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खतरनाक हैं बाजार में बिक रहे आम

आम फलों का ही नहीं कई दिलों का भी राजा है यानी ये फल लोगों को बहुत पसंद आता है। फिर चाहे वो दशहरी हो, लंगड़ा, चौसा या बंबईया, जितनी तरह की वैराइटी उतनी तरह का स्वाद। लेकिन.. ये पीला-पीला पका हुआ आम जितना खूबसूरत दिखता है स्वास्थय के लिए उतना ही खतरनाक है। खासतौर जो वो आम जो आजकल के सीजन में मिल रहा है। आम की असली फसल जून के तीसरे हफ्ते में ही आती है।
जो आम आजकल आप खा रहे हैं वो कैल्शियम कारबाईड से पकाया गया है। कैल्शियम कारबाईड से पकाया गया आम स्वास्थय के लिए बेहद खतरनाक होता है। इसका स्वास्थ्य पर दूरगामी परिणाम होता है। कैल्शियम कारबाईड में आर्सेनिक और फासफोरस होता है। एक बार पानी में मिलने के बाद इससे एसिटिलीन गैस पैदा होती है जिसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। इससे सिरदर्द, चक्कर आना, मूड में परिवर्तन, नींद आना और अन्य दिमागी बीमारियां शामिल हैं।
अप्राकृतिक तरीके से फलों को पकाना कानूनन जुर्म है। इसलिए आम खरीदने से पहले सावधान रहिए। इसके लिए एक बेहतर उपाय ये है कि कच्चा आम खरीदा जाए और घर में उसे प्राकृतिक तरीके से पकाया जाये। इस तरह से पकाया गया आम स्वास्थ्य के साथ साथ स्वाद पर भी खरा उतरेगा। लखनऊ के कृषि वैज्ञानिक डा. केबी त्रिवेदी का कहना है कि आम की असली फसल जून के तीसरे सप्ताह में ही आती है। बाजार में जो आम मिल रहे हैं, वो वही आम होते हैं, जो या तो आंधी में गिर गये हों या फिर जल्द पैसा कमाने के लालच में समय से पहले डाल से तोड़ लिये गये हों।
जून के तीसरे सप्ताह में आम की जो पहली खेप आती है, वो इतनी मीठी नहीं होती। एक बार बारिश होने के बाद ही आम प्राकृतिक रूप से पकने के बाद ज्यादा मीठा होता है। लिहाजा अभी बाजार में मिल रहे आम नहीं खायें और कुछ वक्त जीभ पर लगाम लगाएं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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