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Air India Express के पायलट की कार्डियक अरेस्ट से मौत, क्या एयर टर्बुलेंस हो सकती है वजह?
Air India Express के एक युवा पायलट की अचानक मौत ने एविएशन इंडस्ट्री समेत पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 28 वर्षीय पायलट अरमान, जिन्होंने हाल ही में शादी की थी, की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। यह दर्दनाक घटना 9 अप्रैल की शाम इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर श्रीनगर से दिल्ली आई फ्लाइट की लैंडिंग के बाद हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लैंडिंग के बाद पायलट ने कॉकपिट में उल्टी की और एयरलाइन के डिस्पैच ऑफिस पहुंचते ही उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। हालांकि कार्डियक अरेस्ट के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होगी।

ऐसे मामलों में यह सवाल भी उठता है कि क्या एयर टर्बुलेंस यानी उड़ान के दौरान होने वाले झटकों का स्वास्थ्य पर कोई असर पड़ता है?
क्या होता है एयर टर्बुलेंस?
एयर टर्बुलेंस तब होता है जब एक हवाई जहाज़ उड़ान भरते समय अचानक हिलने-डुलने लगता है या उसमें झटके महसूस होते हैं। यह आमतौर पर हवा की दिशा, गति और दबाव में अचानक परिवर्तन के कारण होता है। जैसे समुद्र में नाव को लहरें हिला देती हैं, वैसे ही प्लेन को हवा के तेज़ बहाव से झटके लगते हैं।
टर्बुलेंस कई कारणों से हो सकता है, जैसे ऊँचाई पर बहने वाली जेट स्ट्रीम, तूफानी बादल, या वायुमंडलीय दबाव में असंतुलन। कई बार यह बिना किसी बादल के भी होता है, जिसे 'क्लियर एयर टर्बुलेंस' कहा जाता है और इसकी पूर्व चेतावनी नहीं मिलती।
क्या टर्बुलेंस हार्ट अटैक का कारण बन सकता है?
वैसे तो एयर टर्बुलेंस आमतौर पर नुकसानदेह नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में यह अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकता है। खासकर वे लोग जो पहले से हृदय संबंधी समस्याओं से ग्रसित हैं, उनके लिए यह स्थिति तनाव या घबराहट को बढ़ा सकती है, जिससे कार्डियक अरेस्ट जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
सावधानी बरतें
- यदि किसी को दिल से जुड़ी समस्या है, तो उड़ान से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
- दवाइयां साथ रखें और डॉक्टर की सलाह से ही यात्रा करें।
- गहरी सांस लेने जैसी रिलैक्सेशन तकनीकों का अभ्यास करें।
- आवश्यकता हो तो एंटी-एंग्जायटी मेडिकेशन के लिए डॉक्टर की सलाह लें।
पिछले कुछ वर्षों में युवा लोगों में हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। इसके पीछे मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या, व्यायाम की अति, धूम्रपान, शराब का सेवन और जेनेटिक कारण शामिल हो सकते हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि लोग अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहें और समय-समय पर जांच कराते रहें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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