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JN.1 Variant: केरल में मिला कोरोना का JN.1 वेरिएंट का मामला, WHO पहले ही दे चुका है इसे लेकर वॉर्निंग
COVID 19 JN.1 Variant: केरल के त्रिवेंद्रम में कोरोना के नए वेरिएंट का केस सामने आया है। इस वायरस का एक नया वेरिएंट म्यूटेट होकर सामने आया है। इस वेरिएंट का नाम है JN.1 है। ये वेरिएंट BA.2.86 का ही एक प्रकार है। केरल में 79 साल की एक महिला में इस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। WHO ने इस वेरिएंट को लेकर सावधान किया था।
सरकार के सूत्रों के मुताबिक केरल और तमिलनाडु में इस वेरिएंट के कुछ केस मौजूद हैं हालांकि फिलहाल घबराने की कोई बात नहीं है।

कोरोना के इस नए सबवेरिएंट की पहचान सबसे पहले लक्जमबर्ग में की गई थी, जिसके बाद यूके, आइसलैंड, फ्रांस और अमेरिका में भी इसके मामले सामने आने लगे। ऐसे में आज इस आर्टिकल में जानते हैं कोरोना के इस नए सबवेरिएंट से जुड़ी वह सभी बातें, जो आपके लिए जानना जरूरी है।
जेएन.1 वेरिएंट क्या है ?
डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन सेंटर (सीडीसी) के मुताबिका कोरोना का यह सबवेरिएंट, ओमिक्रॉन सबवेरिएंट BA.2.86 का वंशज है, जिसे 'पिरोला' भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों की मानें, तो JN.1 और BA.2.86 के बीच केवल एक ही बदलाव है और वह है स्पाइक प्रोटीन में बदलाव। स्पाइक प्रोटीन जिसे स्पाइक भी कहा जाता है। यह वायरस की सतह पर छोटे स्पाइक्स जैसा दिखाई देता है। इसी वजह से लोगों में वायरस का संक्रमण ज्यादा तेजी से होता है।
जेएन.1 के लक्षण क्या है?
सीडीसी के मुताबिक कोरोना के इस नए सबवेरिएंट के अभी तक कोई खास लक्षण नजर नहीं आए हैं। ऐसे में यह पता लगा पाना मुश्किल है कि इसके लक्षण कोविड-19 के अन्य वेरिएंट से अलग है या नहीं। वहीं, बात करें कोरोना के आम लक्षणों की, तो इनमें निम्न शामिल हैं-
बुखार
लगातार खांसना
जल्दी थकान होना
नाक बंद या जाम हो जाना
नाक का बहना
दस्त
सिर में दर्द

कितना खतरनाक है नया वेरिएंट
फिलहाल, जेएन.1 को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। सीडीसी की मानें तो इस वेरिएंट के बढ़ते मामलों को देख यह कहा जा सकता है कि या तो यह ज्यादा संक्रामक है या फिर यह हमारे इम्यून सिस्टम से आसानी से बच सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि मौजूदा समय में इस बात का कोई सबूत नहीं है कि JN.1 वर्तमान में मौजूद कोरोना के अन्य वेरिएंट की तुलना में ज्यादा खतरनाक है या नहीं।
WHO ने किया था सावधान
WHO ने इस वेरिएंट को लेकर सावधान किया था। इस वॉर्निंग की दो वजहे हैं। पहली वजह ये है कि इस वेरिएंट में अब तक 40 से ज्यादा म्यूटेशन्स हो चुके हैं, इतनी तेजी से शक्ल बदलने वाला ये कोविड का पहला वेरिएंट कहा जा सकता है। दूसरी वजह ये है कि इस पर वैक्सीन से मिली इम्युनिटी काम नहीं कर रही है। ये वेरिएंट सबसे पहले लक्ज़मबर्ग में मिला जो उत्तर पश्चिमी यूरोप का एक छोटा सा देश है। लेकिन अब इसके शिकार हुए मरीज इंग्लैंड, फ्रांस, आइसलैंड और अमेरिका में भी मिल चुके है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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