अब मछली खा कर दूर होगी अल्‍जाइमर की बीमारी

Fish
जिन लोगों के खान पान में मछली शामिल होती है, उनका मानसिक स्‍वास्‍थ्‍‍य अच्‍छा रहता है और साथ ही वे अल्‍जाइमर जैसी खतरनाक बीमारी के खतरे से भी दूर रहते हैं। पिट्सबर्ग विश्‍वविघालय के मेडिकल सेंटर के सायरस राजी के अनुसार यह ऐसा पहला अध्‍ययन है जिसमें मछली खाने मस्तिष्‍क की संरचना और अल्‍जाइमर के खतरे के बीच संबध स्‍थापित किया गया है।

उन्‍होंने बताया कि अध्‍ययन के परिणाम बताते हैं कि लोग प्रति सप्‍ताह कम से कम सिकी हुई यह उबली हुई मछली खाते हैं उनके मस्तिश्‍क की संरचना में ग्रे मैटर क्षेत्र संरक्षित रहता है। अल्‍जाइमर बीमारी में मस्तिश्‍क के इस हिस्‍से की खास भूमिका होती है। अल्‍जाइमर बीमारी का कोई इलाज नहीं होता है। यह बीमारी धीरे धीरे बढती जाती है और इससे याददाश्‍त कम होती जाती है। अध्‍ययन के लिए कार्डियोवेस्‍कुलर हेल्‍थ स्‍टडी के सामान्‍य बोध क्षमता वाले 260 लोगों का परीक्षण किया गया।

तली-भुनी मछली खाने वाले लोगों के मस्तिश्‍क के ग्रे मैटर वाले हिस्‍से में कोई बदलाव नहीं देखा गया। इन लोगों के दिमाग में ग्रे मैटर नहीं बढा। ग्रे मैटर बोध क्षमता को कम होने से रोकता है। रेडियोलॉजिस्‍ट सोसायटी ऑफ नॉर्थ अमरीका की वार्षिक बैठक में इस अध्‍ययन के परिणाम पेश किए गए। ध्‍यान देने योग्‍य यह बात है कि मछली में ओमेगा-3 प्रचुर मात्रा में होता है, इसी वजह से अल्‍जाइमर में फायदा होता है। यदि कोई मछली ना खाना चाहे तो इसके स्‍थान पर फ्लेक्‍ससीड खा सकते हैं, क्‍योकि इसमें भी ओमेगा-3 प्रचुर मात्रा में होता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Monday, December 12, 2011, 18:49 [IST]
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