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कुत्ता काटने पर जूता रगड़ने और मिर्च लगाने से मर जाता हैं वायरस, जानें रेबीज से जुड़े 5 झूठी बातें
Rabies Myths : अक्सर जब कुत्ता किसी व्यक्ति को काट देता है, तो लोग तुरंत उस पर मिर्ची लगाने या फिर जूता रगड़ने की सलाह देते हैं। लेकिन ऐसा करने से घाव की स्थिति और बिगड़ सकती हैं।
कुत्ते के काटने पर घाव को भरने और रेबीज से बचने के लिए ऐसे अंधविश्वास से दूरी बनना चाहिए। हमारे आसपास रेबीज को लेकर कई तरह के मिथक फैलें हुए हैं। जिनकी सच्चाई आपको जानना जरुरी हैं। वरना गलत इलाज के चलते स्थितियां गंभीर हो सकती हैं।

Myth: कुत्ता काटने पर घाव पर मिर्च लगानी चाहिए?
Fact: कुत्ता काटने पर हम अक्सर घाव पर लाल मिर्च, जला हुआ दूध या जूती रगड़ते हैं। मिथ है कि इससे कुत्ते में मौजूद रेबीज के कीटाणु मर जाते हैं। मगर यह प्रैक्टिस काफी गलत है। कुत्ता काटे तो सबसे पहले अपना घाव तुरंत धोएं ताकि कीटाणु साफ हो जाएं।
Myth: कुत्ते के काटने के घाव को धोने से कुछ नहीं होता है?
Fact: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कुत्ते के काटने के बाद सबसे पहले तुरंत प्रभाव से घाव को धोना चाहिए। इससे रेबीज होने की संभावना सीमित हो जाती है। लेकिन बता दें कि रेबीज के इलाज के लिए केवल धोना ही पर्याप्त नहीं है।
Myth: रेबीज़ को रोका नहीं जा सकता?
Fact: वैक्सीन के माध्यम से बिल्लियों और कुत्तों में रेबीज होने से रोका जा सकता है। अमेरिका में रहने वाले बिल्ली, कुत्ते या व्यक्ति में वैक्सीन के व्यापक उपयोग के वजह से रेबीज होने की संभावना 1% से भी कम है।

Myth: रेबीज होने पर कुत्ते की तरह भौंकने लगता है मरीज?
Fact: रेबीज का वायरस जब खून के संपर्क में आता है, तो उसे इरिटेशन होती है, सांस लेने में तकलीफ होती है। मसल्स में ऐंठन आदि होती है, वह आक्रामक हो जाता है। कभी-कभी जो उसकी देखभाल कर रहा होता है उससे भी दूर भागता है, उसे हाइड्रोफोबिया यानी पानी से डर लगने लगा होता है। अगर उसे गर्दन, मुंह या इसके आसपास काटने के बाद रेबीज हुआ है तो मरीज के ब्रेन पर भी वायरस हमला कर देता है और उसका अजीब ढंग से वह चिल्लाता या रोता है। उसका ब्रेन ठीक से काम नहीं कर पाता है तो लोग उसे कुत्ते जैसे व्यवहार से जोड़कर देखते हैं।
Myth: रेबीज सिर्फ कुत्ते के काटने पर होता है?
Fact: यह वायरस सिर्फ मैमल्स यानी स्तनपायी जीवों को ही शिकार बनाता है। स्तनपायी यानी इंसान, कुत्ते, बिल्ली, बंदर, चमगादड़, लोमड़ी, घोड़े जैसे वे सभी जीव, जिनमें मैमरी ग्लैंड पाई जाती है। जिनके बच्चे मां का दूध पीकर बड़े होते हैं। इसमें जंगली जानवरों के साथ ही पालतू पशु भी शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक कुत्तों के अलावा चमगादड़ दूसरा ऐसा जानवर है, जिसकी वजह से हजारों मौतें हो सकती हैं।
Myth: रेबीज के लक्षण तुरंत नजर आने लग जाते हैं?
Fact: यह बात सरासर गलत है, रेबीज का वायरस इंसानी शरीर में सुप्त अवस्था में कई साल तक रह सकता है। अगर इम्यूनिटी अच्छी है तो यह तुरंत असर नहीं दिखाएगा। लेकिन उम्र बढ़ने और मगर इम्यूनिटी कमजोर होने पर रेबीज का वायरस 25 साल बाद भी असर दिखा सकता है। ऐसा एक उदाहरण 2009 में गोवा के एक मरीज में मिला था, जिसमें 25 साल बाद रेबीज के लक्षण आए और उसे बचाया नहीं जा सका।
Myth: क्या रेबीज सभी कुत्तों के काटने पर होता है?
Fact: जब कोई रेबीज -ग्रस्त कुत्ता किसी व्यक्ति को काट लेता है, तभी रेबीज हो सकता है अगर किसी कुत्तें को रेबीज के टीके न लगे हों तो। अगर कुत्तों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगी हुई हो, तो ऐसे में रेबीज होने की संभावना खत्म हो जाती है। आम भाषा में कहें तो रेबीज संक्रमित कुत्ता कहा जाता है। यह बीमारी लाइलाज होती है इसलिए ऐसे कुत्ते को मार दिया जाता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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