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थायरायड की बीमारी है तो करें ये 10 योगासन
योग, शरीर की ग्रन्थियों को स्वस्थ और मेटाबॉल्जिम को मजबूत बनाता है। योग के कई शारीरिक और मानसिक लाभ होते हैं जो शरीर के कई रोगों को दूर कर देते हैं। यह, हाईपो या हाइपरथायराडिज्म को कम करने में भी मददगार साबित होते हैं।
डायबिटीज़ से परेशान हैं तो जरुर करें ये 5 योगासन
बोल्डस्काई के इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे योग आसनों के बारे में बताएंगे, जिन्हे करने से आपको होने वाली थॉयराइड की समस्या में राहत मिल सकती है।
सेक्स लाइफ को बेहतर बना दे ये 7 योग आसन
नोट: इस आर्टिकल में आपको जिन योगा के बारे में बताया जा रहा है वे इस बीमारियों में लाभकारी होते हैं पर अगर आपके गले में घेंघा रोग है या थायरोटॉक्सिकोसिस नामक बीमारी है तो पहले उस बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर से सम्पर्क करें।

1. सर्वांगसन:
थॉयराइड ग्रन्थियों के लिए सबसे प्रभावी आसन, सर्वांगसन होता है जिसमें कंधों को उठाना होता है। ऐसा करने से पॉवरफुल पॉश्चर के कारण ग्रन्थि पर दबाव पड़ता है। थॉयराइड, सबसे बड़ी रक्त आपूर्तिकर्ता ग्रन्थि होती है और इस आसन को करने से रक्त के परिसंचरण में सुधार होता है।

2. मत्स्यासन:
सर्वांगसन के अलावा, आप मत्स्यासन भी कर सकते हैं इसमें आपको मछली की तरह पोज़ देना होता है यानि मछली की तरह बन जाएं। इस आसन को करने से गले में खिंचाव पड़ता है और थॉयराइड ग्रन्थि पर दबाव बनता है।

3. हलासन:
सर्वांगसन और मस्त्यासन करने के बाद हलासन करने से थॉयराइड ग्रन्थि के लिए किऐ जाने वाले आसनों का एक पैकेज पूरा हो जाता है। ये तीन आसन सबसे प्रमुख होते हैं। इस आसन में आपको इस तरीके से करना होता है जैसे हल चलाकर रहे हों। ऐसा करने से आपकी गर्दन पर जोर पड़ता है और थॉयराइड ग्रन्थि पर दबाव पड़ता है।

4. विपरीतकरनी:
विपरीत का अर्थ होता है उल्टा और करनी का अर्थ होता है किसके द्वारा। विपरीतकरनी नाम का यह आसन, थॉयराइड ग्रन्थि के लिए रामबाण होता है और इसमें सकारात्मक सुधार ला देता है। अगर आप ऊपर दिए गए तीन क्रमबद्ध आसनों को करने में सक्षम नहीं है तो इस आसन को करें, अवश्य लाभ मिलेगा।

5. ऊष्ट्रासन:
इस आसन में ऊंट की समान अपनी गर्दन हो करना होता है।

6. भुजंगासन:
इस आसन से गर्दन पर काफी खिंचाव आता है और थॉरूराइड गन्थि पर दबाव पड़ता है।

7. सेतुबंध सर्वांगसन (ब्रिज फार्मेशन पोज़):
यह आसन, थॉयराइड डिस्ऑर्डर के लिए सबसे महत्वपूर्ण आसन होता है। अगर कोई भी इस आसन को सही प्रकार से करना सीख लें, तो उसे थॉयराइड की समस्या से आसानी से छुटकारा मिल सकता है।

8. शीर्षसान (हेडस्टैंड पोज़):
शीर्षसान, थॉयराइड ग्रन्थि को मैनेज करने के लिए सबसे अच्छा योगासन होता है। इसे करने से मेटाबोलिक फंक्शन, संतुलित रहता है और शरीर में ताजगी व अलर्टनेस रहती है। ऐसा ही नहीं, बल्कि अन्य रोगों में भी यह लाभकारी होता है।

9. धर्नुसन (बो पोज़):
धनुष बाण की तरह से यह पोज़ दिया जाता है जिससे गले पर खिंचाव पड़ता है। इसे करने से हारमोन्स नियंत्रण में रहते हैं, साथ ही गले में तनाव के कारण ग्रन्थि पर भी दबाव पड़ता रहता है।

उज्जयाई प्राणायाम
थॉयराइड की समस्या होने पर उज्जयाई प्राणायाम सबसे अच्छा रहता है। इससे शरीर को आराम मिलता है साथ ही गले सम्बंधी सभी रोगों में राहत मिलती है।



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