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Chandra Grahan 2025: 7 सितंबर को भूलकर भी न लें एक निवाला, जानें ग्रहण में खाना न खाने की आध्यत्मिक वजह
Spiritual Reasons Behind Avoiding Food in Chandra Grahan : 7 सितंबर 2025 को इस साल का दूसरा और अंतिम पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। खगोल विज्ञान की दृष्टि से यह एक बेहद अद्भुत घटना है, जिसे लोग ब्लड मून (Blood Moon) भी कह रहे हैं। यह चंद्र ग्रहण भारत में भी नजर आएगा। यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 9:58 बजे शुरू होकर 8 सितंबर की रात 1:25 बजे खत्म होगा। माना जा रहा है कि इसका असर भारत के कई हिस्सों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, कश्मीर और भारत-चीन सीमा पर अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।
जहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह एक प्राकृतिक घटना है, वहीं परंपरा और अध्यात्म की मान्यताओं के अनुसार इसका असर स्वास्थ्य, मन और गर्भावस्था पर भी पड़ सकता है। इसी विषय पर गुरु श्री श्री रविशंकर और सद्गुरु ने अपने विचार शेयर किए हैं।

पका हुआ खाना जल्दी खराब क्यों हो जाता है?
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने इस विषय पर कहा कि ग्रहण के दौरान विशेषकर पका हुआ भोजन बहुत तेजी से खराब होने लगता है। सामान्य दिनों की तुलना में यह प्रक्रिया कहीं अधिक तेज हो जाती है। उन्होंने बताया कि ग्रहण का असर सिर्फ भोजन पर ही नहीं, बल्कि पूरी धरती और हमारे शरीर पर भी पड़ता है।
यदि इस समय आपने पका हुआ भोजन खाया है, तो वह आपके पेट में ही सड़ने लगेगा। यहां तक कि पौष्टिक भोजन भी कुछ घंटों में जहर जैसे प्रभाव पैदा कर सकता है। यही वजह है कि परंपरा में ग्रहण के दौरान भोजन वर्जित माना गया है।
ग्रहण से पहले खाना-पीना क्यों मना है?
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने एक वीडियो में बताया कि ग्रहण के दौरान खाना-पीना अशुभ माना जाता है। उन्होंने इसका वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण समझाते हुए कहा कि जब हम खाना खाते हैं तो शरीर का मेटाबॉलिज्म (पाचन क्रिया) तेज हो जाता है। वहीं, जब हम ध्यान या प्रार्थना करते हैं तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।
यदि आपने ग्रहण से ठीक पहले खाना खाया और तुरंत साधना या ध्यान करने बैठे, तो भोजन पूरी तरह पच नहीं पाएगा। यही कारण है कि प्राचीन परंपराओं में कहा गया है कि ग्रहण से पहले उपवास रखना चाहिए या बहुत हल्का भोजन करना चाहिए। इससे ध्यान, मंत्र-जप और साधना बेहतर तरीके से हो सकते हैं।
ग्रहण के बाद स्नान क्यों करते हैं लोग?
रविशंकर जी ने यह भी बताया कि ग्रहण के बाद स्नान करने की परंपरा का संबंध धार्मिकता से नहीं, बल्कि स्वच्छता से है। नहाने से शरीर ताजगी महसूस करता है और मानसिक शांति भी मिलती है। ग्रहण के बाद स्नान करने का असली उद्देश्य शरीर और मन को शुद्ध करना है।
मूड और नींद पर असर
चंद्र ग्रहण का सीधा संबंध चंद्रमा से है और चंद्रमा का असर हमारी भावनाओं और नींद पर माना जाता है। इस दौरान लोग अक्सर चिड़चिड़ापन, चिंता, तनाव या मूड स्विंग जैसी स्थितियां महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा नींद आने में परेशानी, बार-बार नींद टूटना या बेचैनी होना भी आम है। अगली सुबह थकान और ध्यान की कमी इसका परिणाम हो सकता है।
चंद्र ग्रहण और गर्भावस्था
ग्रहण को लेकर सबसे अधिक सवाल गर्भवती महिलाओं में होते हैं। इस विषय पर एक्सपर्ट ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं अक्सर ग्रहण को लेकर चिंतित हो जाती हैं।
परंपरा के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान खाना-पीना और बाहर निकलना मना किया जाता है। लेकिन डॉक्टर प्रियंका के अनुसार, ग्रहण से कोई हानिकारक रेडिएशन नहीं निकलता। यह सिर्फ एक खगोलीय घटना है।
हाँ, इतना ध्यान रखना चाहिए कि नंगी आंखों से चंद्रमा को न देखें, क्योंकि इससे आंखों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गर्भावस्था में 12 घंटे तक बिना खाना-पानी रहना खतरनाक हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपनी जरूरत के अनुसार खाना-पीना चाहिए।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब वह खुद गर्भवती थीं, तब भी एक बड़ा चंद्र ग्रहण हुआ था। उन्होंने सामान्य रूप से भोजन किया, आराम किया और साथ ही मेडिटेशन और पूजा भी की, जिससे मानसिक शांति मिली।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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