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बेंगलुरु में 8 साल की बच्ची की कार्डिएक अरेस्ट से मौत, एक्सपर्ट से जानें बच्चों में हार्ट अटैक की वजह
Cause of heart attack in children : हाल ही में बेंगलुरु में एक 8 साल की बच्ची की कार्डिएक अरेस्ट के कारण मौत हो गई, जिसने सबको हैरान कर दिया। आमतौर पर हार्ट से संबंधित परेशानियां 18-20 साल के बाद ही होती हैं, लेकिन बच्चों में कार्डिएक अरेस्ट के मामले भी सामने आ रहे हैं। इससे पहले, अलीगढ़ में एक 4 साल के बच्चे की भी कार्डिएक अरेस्ट से मौत हो गई थी। बच्चों में कार्डिएक अरेस्ट का कारण जन्मजात हृदय विकार, इलेक्ट्रिकल समस्या या गंभीर इंफेक्शन हो सकता है। 10 साल से कम उम्र के बच्चों में यह स्थिति दुर्लभ लेकिन संभव है।
चाइल्ड स्पेशलिस्ट विवेक शर्मा के मुताबिक बच्चों में कार्डिएक अरेस्ट के मामले बहुत दुर्लभ हैं, एक लाख में केवल 1 से 3 बच्चे प्रभावित होते हैं। हालांकि, कार्डिएक अरेस्ट के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन आधे मामलों में कारणों का पता नहीं चलता। इसमें अचानक हार्ट पंप करना बंद कर देता है, जिससे मृत्यु हो जाती है। तत्काल सीपीआर और अस्पताल में उपचार से जान बचाई जा सकती है, लेकिन दुर्भाग्यवश अधिकांश लोग सीपीआर नहीं जानते।

कार्डिएक अरेस्ट की वजह
कार्डिएक अरेस्ट के कई कारण हो सकते हैं। मायोकार्डाइटिस, जो हार्ट इंफेक्शन के कारण होता है, से हार्ट मसल्स कमजोर हो जाते हैं, जिससे अरेस्ट हो सकता है, जो बच्चों में आम है। कैंसर, गंभीर चोटें, ड्रग्स का ओवरडोज़ और जन्मजात या जेनेटिक हार्ट बीमारी भी कार्डिएक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं। इन कारणों से अचानक हार्ट पंप करना बंद कर देता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
बच्चों में कार्डिएक अरेस्ट की है यह एक वजह
हार्ट की धड़कन की असामान्यता कार्डिएक अरेस्ट का सबसे बड़ा कारण है, खासकर 1 से 35 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में, जहां यह अचानक कार्डियक डेथ का सामान्य कारण बनता है। विशेषज्ञों की मानें तो यदि फर्स्ट डिग्री रिलेशन में किसी को इस प्रकार की बीमारी है, तो उसके बच्चों में भी इसका खतरा हो सकता है। ऐसे व्यक्तियों को 10 साल की उम्र तक लिपोप्रोटीन A और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए ताकि हार्ट की स्थिति का पता चल सके। इसके अलावा, हार्ट की मांसपेशियों की संरचनात्मक या कार्यात्मक गड़बड़ियां, जैसे मांसपेशी का मोटा होना, युवा में अचानक कार्डियक डेथ का प्रमुख कारण हो सकती हैं। हार्ट की कोशिकाओं में गड़बड़ियां और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी या अधिकता भी कार्डिएक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं।
कार्डिएक अरेस्ट से कैसे बचे?
कार्डिएक अरेस्ट से बचने के लिए यदि परिवार में हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट का इतिहास हो, तो 10 साल की उम्र से ही हार्ट से संबंधित टेस्ट कराना चाहिए। चूंकि हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट से पहले कोई लक्षण नहीं दिखते, इसलिए हर साल लिपिड प्रोफाइल, ट्रेडमील टेस्ट, ईसीजी जैसे हार्ट टेस्ट कराना जरूरी है। इसके लिए डॉक्टर से परामर्श और उनकी सलाह लेना महत्वपूर्ण है। हार्ट से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव मुक्त जीवनशैली अपनाना चाहिए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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