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हाथ जोड़ने से भी पता चल जाएगा कि आपको डायबिटीज है या नहीं, जानें कैसे?
डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जो किसी व्यक्ति के शरीर केे कई अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित करता है। हालांकि, अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है और इसलिए वे इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, इन लक्षणों व शरीर में आने वाले बदलावों का समय रहते पता लगाना बेहद जरूरी होता है। डायबिटीज होने पर कई कॉम्पलीकेशन हो सकती हैं। उन्हीं में से एक है हाथों को सही ढंग से नमस्कार मुद्रा में ना जोड़ पाना।
हो सकता है कि आप प्रार्थना करने या फिर किसी को नमस्कार करने के लिए दोनों हाथों को आप में जोड़ते हों, लेकिन इसे सही ढंग से ना जोड़ पाते हों तो यह डायबिटीज कायरोआर्थ्रोपैथी का एक लक्षण हो सकता है। यहां तक कि जर्नल क्यूरियस में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 28.5 प्रतिशत डायबिटीज पेशेंट को यह लक्षण नजर आ सकता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको डायबिटीज कायरोआर्थ्रोपैथी के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं-

डायबिटीज कायरोआर्थ्रोपैथी क्या है?
डायबिटीज कायरोआर्थ्रोपैथी को डायबिटिक हैंड सिंड्रोम भी कहा जाता है। यह एक ऐसी हेल्थ कंडीशन होती है, जब किसी व्यक्ति के हाथ के कनेक्टिव टिश्यू पर नेगेटिव असर पड़ता है। जब लंबे समय तक डायबिटीज का ध्यान नहीं रखा जाता है तो इससे शरीर में अन्य भी कई परेशानियां शुरू हो जाती है। मसलन, स्किन में बदलाव, ज्वॉइंट्स या फिर हाथों के टिश्यू को नुकसान पहुंचता है। साथ ही साथ, इससे ज्वॉइंट्स की मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी भी कम हो जाती है। क्लीवलैंड क्लिनिक जर्नल ऑफ मेडिसिन के अनुसार, टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह वाले दोनों लोगों में यह स्थिति विकसित हो सकती है।
क्या कहती है स्टडी
इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, डायबिटीज कायरोआर्थ्रोपैथी होने पर व्यक्ति अपने दोनों हाथ जोड़कर इसी पहचान कर स कता है। जहां एक सामान्य व्यक्ति बिना किसी परेशानी के प्रार्थना करने की मुद्रा में दोनों हाथ जोड़ पाता है, वहीं डायबिटीज कायरोआर्थ्रोपैथी पीड़ित व्यक्ति की ज्वॉइंट्स मोबिलिटी लिमिटेड हो जाती है, जिससे उसके लिए नमस्कार मुद्रा में हाथ जोड़ पाना मुश्किल हो जाता है। इस हेल्थ कंडीशन में व्यक्ति के लिए अपनी उंगलियों और हाथों को पूरी तरह से फैलाना या मोड़ना काफ चैलेंजिंग हो सकता है।
पहचानें अन्य लक्षण
डायबिटीज कायरोआर्थ्रोपैथी होने पर आप अन्य भी कई लक्षणों की पहचान कर सकते हैं-
• हाथों के पीछे की त्वचा मोटी और मोमी दिखने लगती है। यह अक्सर कोलेजन और कनेक्टिव टिश्यू में परिवर्तन के कारण होता है।
• हाथों के जोड़ों में लचीलापन कम होने से वस्तुओं को पकड़ने में समस्या होना।
• डुप्युट्रेन कन्ट्रैक्चर का डेवलप होना, जिसके कारण हथेली और उंगलियों की त्वचा के नीचे के टिश्यू मोटे और छोटे हो जाते हैं, जिससे उंगलियां अंदर की ओर मुड़ जाती हैं।
• डेली एक्टिविटीज जैसे शर्ट के बटन लगाना या जूते के फीते बांधना, आदि में समस्या होना।
डायबिटीज कायरोआर्थ्रोपैथी से बचाव के उपाय
डायबिटीज कायरोआर्थ्रोपैथी को रोकने या फिर उसे मैनेज करने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी तरीकों को अपनाया जा सकता है। मसलन-
• अपने ब्लड शुगर लेवर को रेग्युलरली मॉनिटर करें और उसे सामान्य बनाए रखें। ध्यान दें कि आपका एचबीए1सी लेवल टारगेट रेंज के भीतर ही हो।
• बेहद ब्लड सर्कुलेशन और जोड़ों के लचीलेपन में सुधार के लिए नियमित रूप से व्यायाम जरूर करें। ऐसी एक्टिविटीज करें, जो हाथ की फ्लेक्सिबिलिटी और मजबूती को बढ़ावा दें।
• डायबिटीज को मैनेज करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। बैलेंस डाइट और एक्सरसाइज के जरिए खुद का ख्याल रखें।
• दर्द और सूजन को मैनेज करने के लिए नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाई ली जा सकती है। हालांकि, इसे किसी डॉक्टर के परामर्श से ही लें।
• अपनी स्किन को बार-बार मॉइश्चराइज़ करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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