Latest Updates
-
लंच में बनाएं उत्तर प्रदेश की चना दाल कढ़ी, उंगलिया चाटते रह जाएंगे घरवाले -
Gangaur Ke Geet: 'आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै'...इन मधुर गीतों के बिना अधूरी है गौरा पूजा, यहां पढ़ें पूरे लिरिक्स -
प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीनों में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, वरना बच्चे की सेहत पर पड़ेगा बुरा असर -
Viral Video: टीम इंडिया की T20 वर्ल्ड कप जीत पर पाकिस्तान में जश्न, काटा केक और गाया 'जन-गण-मन' -
कौन हैं Mahieka Sharma? जिसके प्यार में 'क्लीन बोल्ड' हुए Hardik Pandya, देखें वायरल वीडियो -
कौन हैं Aditi Hundia? T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद Ishan Kishan के साथ डांस Video Viral -
काले और फटे होंठों से हैं परेशान? तो पिंक लिप्स पाने के लिए आजमाएं ये घरेलू नुस्खे -
Chaitra Navratri 2026: 8 या 9 दिन जानें इस बार कितने दिन के होंगे नवरात्र? क्या है माता की सवारी और इसका फल -
Gangaur Vrat 2026: 20 या 21 मार्च, किस दिन रखा जाएगा गणगौर व्रत? नोट करें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त -
घर में लाल चीटियों का दिखना शुभ है या अशुभ? जानें शकुन शास्त्र के ये 5 बड़े संकेत
अयोध्या राम मंदिर के ध्वज पर कोविदार वृक्ष क्यों? जानिए इस दुर्लभ पौराणिक वृक्ष के धार्मिक और स्वास्थ्य लाभ
Ayodhya Ram Mandir Flag Symbols Kovidara Tree Benefits: अयोध्या में 2025 का राम मंदिर ध्वजारोहण समारोह ऐतिहासिक होने जा रहा है। सदियों बाद एक बार फिर वह प्राचीन ध्वज, जिसमें ॐ, सूर्य और कोविदरा वृक्ष जैसे पवित्र प्रतीक अंकित थे, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इस ध्वज का ध्वजारोहण करेंगे। सवाल यह है इन तीन विशेष प्रतीकों को ध्वज में क्यों शामिल किया गया?
और इनका धार्मिक व सांस्कृतिक अर्थ क्या है? लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कोविदार वृक्ष की हो रही है और लोग उसके बारे में जानना चाहते हैं। आइए जानते हैं इस वृक्ष का महत्व और इसके हेल्थ बेनिफिट्स...

कोविदार वृक्ष दुर्लभ पौराणिक वृक्ष
अयोध्या राम मंदिर के ध्वज पर अंकित कोविदरा वृक्ष अत्यंत महत्वपूर्ण है। शास्त्रों में इसे मंदार और पारिजात का संकर माना गया है, जिसकी रचना ऋषि कश्यप ने की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस वृक्ष के बारे में बताया और इसके महत्व का भी जिक्र किया। वहीं यह भारतीय पादप-विज्ञान और प्राचीन वनस्पति प्रयोगों का शुरुआती संकेत भी माना जाता है। शुरुआत में शोधकर्ताओं ने इसे कचनार समझ लिया था क्योंकि दोनों वृक्षों का वानस्पतिक नाम लगभग समान है। बाद में BHU के वनस्पतिशास्त्रियों प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, प्रो. अभिषेक द्विवेदी ने रामायण और हरिवंश पुराण के आधार पर इसकी पहचान की पुष्टि की कि यह वास्तव में कोविदरा ही है।
कोविदार पेड़ के स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits of Kovidara Tree)
एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण - शरीर की सूजन कम करने में सहायक।
त्वचा रोगों में लाभकारी - पत्तियों व फूलों का लेप खुजली, दाद और रैशेज में राहत देता है।
एंटीबैक्टीरियल गुण - संक्रमण रोकने में मदद करता है।
पाचन के लिए अच्छा - कोविदार की छाल व फूल अपच, गैस और कब्ज में लाभकारी होते हैं।
ब्लड प्यूरिफायर - रक्त को शुद्ध करने में सहायक माना जाता है।
जोड़ों के दर्द में राहत - इसकी छाल का काढ़ा गठिया और जोड़ों के दर्द में उपयोगी।
प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाए - नियमित सेवन से इम्युनिटी में सुधार होता है।
ज्वर नाशक - बुखार कम करने में हर्बल दवा के रूप में उपयोग।
घाव भरने में सहायक - पत्तियों का पेस्ट लगाने से घाव जल्दी भरते हैं।
महिलाओं के स्वास्थ्य में लाभकारी - मासिक धर्म संबंधी दर्द और अनियमितता में पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग।
कफ और सर्दी में राहत - फूलों का काढ़ा कफ कम करता है और सांस संबंधी समस्याओं में सहायक है।
ध्वज पर अंकित 2 अन्य पवित्र प्रतीक और उनका महत्व
ॐ सृष्टि की मूल ध्वनि
ध्वज के चारों ओर बना ॐ का चिन्ह हिन्दू दर्शन में ब्रह्मांड की प्रथम और अनंत ध्वनि का प्रतिनिधित्व करता है। शोधकर्ता मिश्रा के अनुसार, समिति ने ॐ को इसलिए शामिल किया ताकि ध्वज वैदिक साहित्य में वर्णित मूल स्वरूप से मेल खाए।
सूर्य भगवान राम का वंश प्रतीक
ध्वज पर बना सूर्य का चिन्ह भगवान राम के सूर्यवंशी वंश को दर्शाता है। ललित मिश्रा के अनुसार-"भगवान राम सूर्यवंश से थे, इसलिए प्राचीन परंपरा के अनुरूप सूर्य को ध्वज में शामिल किया गया है।"
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











