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प्रेगनेंसी में भारती सिंह की शुगर हुई हाई, क्या मां से बच्चे में भी बढ़ सकता है डायबिटीज का रिस्क?
Bharti Singh Pregnancy High Sugar: मशहूर स्टार कॉमेडियन भारती सिंह (Bharti Singh) एक बार फिर से मां बनने वाली हैं। उन्होंने खुद अपने यूट्यूब चैनल पर एक ब्लॉग में इस खुशखबरी को लोगों संग शेयर किया था। अब उन्होंने अपने नए व्लॉग में बताया है कि उनकी तबीयत बिगड़ गई है। दरअसल, उनका शुगर लेवल बहुत ज्यादा हाई (Gestational Diabetes) हो गया है। जिस वजह से डॉक्टर ने भी उन्हें डांट लगाई है। हालांकि थोड़ा बहुत शुगर बढ़ना कोई खतरे की बात नहीं है लेकिन भारती का बहुत तेजी से शुगर हाई हो रहा है जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इस पर डॉक्टर ने भी उन्हें डांटा और अपना ख्याल रखने की सलाह दी। वहीं लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रेगनेंसी के दौरान मां का शुगर लेवल हाई हो तो उसका असर बच्चे पर भी पड़ता है? क्या बच्चा मां की वजह से पेट में ही डायबिटिक हो सकता है? और सबसे जरूरी बात, गर्भधारण के समय शुगर बढ़ना कितना सामान्य है और कब यह खतरनाक हो सकता है? आइए इन सवालों के जवाब जानते हैं।

प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है शुगर
भारती सिंह ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान उनका ब्लड शुगर स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसकी वजह से उन्हें लगातार डॉक्टर की निगरानी में रहना पड़ रहा है। दरअसल, कई महिलाओं में प्रेगनेंसी के समय बॉडी इंसुलिन को ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाती है, जिससे गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes) हो जाता है। यह आमतौर पर डिलीवरी के बाद ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा भी बन सकता है।
क्या मां से बच्चे को हो सकती है डायबिटीज
दरअसल, गर्भावस्था में बढ़ी हुई शुगर (Gestational Diabetes) सिर्फ मां को ही नहीं, बल्कि बच्चे की हेल्थ पर भी असर डाल सकती है। हालांकि हर बच्चा डायबिटिक पैदा नहीं होता, लेकिन आगे चलकर उसके शुगर लेवल और स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव जरूर पड़ सकता है। इसी वजह से डॉक्टर बार-बार चेतावनी देते हैं कि प्रेग्नेंसी में शुगर को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। वहीं अगर मां इस दौरान अपनी शुगर कंट्रोल कर ले तो बच्चे को कोई दिक्कत नहीं होती और न ही भविष्य में डायबिटिक होने का खतरा ज्यादा होता है।
बता दें कि शुगर प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक पहुंचती है ऐसे में बच्चा शुगर को बैलेंस करने के लिए ज्यादा इंसुलिन बनाता है। इस वजह से जन्म के बाद ऐसे बच्चे में आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है और ऐसे बच्चों में मोटापा और हार्मोनल असंतुलन की समस्या भी ज्यादा दिखाई देती है।
गर्भधारण के समय शुगर बढ़ना कितना आम है?
आजकल यह बहुत आम हो चुका है। लगभग 10 में से 2-3 महिलाओं में गर्भकालीन मधुमेह देखा जाता है। इसके कारण होते हैं- हार्मोनल बदलाव, बढ़ता वजन, लाइफस्टाइल में कमी, आनुवंशिक कारण, पहले से इंसुलिन रेजिस्टेंस इसलिए डॉक्टर इसे एक कॉमन लेकिन सीरियस कंडीशन मानते हैं, जिसे समय रहते कंट्रोल करना जरूरी है।
प्रेगनेंसी के दौरान कितना शुगर होना चाहिए?
अब ये जान लेते हैं कि गर्भधारण के समय महिला का कितना शुगर लेवल होना सही है। जान लें कि फास्टिंग ब्लड शुगर (खाली पेट) 95 mg/dL से कम होना चाहिए (90-95 mg/dL सबसे सुरक्षित मानी जाती है)। खाना खाने के 1 घंटे बाद (Post Meal 1 Hour) 140 mg/dL से कम होना चाहिए। वहीं खाना खाने के 2 घंटे बाद (Post Meal 2 Hour) 120 mg/dL से कम होना चाहिए।
शुगर इससे ज्यादा हो तो क्या होता है?
अगर प्रेगनेंसी में शुगर लेवल इन रेंज से ऊपर जाता है, तो स्थिति को कहते हैं Gestational Diabetes। इससे-
बच्चे का वजन ज्यादा बढ़ सकता है
डिलीवरी कठिन हो सकती है
मां में हाई BP का खतरा बढ़ता है
बच्चे को जन्म के बाद लो शुगर हो सकता है
ऐसे बच्चों में आगे चलकर डायबिटीज का रिस्क भी बढ़ जाता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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