मधुमेह को दूर करना है जरुर कीजिये ये 6 योगासन

अच्छे परिणाम के लिए योगिक क्रियाओं में नियमितता आवष्यक है। प्रतिदिन के अपने कार्य पर अडिग भी रहना है। यह या तो सुबह हो सकता है या फिर शाम को, जैसा आपको सुविधाजनक लगे।

मधुमेह एक बहुआयामी बीमारी है जो व्यायाम में कमी, सही खाना नहीं खाने और आजकल के नए राक्षस 'तनाव' से आती है।

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यह सभी हमारी जीवन षैली की ओर इशारा करते हैं। दवाईयों के साथ हमारी जीवनशैली भी इसके नियंत्रण में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

इस भागती-दौडती जीवनशैली में हमारे लिए समय निकालनाभी एक चुनौती है। इस संदर्भ में योगिक क्रियाएं जैसे योग, ध्यान, प्राणायाम हमारी बहुत मदद कर सकता है। इसे अपनी सुबह की सैर में से कटोती करके नहीं करना है बल्कि सुबह की सैर के साथ इन्हे करना है और मधुमेह को हराना है।

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अच्छे परिणाम के लिए योगिक क्रियाओं में नियमितता आवष्यक है। प्रतिदिन के अपने कार्य पर अडिग भी रहना है। यह या तो सुबह हो सकता है या फिर शाम को, जैसा आपको सुविधाजनक लगे। समय को नियोजित कीजिए और उस पर अनुशासित रहिए।

यहां पर कुछ आसन दिखाए जा रहे हैं जिससे मधुमेह को नियंत्रण में मदद मिलेगी-

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1. कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति प्राणायाम से हमारा तंत्रिका तंत्र और दिमाग के तंतु पुर्नजीवित होते हैं। यह मधुमेह के लिए बहुत लाभदायक है क्योकि इसमें पेट के अंगो को उत्तेजित करता है। इस प्राणायाम से रक्त प्रवाह अच्छा होता है और दिमाग भी ताजा रहता है।

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2. सुप्त मत्स्येन्द्रासन
इसे लेटकर और शरीर को घुमाकर किया जाता है जिससे अंदरूनी अंग प्रभावित होकर हमारा हाजमा सही करते हैं। इससे पेट के अंगों पर भी दबाव बनता है और यह मधुमेह के लिए उपयोगी है।

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3. धनुरासन
शरीर को धनु की तरह मोडना हमारे पेनक्रियाज को संचालन में मदद करता है इसलिए इस आसन को मधुमेह के लिए अच्‍छा माना गया है। इससे पेट की मांसपेशियों में मजबूती आती है और तनाव व थकान से मुक्ती मिलती है।

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4. पश्‍चिमोत्तानासन
पैरों को फैलाकर सामने की ओर झुकने पर पेट और पैल्विक अंगों के लिए तनाव उत्पन्न होता है और यह मधुमेह के लिए उपयोगी है। इससे शरीर में प्राण का स्तर संतुलित होता है और दिमाग को शांत रखने में सहायक होता है।

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5. अर्ध्‍य मत्स्येन्द्रासन
यह बैठकर किया जाने वाला आसन है। रीढ की हड्डी को घमाव मिलता है साथ ही पेट को भी अच्छी वर्जिष मिलती है। इससे फेफडों को आक्सीजन की भरपूर मात्रा मिलती है। इससे रीढ की हड्डी में रक्त प्रवाह सही होता है।

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6. शवासन
अंत में विश्राम करने के लिए शवासन होता है, इसमें शरीर को गहरी ध्यान अवस्था में जाया जा सकता है। विश्‍व भर में लोग इसे सीख चुके हैं और शारीरिक व मानसिक रूप से बहुत बदलाव महसूस कर चुके हैं। यह एक आसान और सहज प्रक्रिया है इसे आसानी से सीखा जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए आर्ट ऑफ लिविंग की वेबसाईट पर देखें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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