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बाइक से सोलो ट्रिप पर Leh-Ladakh गए युवक की मौत, ऊंचाई वाले इलाको पर जाते हुए न करें ये गलतियां
Altitude sickness: एडवेंचर्स ट्रिप का शौक रखने वाले कई युवाओं की हसरत होतो है कि वो बाइक से लेह-लद्दाख ट्रिप पर जाएं। ऐसी ही एक हसरत एक युवक के लिए जानलेवा बन गई। दरअसल नोएडा के रहने वाले चिन्मय शर्मा की 29 अगस्त को लेह-लद्दाख सोलो ट्रिप के दौरान मौत हो गई। 27 साल के चिन्मय की मौत एल्टिट्यूड सिकनेस की वजह से हुई है।
आपको बता दें कि ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है। चिन्मय की मौत की वजह भी ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई है। अगर आप भी लेह-लद्दाख घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो हम आपकी मदद के लिए कुछ बातें बता रहे हैं यह टिप्स आपके काम आएंगे। पहले जानते हैं एल्टिट्यूड सिकनेस क्या है और कैसे इससे बचे?

ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत
लेह काफी ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद है। लेह समुद्रतल से लगभग 3500 मीटर (11482 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है, जहां आमतौर पर ऑक्सीजन की कमी रहती है। जिन लोगों के फेफड़े कमजोर है या जिन्हें सांस से जुड़ी समस्या है, ऐसे लोगों को इतनी ऊंचाई पर नहीं जाने की सलाह दी जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लेह पहुंचने के बाद चिन्मय की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। जिसके बाद उन्होंने अपने पिता को भी इस बात की जानकारी दी। इस दौरान उन्हें सांस लेने में कठिनाई होने के साथ ही सिर में दर्द हो रहा था।
एल्टिट्यूड सिकनेस के होते हैं अलग-अलग स्टेज
- एल्टिट्यूड सिकनेस की शुरूआत सबसे पहले पहाड़ों पर होने वाली बीमारी जिसे एक्यूट माउंटेन सिकनेस भी कहते हैं, इससे शुरू होती है। यह एक्यूट माउंटेन सिकनेस का पहला स्तर होता है। यह बीमारी तब होती है जब शरीर ऊंचाई वाले स्थान पर पहुंचने पर सिर दर्द, चक्कर और मतली आने लगती है।
- हाई एल्टीट्यूड सेरेब्रल एडिमा इसे एल्टिट्यूड सिकनेस का दूसरा स्तर माना जाता है। जिसमें दिमाग में सूजन और बेहोशी की स्थिति आ जाती है।
इसमें भी सही समय में इलाज न मिलने की वजह से जान चली जाती है।
- एल्टिट्यूड सिकनेस गंभीर और अंतिम चरण हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा होती है। इसमें छाती में दर्द और थकावट के अलावा फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। इस स्थिति में भी व्यक्ति की जान को जोखिम रहता है।
एल्टिट्यूड सिकनेस के लक्षण
एल्टिट्यूड सिकनेस के लक्षणों में सिरदर्द, मतली, चक्कर आना और सांस लेने में दिक्कत होनी जैसी समस्या नजर आती है। गंभीर परिणामों में दिमाग में सूजन, बेहोश हो जाना और फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने की वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है। जिसकी वजह से जान चली जाती है। कम ऑक्सीजन के स्तर को संतुलिन करने के लिए जूझने लगता है। हाई एल्टीट्यूड वाले इलाकों में अधिक उम्र वाले लोगों और सांस और दिल के मरीजों को यह सिकनेस जल्दी पकड़ लेती है।
लेह-लद्दाख की यात्रा के लिए सेफ्टी टिप्स
- लेह-लद्दाख जाने वाले लोगों को ट्रिप प्लान करने से कम से कम एक महीने वाले एक्सरसाइज शुरू कर देनी चाहिए ताकि वो वहां के वातावरण के हिसाब से फिजिकली फीट रह सकें।
- लेह आने वाले सभी टूरिस्टों को खारदुंग ला, पैंगोंग झील आदि जैसे लेह के ऊंचे इलाकों की यात्रा शुरू करने से पहले कम से कम 48 घंटे वहां के वातावरण के अनुकूल होने में बिताने चाहिए।
- लेह पहुंचने के बाद पहले दो दिनों के दौरान, टूरिस्टों को किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि से बचना चाहि।
- लेह-लद्दाख में ट्रिप के दौरान शराब या स्मोकिंग करने से बचना चाहिए।
- अच्छा महसूस नहीं होने पर आगे यात्रा न करें और तुरंत डॉक्टर से बात करें।
- हर 50 से 100 किमी के बाद ड्राइव करने के बार पानी जरूर पीएं।
- अपने साथ फर्स्ट एड किट जरूर रखें। सफर के दौरान डिहाइड्रेशन से बचने के लिए स्पेशल डिहाइड्रेशन बैग साथ में रखें।
- अपने साथ गर्म कपड़े लेकर जाएं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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