट में रहने आई थीं, तब अक्सर बिल्डिंग के गार्ड से कहती थीं कि वह उन्हें दरवाजे तक छोड़कर जाए, क्योंकि उन्हें लगता था कि कहीं कोई पीछे से हमला न कर दे। लेकिन समय के साथ उन्होंने इस डर पर भी जीत हासिल कर ली। अब वे कहती हैं कि अकेले रहना उनकी आदत बन चुका है और उन्हें किसी भी तरह का डर नहीं लगता। उनका मानना है कि इंसान को हालात से डरने के बजाय उन्हें स्वीकार करना सीखना चाहिए।

अब मौत से डर नहीं लगाता

80 वर्ष की उम्र में भी उषा नाडकर्णी पूरी आत्मनिर्भरता के साथ अपनी जिंदगी जी रही हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या अकेले रहने के कारण उन्हें अचानक मौत आने का डर सताता है, तो उन्होंने बेहद शांत अंदाज में जवाब दिया कि इंसान यह तय नहीं कर सकता कि उसकी मौत कब और कैसे होगी। कोई सोते-सोते दुनिया छोड़ देता है तो कोई अस्पताल में अंतिम सांस लेता है। इसलिए वे ऐसी बातों को लेकर चिंता नहीं करतीं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अगर कभी उनकी मौत नींद में ही हो जाए, तो पड़ोसी बस यही सोचेंगे कि "आज बुढ़िया ने दरवाजा नहीं खोला।" उनका मानना है कि जिंदगी डरकर नहीं, बल्कि हिम्मत के साथ जीनी चाहिए।

Story first published: Friday, August 7, 2026, 14:46 [IST]
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