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इन चीजों को खाने से नहीं बनते हैं खून के थक्के, हल्दी और अदरक करते हैं ब्लड थीनर का काम
शरीर में खून का थक्का बनना एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे हमारा शरीर स्वयं ही बनाता है। इसे ब्लड क्लॉटिंग भी कहते है। लेकिन जब कभी हमारे शरीर के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों जैसे हृदय, फेफड़े या मस्तिष्क में खून के थक्के बन जाते हैं, तो यह काफी खतरनाक हो सकता है। जिसका समय रहते इलाज ना हो तो कॉम्पलीकेशन बढ़ सकती हैं। यूं तो इस समस्या से निपटने के लिए डॉक्टर खून को पतला करने के लिए दवाइयां लिखते हैं, लेकिन इसके अलावा भी आप कुछ घरेलू चीजों को डाइट में शामिल करके खून को नेचुरली पतला कर सकते हैं जैसे कि-

हल्दी
हल्दी में ऐसे गुण होते हैं जो ब्लड के थक्के से होने वाले जोखिम को कम करने में आपकी मदद कर सकती हैं। इसमें करक्यूमिन नामक एक सक्रिय तत्व होता है जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीकोआगुलेंट गुण होते हैं। जो ब्लड क्लॉटिंग को रोकने में सहायक है। आप इसे अपनी सब्जी से लेकर सूप यहां तक कि दूध में भी डाल कर पी सकते हैं।

लाल मिर्च
वैसे तो लाल मिर्च का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है, जो खाने में तीखापन बढ़ाता है। लेकिन बहुत कम लोग ये बात जानते हैं कि यह कई पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत है। लाल मिर्च में सैलिसिलेट भी अधिक होते हैं, जो ब्लड का थक्का बनने की प्रक्रिया को रोकता है। लेकिन इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करना दूसरी परेशानियों को बढ़ावा दे सकता है, इसलिए इसे कम मात्रा में लें। वैसे खून को पतला करने के अलावा लाल मिर्च लो ब्लड प्रेशर, ब्लड सर्कूलेशन को सुधारने और दर्द को कम करने में भी सहायक है।

लहसुन
लहसुन न केवल जायका बढ़ाने के काम आता है, बल्कि इसमें एंटीबायोटिक और एंटीमाइक्रोबॉयल गुण भी होते हैं जो खून के थक्कों की गांठों को कम करता हैं। थंबोसिस जैसी बीमारियों में खून को नेचुरली पतला करने में ये काफी प्रभावी माना गया है।

दालचीनी
वहीं, दालचीनी में कैमुरिन होता है, जिसे कुछ दवाओं में इसलिए शामिल किया जाता है क्यूंकि ये शरीर में खून का थक्का बनने से रोकने में सहायक है। इसके अलावा दालचीनी ब्लडशुगर कंट्रोल करने, गठिया और अन्य सूजन संबंधी परेशानियों से भी राहत पहुंचाती हैं। हालांकि, दालचीनी से होने वाले हेल्थ बेनिफिटस पर रिसर्च अभी भी जारी है।

अदरक
अदरक में कई पौधों में पाया जाने वाला नेचुरल कैमिकल सैलिसिलेट होता है। यह सैलिसिलिक एसिड से बनता हैं। एवोकैडो, कुछ बैरीज, मिर्च और चेरी में भी सैलिसिलेट होता है, जो खून के थक्के को बनने से रोक सकता है।

विटामिन ई
खून को पतला करने में विटामिन ई को भी महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि एक व्यक्ति इसे कितनी मात्रा में लेता है। कुछ रिसर्च से ये पता चलता है कि जो लोग खून को पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं उन्हें बहुत ज्यादा विटामिन ई का सेवन करने से बचना चाहिए। वैसे एक्सपर्टस की मानें तो बादाम,कुसुम का तेल, सूरजमुखी के बीज, सूरजमुखी का तेल, साबुत अनाज और गेहूं के बीज का तेल जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन ई का बेहतर स्त्रोत है, इसलिए प्रतिदिन इनका सेवन करके शरीर में विटामिन ई की कमी को पूरा किया जा सकता है।

अंगूर के दाने का रस
कुछ रिसर्च में ये बात सामने आई है कि अंगूर के बीज का अर्क कई तरह की हार्ट और ब्लड से जुड़ी बीमारियों में संभावित फायदा पहुंचाते है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो ब्लड की कोशिकाओं को बनाए रखने और ब्लडप्रेशर को कम करने में मदद करते हैं। अंगूर के बीज का अर्क आपके शरीर में खून को स्वाभाविक रूप से पतला कर सकता है, और इससे होने वाली परेशानियों से राहत देता है। लेकिन जिन्हें पहले से ब्लड संबंधी समस्या है, या जो ब्लड को पतला करने वाली दवाईयां ले रहे है या जो किसी तरह का ऑपरेशन करा चुके है उन लोगों को अंगूर के बीज के अर्क का उपयोग नहीं करना चाहिए।

मेथी
भारत में मेथी का प्रयोग किसी भी चीज का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते है यह कैंसर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लडप्रेशर, हार्ट की स्थिति, फंगल इंफेक्शन, सूजन आदि के जोखिम को कम करने में भी सहायक है। मेथी लंबे समय तक ब्लीडिंग डिसऑर्डर को रोकने और कार्डियोवस्कुलर सिस्टम में सुधार करने में मदद कर सकता है।
नोट- अगर आप पहले से ही खून को पतला करने के लिए दवाई का सेवन कर रहे हैं तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से बात अवश्य करें।



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