Latest Updates
-
Yoga For Arthritis: गठिया के दर्द से हैं परेशान तो रोज करें ये 5 योगासान, जल्द ही मिलेगी राहत -
फैटी लिवर होने पर भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना झेलने पड़ेंगे गंभीर नुकसान -
March Pradosh Vrat 2026: मार्च महीने का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
हाथ से इन 5 चीजों का गिरना है बड़े संकट का संकेत, कहीं आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज? -
School Holiday April 2026: छुट्टियों की भरमार! गुड फ्राइडे से आंबेडकर जयंती तक, देखें अवकाश लिस्ट -
इन 5 तरीकों से मिनटों में पहचानें असली और नकली सरसों का तेल, सेहत से न करें समझौता -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए अरबी की सब्जी, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
महिलाओं की कौन सी आंख फड़कने का क्या है मतलब? जानें बाईं और दाईं आंख के शुभ-अशुभ संकेत -
New Rules From 1 April 2026: दवाइयों से मोबाइल तक, जानें 1 अप्रैल से क्या होगा सस्ता, क्या महंगा? -
Kamada Ekadashi Upay: वैवाहिक कलह और कर्ज के बोझ से हैं परेशान? कामदा एकादशी पर करें ये 3 अचूक उपाय
2 साल से छोटे बच्चों को न पिलाएं कफ सिरप, 12 बच्चों की मौत के बाद केंद्र ने जारी की एडवाइजरी
Cough Syrup Safety Alert: हाल ही में मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की कथित रूप से कफ सिरप पीने से मौत के मामले क बाद केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाइयां नहीं दी जाएं।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया है। इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान से एकत्र किए गए कफ सिरप के नमूनों में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) या एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) नहीं था। इन दोनों तत्वों से किडनी को गंभीर नुकसान हो सकता है।

क्यों दी गई यह चेतावनी?
हाल ही में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत की खबर सामने आई थी। मृत बच्चों में गुर्दे के संक्रमण और पेशाब न कर पाने जैसे लक्षण पाए गए थे। आशंका जताई जा रही है कि बच्चों को दी गई खांसी की दवा इस घटना से जुड़ी हो सकती है। इस मामले की गहराई से जांच करने के लिए केंद्र ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की टीम को जांच के लिए भेजा।
DEG/EG के मौजूद नहीं होने की पुष्टि
मध्य प्रदेश राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भी तीन नमूनों की जांच की और DEG/EG के मौजूद नहीं होने की पुष्टि की। राजस्थान में दूषित कफ सिरप के सेवन से दो बच्चों की मौत की खबरों पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संबंधित उत्पाद में प्रोपिलीन ग्लाइकॉल नहीं है जो DEG/EG संदूषण का संभावित स्रोत है।
जांच में क्या सामने आया?
- अब तक लिए गए सिरप के नमूनों में डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल (EG) जैसे जहरीले केमिकल नहीं मिले हैं।
- राजस्थान में संदिग्ध सिरप से प्रोपिलीन ग्लाइकोल की संभावना पर जांच हुई, लेकिन फिलहाल कोई खामी नहीं पाई गई।
- केंद्र ने NCDC, NIV और CDSCO की टीमों को प्रभावित जिलों में भेजा है, जो नमूने इकट्ठा कर आगे की जांच कर रही हैं।
सरकार की नई गाइडलाइन
- 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवाएं बिल्कुल न दें।
- 5 साल से कम उम्र के बच्चों में भी इन दवाओं का उपयोग बहुत सावधानी से और केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाए।
- राज्यों से कहा गया है कि इस चेतावनी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए ताकि आम जनता जागरूक हो सके।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
डीजीएचएस की डॉक्टर सुनीता शर्मा द्वारा जारी परामर्श में कहा गया कि लोगों को डॉक्टरों के नुस्खों के पालन के प्रति भी संवेदनशील बनाया जा सकता है। इसमें बच्चों में होने वाली अधिकांश खांसी और जुकाम वायरल संक्रमण के कारण होते हैं, जो कुछ दिनों में खुद ठीक हो जाते हैं। बिना जरूरत दवा देना खतरनाक साबित हो सकता है।
अभिभावकों के लिए सुझाव
- खांसी या जुकाम की दवा खुद से बच्चों को न दें।
- घर में रखी पुरानी दवा का उपयोग करने से बचें।
- यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











